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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिली आयुर्वेद को एक नई पहचान

मैं भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी(MNC) बनाना चाहती हूँ - डॉ. स्मिता नरम

13th Jul 2015
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जब वह 10 साल की थी तो डॉ. स्मिता नरम के पेट में काफी दर्द रहता था| जब दर्द तेज होने लगा तो उनके माता-पिता को लगा कि appendicities हो सकता है और वे उन्हें सर्जरी के लिए अस्पताल ले जाने की सोची| परन्तु उनके पिता ने उनके चाचा को कॉल किया जो गाँव में रहते थे और वहाँ पर वैध थे| चाचा ने उनके पिता को हर्बल इलाज बताया| उनके पिता ने गाढ़ा बनाया और स्मिता को दे दिया और दर्द गायब हो गया| घरेलु उपचार से बीमारी का इलाज किया गया|

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इस घटना से डॉ. नरम को आयुर्वेद में विश्वास और भी गहरा हो गया| वह कहती हैं, 

“मेरे पिता, दादा और चाचा वैध थे| बचपन से मैंने कभी भी एलोपैथी की दवाई नही ली| अगर मैं बीमार होती तो मुझे ‘सुदर्शन घंवती’ दिया जाता था और प्रत्येक रविवार को एक चम्मच अरंडी का तेल पीना पड़ता था|”

इस तरह के बहुत से अनुभवों और प्राचीन विज्ञान से निकट के कारण डॉ. नरम ने आयुर्वेद का अध्ययन किया| लेकिन वह सिर्फ व्यवसायी नही बनना चाहती थी इसलिए उन्होंने ayushkti ayurveda pvt Ltd. की स्थापना की जो उनके विज्ञान और आयुर्वेद के प्रति प्यार का परिणाम है|

आयुर्वेद की शक्ति का दोहन

डॉ. नरम अपने पति से आयुर्वेद की पढ़ाई के दौरान मिली और स्नातक के बाद उन्होंने स्वयं ही काम करने का निर्णय लिया| उनकी आयुर्वेद में अच्छी पकड़ ने बहुत से लोगों को जोड़ने में मदद की| लेकिन डॉ. नरम स्थानीय स्तर पर लोगों से जुड़ना चाहती थी| डॉ. नरम कहती हैं, 

“आयुर्वेद में रोगों का इलाज करने की असीम शक्ति है और मैं किसी चीज के द्वारा आयुर्वेद की अच्छाइयों को दुनियाभर में फैलाना चाहती थी|”

क्या आप जानते हैं, गठिया, बांझपन, फाइब्रॉएड और त्वचा रोग जैसी बीमारीयों का आयुर्वेद में उपचार है| इन दावों को मान्य करने के लिए, नीदरलैंड से डॉ विक्टर मन्हावे ‘Ayushakti’ आये। तीन साल तक उन्होंने अध्ययन किया और Ayushakti के बांझपन के रोगियों को देखा जिन्हें PCOD, कम शुक्राणुओं की संख्या और कम गतिशीलता, अभ्यस्त गर्भपात और सामान्य बांझपन जैसे विभिन्न समस्यायें थी| उन्हें इलाज के संबंध में आशाजनक परिणाम मिले। उनके निष्कर्षों के आधार पर, उन्होंने अपना थीसिस eramus university, netherlands में जमा किया, जिसने कहा कि जहाँ नार्मल इलाज से बांझपन पर काबू पाने में सफलता की दर 15 से 20 प्रतिशत है वहीं Ayushakti के आयुर्वेदिक इलाज से सफलता की दर 42 प्रतिशत – प्रभावी दर से दोगुना है|

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उनका पहला प्लांट पालघर, महाराष्ट्र में लगा| उत्पादन आसन था पर उसे यूरोपियन स्टैण्डर्ड के अनुसार जाँच करना एक चुनौती थी| “हम लैब में जाँच करके उत्पाद को यूरोप के distributor को भेजते थे| वे उसे रखा लेते थे लेकिन जब एक साल बाद जब यूरोपियन लैब में जाँच होती तो हमारे उत्पाद खरे नही उतरते| भारतीय प्रयोगशाला अविश्वसनीय साबित हुई। हमारे उत्पादों की शुद्धता पर सवाल उठाया जा रहा था|”- डॉ. नर्रम याद करते हुए कहती हैं|

उनकी पूरी टीम इस समस्या को सुधारने में लग गयी और उन्होंने IIT प्रौद्योगिकीविद् की मदद से इस समस्या का हल निकला| उन्होंने अपने सभी उत्पादों को जर्मनी के लैब में जाँचने का निर्णय लिया| वह कहती हैं, 

“हम भारी धातु मुक्त, मिक्रोबियन मुक्त, कीटनाशक मुक्त उत्पादों चाहते थे और पूरे भारत में भारी धातुओं की जांच की AAFS मशीन नही थी| यहां तक कि बड़ी फार्मा कंपनियों में भी यह मशीन नहीं थी| यह 1993 की बात है| अब हमने मशीन खरीद ली है| लेकिन उस समय यह हमारी सबसे बड़ी चुनौती थी| मैंने सीखा, जहाँ चाह होती है,वहीं राह होती है|”

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

2005 तक Ayushakti बिना किसी प्रचार के काम करता था लेकिन इसके बावजूद वे बहुत लोकप्रिय थे और 300 से अधिक रोगियों को ठीक कर दिया था| फिर उनके दिमाग में फ्रैंचाइज़ी चेन का विचार आया, तब से Ayushakti Ayurveda ने भारत में सात और जर्मनी में तीन क्लीनिक खोले हैं| उनके अंतरराष्ट्रीय गठबंधन की एक दिलचस्प कहानी है| एक इटालियन महिला, विक्टोरिया रासिदोरिया आध्यात्मिक चिकित्सा के लिए भारत आयी थी| जब उन्होंने भारत छोड़ने का निर्णय लिया तो उन्हें हेपेटाइटिस ए हो गया था| किसी ने उन्हें Ayushakti और वहाँ 15 दिन रुकने के लिए कहा| डॉ नरम कहती हैं -

“हेपेटाइटिस ए बहुत तेजी से फैलता है। आप दो-तीन दिनों में इसके लक्षण नही दिखते हैं, लेकिन बिलीरुबिन बहुत तेजी से बड़ता है। उसकी आँखें एक दिन के भीतर ही पीली हो गयी थी। हम उन्हें अस्पताल वापस नही ले जा सकते थे, लेकिन मैंने उन्हें अपने घर में रखा और उन्हें विशेष आहार, जड़ी बूटियों और आयुर्वेदिक चिकित्सा का उपचार दिया| वह दैनिक आधार पर इटली में अपने डॉक्टरों के साथ संपर्क में थी| जब वह वापस गयी तो उन डॉक्टरों ने उसकी जाँच की और वे परिणाम से चकित थे, जो 6 महीने में नही हो सकता, वह 15 दिन में कैसे हो गया|”

5 इटालियन डॉक्टर भारत में आयुर्वेद सीखने के लिए आये और इस तरह Ayushakti ने यूरोपियन अभियान शुरू किया| अंतर्राष्ट्रीय विस्तार, अभी तक भागीदारी के माध्यम से किया गया है। आज, दुनियाभर में यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को मिलकर उनके 100 अलायन्स हैं| डॉ. नरम कहती हैं कि वह Ayushakti क्लिनिक ब्रिटेन और यूरोप में खोलने की सोच रही हैं|

समर्थन

डॉ. नरम अपने शुरूआती दिनों में अपने पति के समर्थन के बारे में बात करते हुए भावुक हो जाती हैं| वह कहती हैं, “उन्होंने न केवल व्यापार में मेरी मदद की, बल्कि बच्चे के जन्म में देरी के लिए मेरे निर्णय का समर्थन किया|” वह मानती हैं कि उनके ससुराल वाले, विस्तारित परिवार और वफादार कर्मचारी उनकी ताकत हैं| “मेरा कुछ स्टाफ 25 साल से मेरे साथ है, और यह मेरा उन पर विश्वास ही था जो हमें यहाँ तक ले आया|”

ASSOCHAM के अनुसार, 2015 तक भारतीय हर्बल उद्योग 7,500 से बढ़कर 15,000 होने की संभावना है| और Ayushakti का इसमें अहम योगदान है| डॉ.नरम कहती हैं कि Ayushakti पिछले 10 सालों से 30 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है| वह बड़ी ही महत्वाकांक्षा से कहती हैं, 

“लोग समझने लगे हैं कि प्राकृतिक साधनों के माध्यम से रोकथाम और उपचार के बजाय, एक गोली लेना कोई समाधान नही है| हमने धीरे-धीरे यहाँ तक पहुंचे हैं और अब हमारे पास सभी संसाधन हैं| मैं भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी(MNC) बनाना चाहती हूँ|”
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