संस्करणों
प्रेरणा

ओरलैंडो गोलीबारी के दौरान लोगों की जान बचाने में आगे रहा भारतीय मूल का सार्जेंट यूसुफ

17th Jun 2016
Add to
Shares
0
Comments
Share This
Add to
Shares
0
Comments
Share

भारतीय मूल के एक पूर्व मरीन की ओरलैंडो के समलैंगिक क्लब पर हुए आतंकवादी हमले के दौरान कई लोगों की जान बचाने को लेकर खूब प्रशंसा हो रही है। इस हमले में 49 लोगों की मौत हो गयी थी।

पल्स नाइटक्लब के 24 वर्षीय बाउंसर इमरान युसुफ को रविवार तड़के गोलियों की आवाज सुनायी दी। युसुफ ने सीबीएस न्यूज से कहा, ‘‘शुरू में तीन चार गोलियाँ चलने की आवाज आयी। यह स्तब्ध कर देने वाला था। तीन चार गोलियाँ चलीं और आप कह सकते हैं कि यह उच्च क्षमता की थी।’’ पिछले ही महीने मरीन कोर छोड़ चुके पूर्व सार्जेंट युसुफ ने कहा कि इसी समय उनका मरीन कोर प्रशिक्षण काम आया।

उसने कहा, ‘‘सभी लोग ठिठक गए थे। मैं यहां पीछे था ओर मैंने देखा कि लोग पिछले कॉरीडर में इकट्ठा हो रहे थे और जगह ठसाठस भर गयी।’’ युसुफ को पता था कि इन डरे-सहमे हुए लोगों के पीछे एक दरवाजा था, लेकिन किसी को उसे खोलना था। उसने कहा, ‘‘मैं चिल्ला रहा था कि दरवाजा खोलो, दरवाजा खोलो, लेकिन कोई आगे नहीं बढ़ रहा था क्योंकि सभी डरे हुए थे। ’’ उसने कहा, ‘‘एक ही विकल्प था, कि हम सभी वहीं रहते और हम सभी मर जाते या फिर मैं जोखिम लूं। मैं दरवाजा खोलने के लिए लपका ओर हम सभी को वहाँ से निकाल पाए। ’’ लोगों को बाहर निकलने का रास्ता बताकर युसूफ को अनुमान है कि उसने करीब 70 लेागों को नाइटक्लब से बाहर सुरक्षित निकाला।

उसने कहा, ‘‘काश, मैं और लोगों को बचा पाता।’’ सेवा अधिकारियों के अनुसार युसुफ जून, 2010 से मई, 2016 तक मरीन कोर में इंजीनियर था। उसे 2011 में अफगानिस्तान में तैनात किया गया था।

युसुफ का परिवार चार पीढ़ी पहले भारत से गयाना आया था। वह हिंदु और मुसलमान दोनों धर्मों से ताल्लुक रखता है। उसके दादा मुसलमान थे और दादी एवं मां हिंदू थीं। (पीटीआई) 

Add to
Shares
0
Comments
Share This
Add to
Shares
0
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags