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टाइपराइटर युग का अंत: आज महाराष्ट्र में होगा आखिरी टाइपिंग एग्जाम

Manshes Kumar
11th Aug 2017
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सरकारी विभागों में जूनियर डिविजिन क्लर्क पद के लिए अभी भी शॉर्ट हैंड व टाइपराइटर पर टाइपिंग टेस्ट की परीक्षा ली जा रही थी। आज से वह परीक्षा भी नहीं ली जाएगी।

<b><i>फोटो साभार: wikimedia</i></b>

फोटो साभार: wikimedia


देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई की कोर्ट-कचहरी और सरकारी दफ्तरों से जल्द ही टाइपराइटर को अलविदा कह दिया जाएगा।

यह भी सच है कि कम्प्यूटर पर ही टाइपिंग हो सकती है, लेकिन सरकारी नौकरियों में आज भी इस पुरानी तकनीक के भरोसे काम चलाया जा रहा था। 

टाइपराइटर का भी एक जमाना हुआ करता था जब हर सरकारी दफ्तर और लेखकों के कमरे में इस मशीन की खट-पट सुनाई पड़ती थी। लेकिन कंप्यूटर युग आने के बाद से इनका चलन धीरे-धीरे खत्म होता गया। हालांकि सरकारी विभागों में जूनियर डिविजिन क्लर्क पद के लिए अभी भी शॉर्ट हैंड व टाइपराइटर पर टाइपिंग टेस्ट की परीक्षा ली जा रही थी। आज से वह परीक्षा भी नहीं ली जाएगी। देश की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई की कोर्ट-कचहरी और सरकारी दफ्तरों से जल्द ही टाइपराइटर को अलविदा कह दिया जाएगा।

आज स्टनोग्राफी की आखिरी परीक्षा आयोजित की जाएगी इसके बाद सरकारी नौकरी के लिए टाइपराइटर परीक्षा की जरूरत खत्म कर दी जाएगी। टाइपराइटर पर टाइपिंग एक जमाने में सरकारी विभागों में विभिन्ना नौकरियों के लिए अनिवार्य जरूरत थी। यह भी सच है कि कम्प्यूटर पर ही टाइपिंग हो सकती है, लेकिन सरकारी नौकरियों में आज भी इस पुरानी तकनीक के भरोसे काम चलाया जा रहा था। ऐसी परीक्षाओं के लिए टेस्ट में परीक्षार्थियों को ही टाइपराइटर की व्यवस्था करनी पड़ती थी। अभ्यर्थी मशीनों को अपने कंधे पर लादकर परीक्षा केंद्र तक ले जाते थे।

महाराष्ट्र में स्टनोग्राफी और टाइपराइटिंग सिखाने वाले लगभग 3,500 रजिस्टर्ड इंस्टीट्यूट हैं। अर्थव्यवस्था को डिजिटाइज करने के क्रम में इन टाइपराइटर मशीनों को चलन से बाहर किया जा रहा है। कम्प्यूटर के युग में टाइपराइटर से परीक्षा देना अजीब तो लगता है। लेकिन सरकारी व्यवस्था के चलते यह सब करना पड़ रहा है। एक टाइपराइटिंग और शॉर्टहैंड सिखाने वाले इंस्टीट्यूट के संचालनकर्ता अशोक अभ्यंकर ने कहा, 'यह टाइपराइटिंग युग का अंत है, नई तकनीक और कंप्यूटर के जमाने में टाइपराइटिंग मशीनों का कोई मतलब नहीं रह गया है।'

पश्चिमी देशों में इतिहास की किताबों का हिस्सा बन गए टाइपराइटर आज भी भारत की कोर्ट-कचहरियों, पुलिस स्टेशन और सरकारी कार्यालयों का हिस्सा बने हुए हैं। कोर्ट के बाहर आज भी ऐफिडेवविट से लेकर कानूनी दस्तावेजों को तैयार करने के लिए टाइपराइटर अपनी मेज सजाए बैठे रहते हैं। अभ्यंकर ने कहा कि कंप्यूटर की कीमत इतनी कम हो गई है कि टाइपराइटर का कोई भविष्य बचा ही नहीं है। इसी तरह 2013 में भारत में टेलीग्राम सर्विस को 163 साल बाद बंद कर दिया गया था। टेलीग्राम सर्विस को चलाने वाला भारत इकलौता देश था।

पढ़ेंं: नहीं आता हर किसी को किताबों से प्यार करना

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