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ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी: हर घंटे दस हजार, सालाना कमाई एक करोड़

क्या मुमकिन है हर घंटे दस हजार और एक करोड़ रुपए तक का सालाना पैकेज...

25th Mar 2018
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दुनिया भर में डाटा बैंक की बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त और चोरी ने एक नए तरह के जॉब का जन्म दिया है - ब्‍लॉकचेन टेक्‍नोलॉजी। विश्व में सबसे ज्यादा मांग वाली नौकरियों में इस वक्त इस स्किल वालों की डिमांड दूसरे नंबर पर है। इसके विशेषज्ञों के लिए हर घंटे दस हजार, कुल लगभग एक करोड़ रुपए तक का सालाना पैकेज सुर्खियों में हैं।

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी: फाईल फोटो

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी: फाईल फोटो


हमारे देश में हाल के दिनो में बैंकिंग सेक्‍टर में कई बड़े घोटाले हुए हैं, जिनकी जांच में सीबीआई तक को इन्वॉल्व होना पड़ा है। इसे रोकने का एक अदद उपाय अब ब्‍लॉकचेन टेक्‍नोलॉजी में नजर आ रहा है। जबकि आज पूरा कम्प्यूटर जगत डाटा के चक्रव्यूह में आ चुका है, सांस्थानिक सुरक्षा की दृष्टि से ब्‍लॉकचेन टेक्‍नोलॉजी ही इस खतरनाक संकट से बचा सकती है।

स्टार्टअप और नौकरियों में एक ओर बड़ी संभावनाएं सामने आ रही हैं तो दूसरी तरफ स्टार्टअप सर्टिफिकेट के नाम पर फ्रॉड भी हो रहे हैं, जिससे सावधान रहने के लिए सरकार आगाह कर रही है। अलग-अलग सेक्टर से सम्बंधित स्टार्टअप के लिए अलग अलग आइडिया बेस बैंक लोन लेने में भी सावधानियां बरतने की जरूरत है। गर्मियां आ गई हैं तो बाजार की नब्ज पहचानते हुए इस मौसम के हिसाब से कई तरह के स्टार्ट अप आजमाए जा सकते हैं, मसलन, आइसक्रीम कंपनियों की फ्रेंचाइजी। इसी में हर दिन दस हजार रुपए तक कमा लेने के विकल्प भी सामने खड़े हैं। सोशल मीडिया अथवा बैंकिंग सेक्टर में आए दिन हो रहे फ्रॉड ने ही एक नई संभावना 'ब्लॉकचेन करियर' को जन्म दिया है। आजकल बड़े पैमाने पर ऑनलाइन डाटा मार्केट खड़ी हो हो गई है, जिसमें डाटा बेचने वाले अरबों का मुनाफा कमा रहे हैं। इसी तरह की खरीद-फरोख्त ने राजनीतिक तूफान खड़ा हो जाने पर पिछले दिनो अमेरिका के फेसबुक और कैम्ब्रिज एनालिटिका प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया। 

जानकार बता रहे हैं कि फेसबुक डाटा लीक के पीछे लगभग तेरह लाख करोड़ का बाजार रहा है। इस समय विश्व में लगभग चार हजार डाटा ब्रोकरिंग कंपनि‍यां सक्रिय हैं। जो कलेक्‍ट कंज्‍यूमर डाटा को एनालाइज करती रहती हैं। एक रिसर्च के मुताबिक दुनिया में डाटा ब्रोकरिंग दो सौ अरब डॉलर की इंडस्‍ट्री बन चुकी है। इस डाटा मार्केट से दुनिया भर में तमाम तरह की कंपनियां, रिसर्च फर्म, बड़ी पीआर एजेंसियां डाटा की खरीद-फरोख्त कर रही हैं। फेसबुक, गूगल, अमेजन आदि इस कतार में हैं। डाटा मार्केट में आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस सबसे अहम भूमिका में है। एक रि‍पोर्ट के अनुसार आजकल लगभग डेढ़ हजार बड़े ब्रांड स्‍टोर लॉयटी कार्ड से लोगों के डाटा ब्रोकरिंग का धंधा कर रहे हैं। उनके पास दुनियां के करोड़ो-करोड़ उद्यमियों, उद्योगपतियों, बड़े नौकरशाहों के हाई नेट वर्थ, सैलरी, क्रेडि‍ट कार्ड, घर के पते, फोन नंबर, ईमेल आईडी, ऑनलाइन खरीद के ब्योरे, उम्र, वैवाहि‍क स्‍थि‍ति आदि के डाटा स्टोर कर बेचे जा रहे हैं। ये डाटा रोजाना बड़ी संख्या में दस हजार रुपए से लेकर एक लाख तक में जरूरतमंदों को सेल हो रहे हैं।

इस नए तरह के बाजार के मैराथन में बड़ी डाटा कंपनि‍यां छोटी कंपनि‍यों को खरीद रही हैं। इस खरीद-फरोख्त का तो एक ऐसा भी मामला सामने आ चुका है, जिसमें साढ़े चार करोड़ कस्टमर्स के डाटा की कीमत एक अरब डॉलर लगाई गई। जब डाटा की खरीद-फरोख्त का दुनिया में इस तरह का व्यापक बाजार खड़ा हो गया तो बिक्री के अलावा डाटा चोरी के धंधे ने भी सिर उठा लिया। इससे सरकारी, गैरसरकारी संस्थानों, राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों के सामने एक बड़े खतरे की आहट हुई। आज वह खतरा रह-रहकर पूरे विश्व में सनसनी फैला दे रहा है। छोटे स्तर पर भी डाटा चोरी के खतरे ने हलचल पैदा कर रखी है। कानूनी इंतजाम इसके लिए नाकाफी और फेल हो चुके हैं। इसी हालात से निपटने के लिए अब ब्‍लॉकचेन टेक्‍नोलॉजी आ गई है, जिसका तमाम सेक्टर सहारा लेने लगे हैं। ये टेक्‍नोलॉजी बैंकिंग सिस्‍टम के लिए गेम चेंजर मानी जा रही है। विश्व के दो तिहाई बैंक इसकी निर्भरता के प्रति गंभीर हो चले हैं।

हमारे देश में हाल के दिनो में बैंकिंग सेक्‍टर में कई बड़े घोटाले हुए हैं, जिनकी जांच में सीबीआई तक को इन्वॉल्व होना पड़ा है। इसे रोकने का एक अदद उपाय अब ब्‍लॉकचेन टेक्‍नोलॉजी में नजर आ रहा है। जबकि आज पूरा कम्प्यूटर जगत डाटा के चक्रव्यूह में आ चुका है, सांस्थानिक सुरक्षा की दृष्टि से ब्‍लॉकचेन टेक्‍नोलॉजी किसी खतरनाक संकट से बचा सकती है। इस संकट से एक और तरह की नई उम्मीद की किरण भी फूटी है। ब्‍लॉकचेन टेक्‍नोलॉजी ने नई तरह की नौकरियों के लिए एक नया दरवाजा खोल दिया है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकिंग-पेमेंट्स, साइबर सिक्‍युरिटी, सप्‍लाई चेन मैनेजमेंट, फॉरकास्टिंग, नेटवर्किंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्‍स, इंश्‍योरेंस, प्राइवेट ट्रांसपोर्ट, राइड शेयरिंग, क्‍लाउड स्‍टोरेज, चेरिटी, वोटिंग, गवर्नमेंट डिपार्टमेंट, हेल्‍थकेयर, एनर्जी मैनेजमेंट, ऑनलाइन म्‍यूजिक, रिटेल, रियल एस्‍टेट, क्राउडफंडिंग आदि क्षेत्रों में अब इसके लिए अलग से नौकरियां पैदा हो चुकी हैं।

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"ऐसा कहा जा रहा है, कि आगामी दस-बारह साल बाद सभी परंपरागत बैंकिंग सेक्टर की नौकरियां अब ब्‍लॉकचेन टेक्‍नोलॉजी के माध्यम से ही मिलना संभव होगा। दुनिया में जिन बीस तरह की विशेष योग्यता वाले कर्मियों की सबसे ज्यादा मांग है, उनमें अभी से ब्‍लॉकचेन टेक्‍नोलॉजी स्किल्‍स वालों की मांग सेकंड नंबर पर है। पिछले एक साल में ही इसकी डिमांड दो गुनी हो चुकी है। इसमें कमाई का आलम ये है कि ब्‍लॉकचेन डेवलेपर्स की प्रति घंटे दस हजार रुपए तक हो चुकी है। इस वक्त से अमेरिका में ब्लॉकचेन डेवलपर सालाना डेढ़ लाख डॉलर से ज्यादा ले रहे हैं।"

ऐसे में कौतुहल होना स्वाभाविक है कि क्या है ब्‍लॉकचेन टेक्‍नोलॉजी? दरअसल, ब्लॉकचेन एक विकेंद्रीकृत टेक्‍नोलॉजी है, जिसमें आंकड़ों के रिकॉर्ड या ब्लॉक की एक श्रृंखला होती है और प्रत्येक ब्लॉक में उस समय हुए ट्रांजैक्‍शंस का लेखा-जोखा होता है, जो पूरी तरह से सार्वजनिक होती है। ब्लॉकचेन का यूज करने वाला कोई भी व्यक्ति इसे देख सकता है। इस तकनीक में माइनर की बड़ी भूमिका होती है और प्रत्येक ट्रांजैक्‍शन को माइिनंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस प्रोसेस में लेनदेन की कानूनी वैधता की जांच होती है। ट्रांजैक्‍शन की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे पूरी तरह से सार्वजनिक करने की बजाए इसकी पहुंच एक निर्धारित समूह तक सीमित रखी जा सकती है। इस टेक्नोलॉजी की उपयोगिता का अनुमान आज के स्टार्टअप में हो रहे फ्रॉड से बचाव के रूप में भी लगाया जा सकता है। इस समय स्टार्टअप इंडिया कैंपेन के नाम पर एक तरह के बड़े फ्रॉड सामने आने लगे हैं। कई ऐसी एंजेसी स्टार्टअप सर्टिफिकेट देने का फर्जीवाड़ा कर रही हैं।

डिपॉर्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन ने अलर्ट जारी किया है कि यह गैरकानूनी है। ऐसी एजेंसियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्टार्टप इंडिया स्कीम के तहत सिर्फ ऐसी कंपनियां को स्टार्ट अप इंडिया का दर्जा है, जो इन्नोवेशन, नए प्रोडक्ट डेवलपमेंट और सर्विस के लिए काम कर रही हैं। इसके तहत कंपनी का गठन सात साल से ज्यादा पुराना नहीं होना चाहिए। बॉयो टेक्नोलॉजी सेक्टर की कंपनियों के लिए यह लिमिट 10 साल है। ऐसी कंपनियों को स्टार्टअप का दर्जा मिल सकता है, बशर्ते की उनका टर्नओवर 25 करोड़ रुपए सालाना से ज्यादा न हो। कानूनी सीमाओं का उल्लंघन का स्टार्टअप के साथ फ्रॉड करने वालों पर भी लगाम लगाने के लिए निकट भविष्य में ब्‍लॉकचेन टेक्‍नोलॉजी का सहारा लिया जाए तो आश्चर्य न होगा।

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