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इस शख़्स ने नारियल पानी बेचने के लिए छोड़ी ऐसेंचर की नौकरी, 1.5 साल में खड़ी की करोड़ों की कंपनी

ऐसेंचर की नौकरी छोड़ डेढ़ साल में खड़ी की करोंड़ों की कंपनी...

16th Apr 2018
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तेज़ धूप के प्रकोप से बचाने में नारियल का पानी बेहद मददगार होता है। आज हम आपको बेंगलुरु आधारित स्टार्टअप 'टेनको' के बारे में बताने जा रहे हैं। टेनको ऑनलाइन और ऑफ़लाइन, दोनों ही माध्यमों से पैकेज़्ड नारियल का पानी (टेंडर कोकोनट वॉटर) उपलब्ध कराता है, जिसे लोग काफी पसंद भी कर रहे हैं।

टेनको की टीम

टेनको की टीम


टेनको के फ़ाउंडर, मणिगन्दन का बेटा एक प्रोफ़ेशनल ऐथलीट है और गर्मी के सीज़न में उसे भी नारियल पानी की ज़रूरत पड़ती है। मणिगन्दन को इस बात का एहसास हुआ कि जब भी उनके बेटे को नारियल पानी पीना होता है तो उसे सड़क पर लगीं दुकानों के पास गाड़ी रोककर नारियल पानी ख़रीदना पड़ता है। इस सोच ने ही जन्म दिया टेनको को, टेनको यानी टेंडर कोकोनट वॉटर। 

स्टार्टअप: टेनको फ़ूड्स

शुरूआत: 2016

फ़ाउंडर्स: मणिगन्दन केएल, अर्पिता बहुगुणा, संतोष पाटिल

आधारित: बेंगलुरु

सेक्टर: पैकेज़्ड फ़ूड

फ़ंडिंग: बूटस्ट्रैप्ड

गर्मी के दिनों में सबसे प्रचलित पेय पदार्थों में से एक होता है, नारियल का पानी। तेज़ धूप के प्रकोप से बचाने में नारियल का पानी बेहद मददगार होता है। आज हम आपको बेंगलुरु आधारित स्टार्टअप 'टेनको' के बारे में बताने जा रहे हैं और जो लोगों को ऑनलाइन और ऑफ़लाइन, दोनों ही माध्यमों से पैकेज़्ड नारियल का पानी (टेंडर कोकोनट वॉटर) उपलब्ध करा रहा है और लोग इसे काफ़ी पसंद भी कर रहे हैं। मणिगन्दन केएल ने अपनी साथी अर्पिता बहुगुणा और संतोष पाटिल के साथ मिलकर 2016 में टेनको की शुरूआत की थी।

टेनको के फ़ाउंडर, मणिगन्दन का बेटा एक प्रोफ़ेशनल ऐथलीट है और गर्मी के सीज़न में उसे भी नारियल पानी की ज़रूरत पड़ती है। मणिगन्दन को इस बात का एहसास हुआ कि जब भी उनके बेटे को नारियल पानी पीना होता है तो उसे सड़क पर लगीं दुकानों के पास गाड़ी रोककर नारियल पानी ख़रीदना पड़ता है। यहीं से मणिगन्दन के दिमाग़ में ख़्याल आया कि पौष्टिक नारियल पानी की अपेक्षा अन्य पैकेज़्ड बेवरेज अधिक लोकप्रिय इसलिए हैं क्योंकि उन्हें ख़रीदना और पीना बेहद सहज है। इस सोच ने ही 'टेनको' को जन्म दिया। टेनको यानी टेंडर कोकोनट वॉटर। मणिगन्दन ने जल्द ही ऐसेंचर में अपनी नौकरी छोड़ दी और अपनी ख़ुद की कंपनी शुरू कर दी।

मणिगन्दन ने अपनी टीम के साथ मिलकर ऐसी मशीनें विकसित कीं, जिनकी मदद से कोई भी एक साधारण से चाकू या चम्मच की मदद से भी नारियल को काट सके। मणिगन्दन और उनकी टीम ने तीन महीनों से भी कम वक़्त में अपनी पहली मशीन विकसित कर ली थी। मणिगन्दन बताते हैं कि उनके पास अपने टेंडर कोकोनट ओपनर भी हैं, जिनका इस्तेमाल बच्चे भी बड़ी आसानी से कर सकते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि कंपनी अभी रोज़ाना लगभग 4,000 नारियल बेच लेती है। पुराने दिन याद करते हुए मणिगन्दन कहते हैं कि लगभग डेढ़ साल पहले, कंपनी ने एक दिन में सिर्फ़ 50 नारियलों की बिक्री से शुरूआत की थी।

मणिगन्दन ने बताया कि पहली मशीन विकसित होने के बाद, उन्होंने सबसे पहले अपने दोस्तों से मशीन का फ़ीडबैक मांग। मणिगन्दन कहते हैं कि आइडिया स्पष्ट था कि नारियल और नारियल के पानी के अनऑर्गनाइज़्ड सेक्टर को संगठित करना। टेनको का आइडिया आने के बाद मणिगन्दन ने सबसे पहले अपनी साथी अर्पिता बहुगुणा को अपने साथ काम करने के लिए तैयार किया। टेनको की को-फ़ाउंडर अर्पिता, मणिगन्दन के साथ 20 सालों से काम कर रही थीं।

अर्पिता, सॉफ़्टवेयर मेकिंग में 13 साल का अनुभव रखती हैं और टेनको में भी वह तकनीकी विभाग की प्रमुख हैं। टेनको टीम के दूसरे मुख्य सदस्य और कंपनी के को-फ़ाउंडर्स में से एक हैं, संतोष पाटिल, जो टेनको टीम के साथ जुड़ने से पहले ही 'वेजवाला' नाम से एक स्टार्टअप चला रहे थे और उनके पास डिलिवरी और शिपिंग का पर्याप्त अनुभव था। इसके अलावा टीम के प्रमुख सदस्यों में से एक अक्षय के पास मार्केटिंग और ऐडवर्टाइज़िंग में 15 सालों का लंबा अनुभव है। अक्षय, कई बड़े ब्रैंड्स के साथ काम कर चुके हैं। टीम के सबसे युवा सदस्य गौतम के पास सेल्स सेक्टर का 4 सालों का अनुभव है।

मणिगन्दन ने बताया कि मशीनों और ओपनर के पीछे सबसे बड़ा योगदान है, टीम मेंबर विष्णु का। विष्णु ने बीआईटीएस से ग्रैजुएशन किया और इसके बाद यूएस से मास्टर डिग्री ली। विष्णु, मशीनें बनाने के अपने पैशन के साथ ही भारत लौटे थे। मणिगन्दन बताते हैं कि इतनी अच्छी टीम तैयार होने के बाद रॉ-मटीरियल जुटाना कोई मुश्किल काम नहीं था। वह कहते हैं कि टीम का हर सदस्य, अपने-अपने काम में माहिर था। नारियल की सप्लाई के लिए टीम ने स्थानीय वेंडर्स से बात की और सुनिश्चित किया कि उन्हें नारियल की सप्लाई लगातार मिलती रहे।

रेवेन्यू के बारे में जानकारी देते हुए मणिगन्दन ने बताया कि फ़िलहाल कंपनी का मासिक रेवेन्यू लगभग 30 लाख रुपए है और उन्हें उम्मीद है कि इस गर्मी के मौसम में यह दोगुना हो जाएगा। टेनको फ़िलहाल, हायपरसिटी, मोर, बिग बाज़ार, मेट्रो, नीलगिरीज़, नामधारीज़, नेचर्स बास्केट जैसे ऑफ़लाइन स्टोर्स के साथ-साथ ऐमज़ॉन, बिग बास्केट, ग्रोफ़र्स, जॉननाओ और दूधवाला जैसे ऑनलाइन स्टोर्स पर भी उपलब्ध है।

टेकसाई (TechSci) रिपोर्ट के मुताबिक़, 2016 तक भारत में पैकेज़्ड कोकोनट वॉटर का मार्केट 15.38 मिलियन डॉलर का था। अनुमान है कि 2017-2022 के बीच इसकी कम्पाउंड ऐनुअल ग्रोथ की दर 17 प्रतिशत की रहेगी और 2022 तक यह बाज़ार, 40.73 मिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। टेनको टीम का दावा है कि बी टू बी टू सी मॉडल यानी जब किसी ऑफ़लाइन या ऑनलाइन स्टोर के ज़रिए सेल होती है, तो उनको 20 प्रतिशत का मुनाफ़ा होता है, वहीं जब कंपनी ग्राहकों तक सीधे माल पहुंचाती है तो उन्हें 30 प्रतिशत का मुनाफ़ा मिलता है। टीम का लक्ष्य है कि जल्द ही, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, मुंबई और दिल्ली में भी टेनको की सर्विस शुरू की जा सके। कंपनी की योजना है कि नारियल के अन्य उत्पाद जैसे कि कोकोनट मिल्क, कोकोनट फ़्लेक्स, कोकोनट सुगर, वर्जिन कोकोनट ऑयल और ऐसे ही अन्य उत्पाद भी लॉन्च किए जाएं।

भविष्य के बारे में बात करते हुए मणिगन्दन कहते हैं कि कंपनी वेस्ट मैनेजमेंट के सेक्टर में भी काम रही है। उन्होंने बताया कि कोकोनट वेस्ट का इस्तेमाल कोको पिथ (मिट्टी के लिए उपयोगी), ऐक्टिवेटेड कार्बन, चारकोल बनाने में किया जा सकता है। साथ ही, किसानों के लिए उम्दा क्वॉलिटी के कम्पोस्ट भी बनाने की तैयारी है। मणिगन्दन ने बताया कि टेंडर कोकोनट का मार्केट सालाना 12 हज़ार करोड़ रुपयों का है और कंपनी चाहती है कि कम से कम 120 करोड़ रुपए का मार्केट बनाने के बाद टेनको के ज़रिए कोकोनट या नारियल के अन्य उत्पाद लॉन्च किए जाएं।

यह भी पढ़ें: सीधे खेतों से फल और सब्ज़ियां उपलब्ध करवा रहा जयपुर के दो युवाओं का यह स्टार्टअप

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