संस्करणों

'फौजनेट', रिटायर्ड फौजियों के लिए नौकरी का अंबार

- कैप्टन वैंकट रमन राव ने रखी नीव फौजनेट की।- अपनी तरह की पहली कंपनी है जोकि रिटायर आर्मी ऑफिसर्स को अच्छी नौकरियां दिलाने के लिए प्रयासरत है।- अब अपनी क्षमता के मुताबिक नौकरी पा रहे हैं फौजी।

19th Jun 2015
Add to
Shares
3
Comments
Share This
Add to
Shares
3
Comments
Share

जब भी देश और देश की सुरक्षा की बात आती है तो हमें सबसे पहले फौजी याद आते हैं। क्योंकि यह हमारे देश की फौज ही है जिसके सहारा हम खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। हमारी फौज ने अब तक जितने भी युद्ध हुए वहां तो बहुत शानदार प्रदर्शन कर अपनी क्षमता से दुनिया को हैरान किया ही है साथ ही बाकी दिनों में भी देश की सीमा पर चौकस रहकर दिनरात देश की सुरक्षा में लगी है। आज जितने भी करियर विकल्प हैं उसमें फौज की नौकरी ही ऐसी नौकरी है जो कई तरह की चुनौतियों से भरी है। देश की सीमा पर तैनात फौजियों की जिंदगी का कुछ पता नहीं होता यानी वे इतना जोखिम उठाकर अपनी नौकरी करते हैं। वे चौकन्ने रहते हैं तभी हम चैन की नींद सो पाते हैं।

यह बात बहुत परेशान करने वाली है कि जब यह फौजी रिटायर हो जाते हैं और फिर से नौकरी की तलाश में किसी से मिलते हैं तो आमतौर पर इनके आगे बस दो तरह के विकल्प होते हैं। फौजी समझकर हर कोई इन्हें सिक्योरिटी सिर्विसेज में जॉब देना चाहता है या फिर अपने एचआर डिपार्टमेंट में ही इनकी नियुक्ति के बारे में सोचता है।

कैप्टन वैंकट और कर्नल प्रसाद कोफांउडर फौजनेट

कैप्टन वैंकट और कर्नल प्रसाद कोफांउडर फौजनेट


जबकि सच यह है कि एक फौजी का व्यक्तित्व बहुत ही प्रभावशाली होता है। यह लोग बहुत ज्यादा प्रोफेशनल होते हैं। बहुत ज्यादा अनुशासनप्रिय होते हैं। नियमों के पक्के होते हैं। समय पर अपने लक्ष्य को पूरा करने की क्षमता रखते हैं और यह उनकी आदत में शुमार होता है। निडर होते हैं। साथ ही क्योंकि फौज में नौकरी कर चुके होते हैं और यह इनकी जीवन की दूसरी पारी होती है इसलिए परिपक्व भी होते हैं। बावजूद इसके बाजार में इनके लिए बस दो ही प्रोफाइल ऑप्शन खुले हैं। यह फौजियों की काबलियत के साथ न्याय नहीं है। फौजियों की इसी समस्या को समझते हुए कैप्टन वैंकट रमन राव ने इस दिशा में काम करने का मन बनाया। कैप्टन राव जोकि कुछ समय के लिए आईआईएम लखनऊ में आए थे उन्होंने तय किया कि वे इस दिशा में कुछ ठोस कदम उठाएंगे। कुछ न कुछ ऐसा जरूर करेंगे जिससे फौजियों के लिए कॉरपोरेट सेक्टर में नौकरियों की संभावनाएं तलाशी जा सकें। फिर उन्होंने इस दिशा में रिसर्च करना शुरू किया और इस प्रश्न का भी उत्तर खोजने की कोशिश की कि आखिर इतने कुशल होने के बावजूद फौजियों को अन्य सेक्टरों में नौकरियां क्यों नहीं मिल रहीं हैं। थोड़ी ही रिसर्च के बाद उन्हें दोनों ओर से कमियां दिखाई देने लगीं। उन्होंने पाया कि आर्मी ऑफिसर भी सारी खूबियां होने के बावजूद इन कंपनियों समझा नहीं पाते कि वह अपने तजुर्बे और हुनर से किस प्रकार कंपनी को फायदा पहुंचा सकते हैं। साथ ही कंपनियां भी फौजियों के अंदर के टेलेन्ट को बिल्कुल नहीं समझ पाती। जबकि कंपनियां चाहें तो इन ऑफिसर्स से उनकी कंपनी की ग्रोथ को काफी फायदा हो सकता है।

उसके बाद कैप्टन राव ने मिलेट्री ऑफिसर्स की मदद के लिए 'फौजनेटÓ की शुरुआत की। इस दौरान कैप्टन राव के कुछ दोस्त अपने लिए नौकरी की तलाश भी कर रहे थे लेकिन उन्हें कोई अच्छी नौकरी नहीं मिल पा रही थी। फिर कैप्टन राव ने अपने कोर्समेट फ्लाइट लेफ्टिनेंट श्रीनाथ के साथ मिलकर उन लोगों की मदद करनी शुरु की और उन्हें समझाया कि किस प्रकार और कौन-कौन सी नौकरियों के लिए उन्हें आवेदन करना चाहिए। ऐसे कौन से प्रोफाइल हैं जो उनके लिए अच्छे साबित हो सकते हैं। इसका परिणाम यह रहा कि एक अनुपात पांच में ऑफिसर्स को नौकरियां मिलीं जोकि डिफेंस एमबीए बैचिस आईआईएम लखनऊ के इतिहास में सबसे ज्यादा था। शुरुआत में इन्हें बहुत कठिनाईयों का सामना करना पड़ा क्योंकि इनके पास न तो फंड था न ही बाकी संसाधन लेकिन कम संसाधनों में भी ये काम करते रहे।

चूंकि यह बहुत टॉप पोजीशन थी इसलिए कॉरपोरेट्स को भी कंविन्स करना इतना आसान नहीं था। साथ ही आर्मी के लोगों को इस तरह की जॉब के लिए समझाना और फौज के बाद एक कॉरपोरेट सेक्टर की नौकरी करवाना मुश्किल था साथ ही पैसा की तंगी तो थी ही।

अभी तक फौजनेट को लोगों द्वारा ही प्रचार मिल रहा है। जिन मिलेट्री ऑफिसर्स को नौकरी मिल जाती है वे फौजनेट के ब्रांड एम्बेसेडर बन जाते हैं। इसके अलावा जिन कॉरपोरेट को मिलेट्री ऑफिसर्स की नियुक्ति के बाद फायदा होता है वे लोग स्वयं ही फौजनेट की प्रचार कर देते हैं। और अपने सर्किल से जुड़े लोगों को बता देते हैं।

फौजनेट अपनी तरह की पहली ऐसी कंपनी है जो फौजियों को तैयार करके अच्छी नौकरियां दिलवाने का काम कर रही है। यह आर्मी के लोगों के रिटायरमेंट के बाद के भविष्य को संवारने में लगी है।

जैसे-जैसे फौजनेट का प्रचार बढ़ रहा है वैसे-वैसे कंपनियों का रुझान भी फौजनेट की ओर बढ़ रहा है। यही वजह है कि अब कई कंपनियां फौजनेट से जुड़ चुकी हैं।

Add to
Shares
3
Comments
Share This
Add to
Shares
3
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags