संस्करणों

जूट और नारियल के रेशे से गांवों में बनेगी सड़कें...

केंद्र की ग्रामीण सड़कों के निर्माण में जियो-टेक्सटाइल्स के उपयोग को बढ़ावा देने की योजनाजियो टेक्सटाइल्स एक मजबूत सिंथेटिक कपड़ा हैइसका इस्तेमाल ढहने वाली मिट्टी को स्थिर करने तथा भूस्खलन रोकने के लिए होता है

27th Aug 2015
Add to
Shares
1
Comments
Share This
Add to
Shares
1
Comments
Share

पीटीआई


image


केंद्र दक्षिणी राज्यों में जूट और नारियल के रेशे जैसे जियो-टेक्सटाइल्स का उपयोग कर ग्रामीण सड़कों के निर्माण से खासा प्रभावित है और अन्य राज्यों से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत परियोजनाओं के संदर्भ में केरल, कर्नाटक तथा तमिलनाडु के अच्छे अनुभव को दोहराने को कहा है।

जियो टेक्सटाइल्स एक मजबूत सिंथेटिक कपड़ा है जिसका उपयोग ढहने वाली मिट्टी को स्थिर करने तथा भूस्खलन रोकने के लिये आमतौर पर राजमार्ग या बांध निर्माण जैसे सिविल इंजीनियरिंग निर्माण परियोजनाओं में किया जाता है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय में सचिव जे के महापात्र तथा कपड़ा सचिव संजय कुमार पांडा ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को लिखे संयुक्त पत्र में जोर देकर कहा है कि जियो-टेक्सटाइल का ग्रामीण सड़कों में उपयोग एक पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकी है जिससे टिकाउपन बढ़ता है और रखरखाव की लागत कम होती है।

केंद्र का अपनी महत्वकांक्षी ग्रामीण सड़क निर्माण कार्यक्रम में जियो-टेक्सटाइल्स के उपयोग को लोकप्रिय बनाने के प्रयास से घरेलू बाजार में कयर एवं जूट क्षेत्र को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पिछले सप्ताह लिखे गये पत्र में कहा गया है, ‘‘कर्नाटक, केरल तथा तमिलनाडु ने पीएमजीएसवाई के तहत पायलट आधार पर कुछ सड़कों के निर्माण में जिओ-टेक्सटाइल्स का उपयोग किया है। इन सड़कों का फिलहाल मूल्याकंन किया जा रहा है और शुरूआती रिपोर्ट काफी सकारात्मक और संतोषजनक है।’’ विदेशों में सड़कों को मजबूत करने के लिये जियो-टेक्सटाइल्स का उपयोग किया जाता है लेकिन भारत में अभी इसे लोकप्रिय होना बाकी है।

Add to
Shares
1
Comments
Share This
Add to
Shares
1
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags