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17 साल में उठाया कैंसर पीड़ित बच्चों की मदद का बीड़ा, दान किए साढ़े 6 लाख रुपये

साढ़े 6 लाख की राशि को शील ने कैंसर पीड़ित बच्चों की शिक्षा के लिए दान कर दिया

14th Aug 2015
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किसी काम को करने के लिए उम्र या तजुर्बे से ज्यादा जरूरत लगन की होती है, अगर ये लगन और काम करने की धुन किसी के अंदर है तो वह बड़े से बड़ा कार्य काफी सरलता से कर देता है औऱ दूसरों के लिए मिसाल बन जाता है। अपने बेहतरीन कार्य को करके ऐसी ही मिसाल बने हैं 17 साल के शील सुनेजी जिन्होंने इतनी कम उम्र में ही अपने प्रयासों और लगन के बूते वो कर दिखाया जिसके कारण कई लोगों को फायदा हुआ। उन्होंने एक फुटबॉल टूर्नामेंट आयोजित करके साढ़े 6 लाख रुपये जुटाए और उस पैसों को कैंसर से जूझ रहे लोगों के लिए दान कर दिया। उन्होंने इंडिया इंटरनेशनल स्कूल बेंगलूरू से अपनी स्कूलिंग की। जब वे 11वीं कक्षा में थे तो स्कूल ने छात्रो की प्रतिभा निखारने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए।

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एक ऐसे ही कार्यक्रम में वे अपने मित्र के साथ सरकारी स्कूल के बच्चों को पढ़ाने जाया करते थे। ये बच्चे काफी गरीब थे। शील को इस कार्य में काफी आनंद आता और वे पूरी मेहनत करके बच्चों को पढ़ाने लगे। उनके मन में ये ख्याल आने लगा कि क्यों न वो भविष्य में ऐसा ही कुछ कार्य करें जिससे वे बच्चों की मदद कर पाएं। शील ने उसके बाद रिसर्च किया और पाया कि समीक्षा फांउडेशन एक ऐसी संस्था है जो कैंसर से पीड़ित बच्चों की मदद में लगी हुई है। वे बच्चों को उपचार के दौरान शिक्षा दे रही थी। शील ने समीक्षा फाउंडेशन जाना शुरू कर दिया और बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने लगे।

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शील ने इसी दौरान सोचा कि क्यों न वे इस कार्य को थोड़ा और आगे ले जाएं ताकि इन बच्चों की और ज्यादा मदद हो सके। वो कार्य क्या हो शील इसी उधेडबुन में लगे रहते थे। उन्होंने लोगों से बात करनी शुरू कर दी। उन्हें तलाश थी एक नया आइडिया की, जिसपर वे काम कर सकें। एक दिन उनके दिमाग में एक विचार आया कि क्यों न वे एक फुटबाल टूर्नामेंट आयोजित करवा कर पैसा जुटाएं और उससे गरीब बच्चों की मदद की जाए । उन्होंने इस विचार पर काम करना शुरू किया और तय किया कि वे बेंगलूरू के प्ले एरीना में एक फुटबॉल टूर्नामेंट और एक फैमिली डे ईवेंट ऑर्गनाइज करेंगें और उससे जो भी धन एकत्र होगा उसे वे बच्चों की मदद में लगाएंगे। कहते हैं जब इरादे अच्छे हों तो अंजाम भी अच्छा होता है। ये टूर्नामेंट काफी हिट रहा और उससे उन्होंने साढ़े 6 लाख रुपये एकत्र कर लिए। शील ने स्कूल में बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान जो जो सीखा था उन्होंने उसे इंप्लीमेंट किया । शील ने इस कार्य में सोशल नेटवर्किंग साईट का भरपूर प्रयोग किया उन्होंने दर्जनों लिंक्ड इन रिक्वेस्ट भेजी और कारपोरेट में काम कर रहे लोगों से कान्टेक्ट किया । शील को उनके दोस्तों का भी भरपूर सहयोग मिला। उनके दोस्तों ने डोर टू डोर कैंपेनिंग की और चैरिटी के लिए डोनेशन इकट्ठा की। लोगों से चेक लिए गए व उसके बदले उन्हें 80 जी सरटिफ्केट दिया। टूरनामेंंट अच्छे से हो इसके लिए यूईएफए सर्टिफाइड रेफ्री को रखा गया। खेल के दौरान खिलाड़ियों की सेफ्टी के लिए सकरा वर्ल्ड हॉस्पीटल से टाई अप किया गया। जब सारी टीमों का चयन हो गया उसके बाद शील विभिन्न कॉरपोरेट कंपनियों के पास गए और उनसे पैसा डोनेट करने के लिए कहा। इस सब कार्य से उन्होंने लगभग साढे 6 लाख रुपये डोनेशन के रूप में प्राप्त हो किया। कई कंपनियों ने इन्हें स्पॉन्सर भी किया।


शील को इस टूर्नामेंट ने काफी कुछ सिखाया और अब जिंदगी में अपनी मेहनत से मुकाम हासिल करना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि वे खुद अपने प्रयासों से पैसा कमाएं व अपनी पढ़ाई करें और दूसरों को भी उससे लाभान्वित करें ताकि वे दूसरों के लिए भी मिसाल बन सकें। शील चाहते हैं वे समाज कल्याण के कार्य को हमेशा करते रहें। शील फिलहाल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए कनाडा में हैं। एक बात तो तय है कि शील को एक युवा उद्यमी के तौर पर हम जल्द ही देखेंगे। शील ने अपने प्रयासों से ये साबित कर दिया कि कोशिश औऱ मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती।

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