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कैसे अकेले एक शख्स ने 15 साल में खड़ी कर दी 'युवा' अफसरों की फौज़

4th Mar 2016
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छतीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एम राजीव सेंट्रल एक्साइज विभाग में काम करते हैं. मूलत: झारखंड के रहने वाले राजीव को यह देखकर अच्छा नहीं लगता था कि छतीसगढ़ के युवा पढ़ाई तो अच्छी करते हैं लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं में उनकी सफलता की दर काफी कम है. इसी विचार से प्रेरित होकर उन्होंने 15 साल पहले ‘युवा’ नामक संस्था बनाकर युवा प्रतिभागियों की निशुल्क कोचिंग शुरू की और इन 15 सालों में उनकी संस्था ने युवा अफसरों की पूरी फ़ौज तैयार कर दी है.


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सेंट्रल एक्साइज में कार्यरत एम राजीव की 22 साल पहले रायपुर में पोस्टिंग हुई. पोस्टिंग के कुछ सालों में जब परिचय का दायरा बढ़ा तो उन्हें समझ में आया कि इस राज्य में युवा लड़के लड़कियां पढ़ाई लिखाई में मेहनत करते हैं, लेकिन उनकी यह सारी मेहनत उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लायक नहीं बना पाती. राजीव सोच में पड़ जाते लेकिन रास्ता नहीं सूझता. फिर एक दिन उन्होंने तय कर लिया कि इन युवाओं के लिए कुछ न कुछ तो करना पड़ेगा. उनकी इसी सोच के चलते 15 साल पहले ‘युवा’ नामक संस्था की नीव पड़ी. इस संस्था ने प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उम्मीदवारों को मुफ्त कोचिंग देना शुरू कर दिया. इस कोचिंग की खास बात ये है कि सब कुछ 15 साल पहले भी मुफ्त था, अब भी बिलकुल मुफ्त है.


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15 साल पहले स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी 2001 को उन्होंने ‘युवा’ की स्थापना की. ‘युवा’ यानी यूथ यूनिटी फॉर वॉलेंट्री एक्शन. राजीव ने योरस्टोरी को बताया, 

"पहले अपने घर में मुफ्त कोचिंग की शुरूआत की चार उम्मीदवारों के साथ. धीरे धीरे नाम बढ़ा और यहाँ से निकले लोग सफल भी होने लगे. छात्रों की संख्या जब बढ़कर 50 हो गई तो संस्था के लिए किराए पर एक मकान लेना पड़ा."


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राजीव की इस पहल की चर्चा जब और बढ़ी तो रायपुर के बंगाली समाज ने उनसे संपर्क किया और कालीबाड़ी मंदिर परिसर में बने स्कूल का एक कमरा उन्हें कोचिंग के लिए निशुल्क दे दिया. तब से यहीं राजीव रोजाना शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक नि:शुल्क कोचिंग दे रहे हैं. दिलचस्प बात ये है कि इस कोचिंग की कोई छुट्टी नहीं है, सप्ताह के सातों दिन यहाँ क्लासेज़ चलती हैं. फीस का खर्च कुछ भी नहीं.


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युवा के संस्थापक राजीव बताते हैं, 

"15 साल में हमारे पढ़ाए कई युवा डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी से लेकर तहसीलदार और फूड इंस्पेक्टर तक बने चुके हैं. बैंक,रेलवे, केंद्र सरकार के कई विभागों में यहाँ से निकले छात्र छात्राएं कार्यरत हैं. कुछ हमारे साथ ही कोचिंग में प्रतियोगियों को पढ़ाने लगे हैं , जिसके लिए वे कोई वेतन नहीं लेते. मुझे तब दुख होता है जब कोई सिर्फ आर्थिक रूप से कमज़ोर होने के कारण पढाई से वंचित रह जाता है।”

राजीव की कोचिंग में रायपुर के बाद अब अन्य स्थानों से भी युवक युवतियां आने लगे हैं. अब प्रतियोगियों की बढती दिलचस्पी को देखकर ‘युवा’ को रायपुर के बस स्टैंड के सामने स्थित एक व्यावसायिक परिसर में भी एक कमरा मिल गया है. अभी इस कोचिंग में 60 से ज्यादा प्रतियोगी हैं. इस कोचिंग में कोई टाइम लिमिट नहीं है, जब तक प्रतियोगी चाहें, पढ़ सकते हैं.


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इसके अलावा भी ‘युवा’ ने कई अन्य कार्यों की पहल की है जिसमें वृक्षारोपण के अलावा यातायात पुलिस के कड़ी ड्यूटी निभाने वाले सिपाहियों को फल, बिस्किट और पानी देने के साथ साथ उन्हें डायरी और पेन का वितरण भी शामिल है.


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युवा के कार्यों के लिए उन्हें कई संस्थाओं के साथ छतीसगढ़ के राज्यपाल ने भी सम्मानित किया है.

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