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भारतीय टीम में शामिल किए गए इस क्रिकेटर ने कहा, मेरा काम देखो स्किन का रंग नहीं

13th Aug 2017
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अभी हाल ही में भारतीय क्रिकेट टेस्ट टीम में शामिल हुए तमिलनाडु के सलमी बल्लेबाज पर भी सांवलेपन को लेकर टिप्पणियां की गईं। 

सलामी बल्लेबाज अभिनव मुकुंद (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

सलामी बल्लेबाज अभिनव मुकुंद (फोटो साभार: सोशल मीडिया)


देश में सांवलेपन को लेकर लोगों की मानसिकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके चेहरे का निखार और खूबसूरती बढ़ाने का दावा करने वाली क्रीमों का बाजार कई हजार करोड़ रुपयों का है।

भारत में सांवलेपन या काला होने पर व्यक्ति को जीवन भर हीनभावना से गुजरना पड़ता है। ऐसे में आम आदमी की बात छोड़ ही दी जाए, सेलिब्रिटी और फिल्म स्टार से लेकर क्रिकेटरों और स्पोर्ट्समैन को इससे जूझना पड़ता है। अभी हाल ही में भारतीय क्रिकेट टेस्ट टीम में शामिल हुए तमिलनाडु के सलमी बल्लेबाज अभिनव मुकंद पर भी सांवलेपन को लेकर टिप्पणियां की गईं। इन टिप्पणियों से आहत होकर अभिनव ने ट्विटर पर उन लोगों को करारा जवाब दिया है जिनका दिमाग हमेशा सांवलेपन को लेकर असहज रहता है। देश में सांवलेपन को लेकर लोगों की मानसिकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके चेहरे का निखार और खूबसूरती बढ़ाने का दावा करने वाली क्रीमों का बाजार कई हजार करोड़ रुपयों का है।

अभिनव ने कहा कि इस पोस्ट के लिखने के पीछे काफी कम उम्र से स्किन के रंग को लेकर उन पर किए गए कमेंट हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के कैप्टन विराट कोहली और आर अश्विन ने अभिनव मुकुंद के इस बात का समर्थन किया है। मुकुंद के मुताबिक रंग-रूप नहीं, इंसान के काम की अहमियत होती है। अभिनव ने कहा, 'मैं दस साल की उम्र से क्रिकेट खेल रहा हूं। मैं आज जिस मुकाम पर हूं वहां धीरे-धीरे पहुंचा हूं। यह मेरे लिए एक सम्मान की बात है कि मुझे देश की टीम से खेलने का मौका मिला। मैं आज जो कुछ भी लिख रहा हूं, उसके पीछे का मकसद अपनी ओर ध्यान खींचना या सहानुभूति हासिल करना नहीं है। मैं इस उम्मीद से लिख रहा हूं क्योंकि मैं इसके बारे में बहुत शिद्दत से सोचता आया हूं। मैं इसलिए लिख रहा हूं ताकि लोगों की सोच में बदलाव आए।'

अभिनव (फोटो साभार: टाइम्स ऑफ इंडिया)

अभिनव (फोटो साभार: टाइम्स ऑफ इंडिया)


 "मैं इस बात से बेपरवाह रहा कि ऐसा करने मेरी स्किन का रंग कुछ और बदल गया। मैंने यह सब खेल के प्रति प्यार की वजह से किया।"

उन्होंने कहा कि मैं अपने देश के भीतर और बाहर 15 साल की उम्र से ही कई सारी यात्राएं की हैं। इस दौरान मेरी स्किन का रंग देख लोगों की सनक मुझे हमेशा रहस्यमयी लगे। मैं दिन-रात एक करके सूरज की रोशनी में क्रिकेट खेला और ट्रेनिंग की। इस बात से बेपरवाह रहा कि ऐसा करने मेरी स्किन का रंग कुछ और बदल गया। मैंने यह सब खेल के प्रति प्यार की वजह से किया। क्रिकेट खेलने वाले इस बात को समझते हैं। मैं तमिलनाडू से आता हूं, जो देश का सबसे गर्म इलाकों में से एक है। मैं जो कुछ भी हासिल कर सका, वह इसलिए क्योंकि मैंने तपते दिनों में खुद को तैयार किया।

अभिनव कहते हैं कि, 'मैने अपनी स्किन के रंग के बारे में एक से एक टिप्पणियां सुनीं और उसे नजरअंदाज किया क्योंकि मेरा ध्यान बड़े लक्ष्यों की तरफ था। चूंकि मैं अपने शुरुआती दिनों से ही रंगभेदी फब्तियों के चपेट में आया, इसलिए मैंने अपना मन मजबूत बनाए रखा। ऐसे कई मौके आए, जब मैंने अपने ऊपर की गई टिप्पणियों का जवाब नहीं दिया।' अभिनव ने ट्विटर पर अपनी बात कहते हुए कहा कि, 'आज मैं बोल रहा हूं, तो केवल अपने लिए नहीं, बल्कि हमारे देश के उन तमाम लोगों की तरफ से भी जो अपनी स्किन के रंग की वजह से अपने ऊपर किए गए कमेंट से आहत होते हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में ऐसी टिप्पणियां गाली-गलौज तक पहुंच गई हैं। गोरा रंग ही केवल लवली या हैंडसम का पैमाना नहीं है। आप जिस रंग में हो, उसमें सच्चे रहो, अपने काम पर ध्यान रखो और सहज रहो।'

पढ़ें: इंफोसिस के संस्थापक ने क्यों कहा, "अच्छा हुआ नहीं जा सका IIM

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