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बैंकिंग सिस्टम और टेक्नोलॉजी स्टार्टअप में बने वरदान

जय प्रकाश जय
13th Oct 2017
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जीरो बजट पर खेती करने का तरीका भी कई राज्यों में चलन में आने लगा है। जौनपुर (उ.प्र.) के नए सफल किसान उमानाथ यादव तो इसमें सफलता के बाद अन्य राज्यों में जाकर शून्य निवेश पर आधुनिक तकनीक से व्यावसायिक खेती के गुर सिखा रहे हैं।

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर


बाजार में कई उत्पादों को तैयार करने में भी इनकी डिमांड है। देश में इस तरह के स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए एचडीएफसी बैंक अपनी शाखाओं में स्मार्ट जोन्स तैयार करने जा रहा है।

बैंक स्टार्टअप्स को उनकी जरूरतों के मुताबिक हर सुविधा उपलब्ध कराएगा, जिसमें कानूनी से लेकर टैक्स से जुड़े सलाह मशविरा भी शामिल हैं। बिहार सरकार तो शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि सहित सभी विभागों में स्टार्टअप उद्यमियों को शासकीय मदद दे रही है।

हमेशा, हर घड़ी नौकरी-नौकरी का जाप करते रहने से जीवन में सफलता के पायदान मिलना आज के युग में कठिन ही नहीं असंभव है। संभावनाएं तमाम हैं। बिजनेस के नए-नए रास्ते खुल रहे हैं और तमाम युवा उसमें अपने को आजमाते हुए दौड़ में आगे भी निकल जा रहे हैं लेकिन जो सिर्फ जाप कर रहे हैं, किस्मत और मुकद्दर पर नजरें गड़ाए हैं, बाट ही जोहते रह जाते हैं। बैंकिंग सेक्टर और आधुनिक टेक्नोलॉजी नई प्रतिभाओं के लिए वरदान साबित हो रही हैं। बागवानी फसलों की खेती के क्षेत्र में युवा किसानों की आय बढ़ रही है। अकेले बिहार सरकार ने ही बागवानी फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए 49 करोड़ की राशि मंजूर की है। किसानों को 35 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।

बागवानी ही नहीं, मधुमक्खी पालन, समेकित कीट-व्याधि प्रबंधन, संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए फ्लोरिकल्चर संरचना विकास की सुविधा दी जा रही है। बिजली और पानी की सेवाएं भी नई सफलताओं का सबब बनने जा रही हैं। मार्केट में अब ऐसा डिवाइस आने जा रहा है, जो मुफ्त में बिजली उपलब्ध कराएगा, वह भी 12 साल की गारंटी के साथ। इस डिवाइस को भारत में जन्मे अरबपति उद्यमी और समाजसेवी मनोज भार्गव ने नई दिल्ली में आयोजित हुए एक इवेंट के दौरान डॉक्यूमेंट्री फिल्म- बिलियन्स इन चेंज 2 में दिखाया भी है। जाहिर है, इसका सबसे ज्यादा फायदा आधुनिक इंटर प्रेन्योर और स्टार्टअप को मिलने वाला है।

जीरो बजट पर खेती करने का तरीका भी कई राज्यों में चलन में आने लगा है। जौनपुर (उ.प्र.) के नए सफल किसान उमानाथ यादव तो इसमें सफलता के बाद अन्य राज्यों में जाकर शून्य निवेश पर आधुनिक तकनीक से व्यावसायिक खेती के गुर सिखा रहे हैं। बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। अपने नए कृषि मॉडल के हुनर के कारण वह प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों से सम्मानित भी हो चुके हैं। उमानाथ ने वर्ष 1974 में बीएससी एजी कर किसानी को ही अपने रोजगार का माध्यम बना लिया। जैविक खेती करने लगे। अब वह वर्मी कंपोस्ट बेचकर हर साल लाखों की कमाई कर रहे हैं। वह किसानों को बताते हैं कि किस तरह से शून्य बजट पर उत्पादित कृषि उत्पाद घर बैठे बैठे अधिकतम दाम पर बेचे जा सकते हैं और किस तरह बिना किसी लागत के जैविक उर्वरक तैयार कर उनसे में दोहरी कमाई की जा सकती है।

उनका मानना है कि एक अदद देसी गाय और एक नीम के पेड़ यानी गोबर, गोमूत्र और नीम की पत्तियों के सहारे भी खेती में आत्मनिर्भर हुआ जा सकता है। खेती में इनके प्रयोग से फायदे तो हैं ही, बाजार में कई उत्पादों को तैयार करने में भी इनकी डिमांड है। देश में इस तरह के स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए एचडीएफसी बैंक अपनी शाखाओं में स्मार्ट जोन्स तैयार करने जा रहा है। स्टार्टअप्स के मेंटरिंग में बैंक आईआईटी बॉम्‍बे, आईआईटी रुड़की और आईआईएम, अहमदाबाद की इन्‍क्‍यूबेशन एंड एंटरप्रेन्‍योरशिप सेल की सहायता से स्‍टार्टअप्‍स को प्रोत्साहित करेगा। जाहिर है, इसका लाभ कृषि क्षेत्र में जुटे युवा उद्यमियों, कारोबारियों को भी मिलेगा।

बैंक स्टार्टअप्स को उनकी जरूरतों के मुताबिक हर सुविधा उपलब्ध कराएगा, जिसमें कानूनी से लेकर टैक्स से जुड़े सलाह मशविरा भी शामिल हैं। बिहार सरकार तो शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि सहित सभी विभागों में स्टार्टअप उद्यमियों को शासकीय मदद दे रही है। इससे दो वर्षों में सरकार को भी डिजिटल पेमेंट व्यवस्था के कारण 58 हजार करोड़ रुपये की बचत तो हुई ही है, इससे बिचौलिए भी खत्म हो गये हैं। पिछले डेढ़ वर्षों में देश में मात्र 72 स्टार्टअप के आवेदनों को वित्तीय सहायता देने के लिए स्वीकृत किया गया, जबकि अकेले बिहार में छह महीने में ङी 32 स्टार्टअप को वित्तीय सहायता मंजूर हुई। ऐसे ही एक सफल युवाओं चंद्रशेखर, निरंजन कुमार, अभिषेक रंजन, सुमन कुमार झा, अमित कुमार राय आदि को पिछले दिनो सरकार की तरफ से एक लाख रुपए से लेकर पच्चीस-पच्चीस हजार रुपए के इनाम भी दिए गए।

यह भी पढ़ें: स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत: दारू की नदियां और दवाओं का अकाल

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