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ऋण योग्यता के लिए सिबिल वर्ष में एक रिपोर्ट निःशुल्क उपलब्ध कराएगा-राजन

YS TEAM
18th Jul 2016
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रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि क्रेडिट इंफर्मेशन ब्यूरो ऑफ इंडिया (सिबिल) अब हर साल व्यक्तिगत रूप से एक निःशुल्क क्रेडिट रिपोर्ट उपलब्ध कराएगी। सिबिल ऐसी वित्तीय संस्था है, जो किसी भी व्यक्ति को ऋण लेने की पात्रता की जाँच करती है। इस रिपोर्ट से अब कोई भी व्यक्ति अपनी पात्रता के अनुसार ऋण प्राप्त कर सकता है। वर्तमान में यह रिपोर्ट सशुल्क उपलब्ध करायी जाती है।

सिबिल की स्थापना सन 2000 में हुई थी और यह लोगों के व्यक्तिगत रूप से 500 रुपये शुल्क अदा करने पर क्रेडिट रिपोर्ट उपलब्ध कराती है। रघुराम राजन के अनुसार, अब यह साल भर में एक रिपोर्ट निःशुल्क उपलब्ध कराएगा।

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आज हैदराबाद में 'वित्तीय समावेश के माध्यम ग्रामीण भारत का विकास विषय पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि क्रेडिट इनफर्मेशन ब्यूरो ऑफ इंडिया इसी वर्षांत से अपनी यह सेवा शुरू करेगा, ताकि लोग व्यक्तिगत रूप से अपनी क्रेडिट रेटिंग और ऋण प्राप्त करने की पात्रता जान सकें। यह रिपोर्ट व्यक्ति की ऋण प्राप्त करने की संभावनाओं के आधार पर होगी।

डॉ. रघुराम राजन ने कहा कि इस रिपोर्ट से बहुत सारे लाभ होंगे। व्यक्ति जान पाएगा कि यदि वह अपना ऋण बकाया अदा नहीं करेगा, तो उसकी क्रेडिट रेटिंग प्रभावित होगी और इसके चलते वह भविष्य में अपनी रेटिंग के सुधार के लिए समय पर ऋण की किश्तेें अदा करेगा। समय पर भुगतान के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए क्रेडिट रेटिंग काफी काम आएगी।

डॉ.रघुराम राजन ने कहा कि क्रेडिट इन्फर्मेशन ब्यूरो की गतिविधियाँ न केवल सूचना से संबंधित समस्या का समाधान कर रही हैं, बल्कि रिटेड क्रेडिट की समस्याएँ भी सुलझाई जा सक रही हैं। साथ ही आरबीआई प्रमुख ने कहा कि क्रेडिट ब्यूरो की सेवाओं को ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तार देने की आवश्यकता है, ताकि स्वयं सहायता समूहों को इससे सहयोग मिल सके। - योर स्टोरी टीम 

टिकाउ वृद्धि के लिए वित्तीय समावेशी जरूरी : राजन

हैदराबाद, 18 जुलाई :भाषा: वित्तीय समावेशी पर जोर देते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने आज कहा कि केंद्रीय बैंक संस्थानांे के लिए सभी को बैंकिंग सेवाएं सुलभ कराने का काम आकषर्क बनाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने वित्तीय समावेशन को टिकाउ वृद्धि का एक महत्वपूर्ण आधार बताया।

गवर्नर राजन ने कहा कि बैंक आमतौर पर मुनाफे के लिए कर्ज लेने वालांे पर ध्यान देते हैं। गवर्नर ने कहा कि आधार आधारित भुगतान प्रणाली से वित्तीय सुविधाओं से वंचित लोगांे तक इसे पहुंचाने में मदद मिलेगी।

राजन ने राष्ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थान में परिचर्चा सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘अंतत: क्या हमें प्रत्येक व्यक्ति तक वे सेवाएं :बैंकिंग: नहीं पहुंचानी चाहिए जिनका फायदा इस कमरे में बैठे हम सभी लोग उठाते हैं।’’ उन्होंने कहा कि वित्तीय सेवाओं को हर व्यक्ति के लिए सुलभ बनाना नैतिकता के तकाजे और आर्थिक क्षमता दोनों की दृष्टि से जरूरी है। जब हर व्यक्ति के पास अपनी जिंदगी बेतर बनाने के औजार और साधन होंगे तो उत्पादन , वृद्धि और आर्थिक समृद्धि बढेगी। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में हम उन सभी भारतीयांे को औपचारिक वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराएंगे, जो इन्हंे चाहते हैं। वित्तीय समावेशी देश की सतत वृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व है।

उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन की राह में भारत ने अच्छी प्रगति की है पर अभी आगे लंबा रास्ता बाकी है।

राजन ने कहा कि हम इस काम में आदेश, सब्सिडी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकांे पर निर्भरता से आगे बढ़कर एक ऐसी अनुकूल व्यवस्था की ओर बढ रहे हैं जिससे सभी वित्तीय संस्थानांे के लिए ‘वंचितांे’ को अपने साथ जोड़ना आकषर्क लगेगा। पर इसके साथ साथ वंचितांे के हितांे के संरक्षण के लिए शिक्षा, प्रतिस्पर्धा और नियमों की भी जरूरत होगी।- पीटीआई

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