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स्कूल के अंदर भी बच्चे पर रखनी है नजर? इस ऐप का उठाएं लाभ

3rd Dec 2018
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 इस ऐप के माध्यम से पैरंट्स को अपने बच्चे की सुरक्षा, स्कूल बस की ट्रैकिंग, रिपोर्ट कार्ड्स आदि की सुविधाएं तो मिलती ही हैं। साथ ही, इस ऐप के माध्यम से एक ही फ़ोरम पर स्कूल बच्चों के माता-पिता से संपर्क कर सकते हैं और उनसे बातचीत कर सकते हैं।

चिराग पलांडे

चिराग पलांडे


अभी तक प्ले स्टोर से उनके ऐप को 7 डाउनलोड्स मिल चुके हैं और उनके ऐप को इस्तेमाल करना बेहद सहज है।चिराग़ को मार्केटिंग और इनोवेशन के क्षेत्र में 18 सालों का लंबा अनुभव है। 

सीखने, पढ़ने और बढ़ने की उम्र तक अधिकतर मां-बाप अपने बच्चे की हर छोटी सी छोटी हरकत और उसके आस-पास के माहौल की निगरानी रखना चाहते हैं। एक समय था, जब बच्चों का स्कूली जीवन बेहद सहज होता था और हम परीक्षाएं पास करते हुए आगे बढ़ते चले जाते थे। लेकिन अब स्कूली जीवन बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया और सभी बच्चों को बेहद कम उम्र से ही प्रोफ़ेशनलिज़म की रेस में दौड़ना पड़ता है। इस दौड़ में मां-बाप चाहते हैं कि इतनी अधिक फ़ीस चुकाने के बाद उन्हें भी यह जानकारी हो कि उनका बच्चा स्कूल में कैसे माहौल में पढ़ाई कर रहा है और उसका व्यक्तित्व किस तरह से विकसित हो रहा है।

इसके अलावा, उन्हें लगातार अपने बच्चे की सुरक्षा की चिंता भी सताती रहती है। आज हम आपको एक ऐसे स्टार्टअप के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने मां-बाप की इस चिंता का हल खोज निकाला है। मुंबई आधारित स्टार्टअप स्कूल हैंडी, अपने यूज़र्स को ऐप देता है, जिसके माध्यम से वे स्कूल के अंदर अपने बच्चे की गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी कर सकते हैं और साथ ही, स्कूल हैंडी एमरजेंसी अलर्ट्स जैसी सर्विसेज़ भी मुहैया करा रहा है।

स्टार्टअप के फ़ाउंडर 37 वर्षीय चिराग पलांडे को अपनी पत्नी के साथ अपनी बच्ची के करियर के बारे में बातचीत के दौरान स्कूल हैंडी का आइडिया आया। एक रात वे दोनों इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि किस तरह से वे अपनी बेटी की ऐकेडमिक प्रोग्रेस में अपनी प्रतिभागिता बढ़ा सकते हैं। यहीं से चिराग़ को स्कूल हैंडी का आइडिया आया और डेढ़ साल की रिसर्च के बाद इस साल ही उन्होंने स्कूल हैंडी लॉन्च किया।

स्कूल हैंडी एक एंड-टू-एंड और क्लाउड आधारित ऐप है, जो लगातार बच्चों के माता-पिता को अपडेट भेजता रहता है। इस ऐप के माध्यम से पैरंट्स को अपने बच्चे की सुरक्षा, स्कूल बस की ट्रैकिंग, रिपोर्ट कार्ड्स आदि की सुविधाएं तो मिलती ही हैं। साथ ही, इस ऐप के माध्यम से एक ही फ़ोरम पर स्कूल बच्चों के माता-पिता से संपर्क कर सकते हैं और उनसे बातचीत कर सकते हैं।

चिराग़ मानते हैं कि इस ऐप की बदौलत स्कूलों और पैरंट्स के बीच किसी तरह का कम्यूनिकेशन गैप नहीं पैदा होता। ऐप के माध्यम से पैरंट्स को अपने बच्चों के रिपोर्ट्स कार्ड्स के साथ स्कूलों द्वारा जारी होने वाले हर तरह के नोटिस इत्यादि की भी जानकारी लगातार मिलती रहती है। बच्चों को किसी भी तरह की असुरक्षा की आशंका होने पर अभिभावकों के पास तत्काल जानकारी पहुंच सकती है।

बच्चों का होमवर्क देखने और उनके रिजल्ट्स की तत्काल के जानकारी के साथ-साथ अभिभावक उनकी स्कूल फ़ीस का भुगतान भी ऐप के माध्यम से ही कर सकते हैं। इसके अलावा इस ऐप के साथ रेडियो-फ़्रीक्वेंसी आइडेंटिफ़िकेशन (आरएफ़आईडी) आधारित अटेंडेन्स सिस्टम दिया गया है, जिसकी बदौलत रोल नंबर के हिसाब उपस्थिति लगाने की जद्दोजहद से भी छुटकारा मिलता है। स्कूल हैंडी स्कूलों में ट्रैकिंग मैकनिज़म के साथ हार्डवेयर डिवाइसेज़ इन्सटॉल करता है, जिसकी मदद से स्कूल में बच्चे की अटेंडेन्स का रेकॉर्ड दर्ज होता है और पैरंट्स को उनके बच्चे के क्लास में जाने और निकलने की भी जानकारी मिलती रहती है।

चिराग़ ने जानकारी दी कि अभी तक प्लेस्टोर से उनके ऐप को 7 डाउनलोड्स मिल चुके हैं और उनके ऐप को इस्तेमाल करना बेहद सहज है।चिराग़ को मार्केटिंग और इनोवेशन के क्षेत्र में 18 सालों का लंबा अनुभव है। इससे पहले चिराग़ ने मोबाक्स (Mobaccs) नाम से एक स्टार्टअप की शुरुआत की थी, जो वीआर ग्लास और रिमोट्स बेचता था। हाल में वह स्कूल हैंडी और मोबाक्स दोनों ही स्टार्टअप को चला रहे हैं। स्कूल हैंडी का प्रमोशन, फ़ंडिंग और मैनेजमेंट मोबाक्स के माध्यम से ही होता है।

फ़िलहाल स्कूल हैंडी के इस्तेमाल के लिए कोई चार्ज नहीं लिया जा रहा है, लेकिन कंपनी स्कूल से हार्डवेयर इन्सटॉलेशन का पैसा लेती है। कंपनी की योजना है कि इस ऐप के साथ ऑनलाइन शॉपिंग, किड्स इन्श्योरेन्स, स्कूल फ़ीस के लिए लोन आदि की सुविधाएं भी जोड़ी जाएं। हाल में, मुंबई के 80 स्कूल्स, इस ऐप के साथ जुड़े हुए हैं। कंपनी गुजरात में चार और पुणे में तीन स्कूलों के साथ काम कर रही है।

एजुकेशन टेक सेक्टर के इस स्पेस में ऐपलेन सॉल्यूशन्स, स्कूल डायरी, फ़ैल्कन और एडुचैट.इन जैसे स्टार्टअप्स भी अपनी सुविधाएं मुहैया करा रहे हैं। चिराग़ मानते हैं कि उनका स्टार्टअप इन सभी स्टार्टअप्स से इस मायने में अलग है कि उनका ऐप सभी सुविधाओं को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर ला रहा है। केपीएमजी और गूगल की रिपोर्ट्स के मुताबिक़, भारत का एजुकेशन टेक मार्केट 2021 तक 1.96 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा।

स्कूल हैंडी का लक्ष्य है कि अगले तीन सालों के भीतर उनके क्लाइंट्स की लिस्ट में भारत के कम से कम 100 स्कूल शामिल हों। साथ ही, कंपनी की योजना है कि ऐप पर कुछ ऐसे फ़ीचर्स जोड़े जाएं, जिनके माध्यम से स्कूल में होने वाले कार्यक्रमों के फ़ोटोज़ और विडियोज़ आदि भी शेयर किए जा सकें। इसके अलावा, आपके घर तक किताबों की डिलिवरी करने का फ़ीचर भी ऐप में जोड़ा जा सकता है।

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