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दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल की जंग से ताजा हुईं निर्भया की यादें

बेटी बचाओ का नारा देने वाले इस देश में क्यों दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं बेटियों से दुराचार की घटनाएं...

16th Apr 2018
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दिल्ली में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि स्थली राजघाट पर स्वाति मालीवाल के आमरण अनशन का आज चौथा दिन है। हमारे देश की ये कैसी विडंबना है कि एक ओर 'बेटी बचाओ' का नारा दियाा जाता है, दूसरी ओर उनसे दुराचार की वारदातों में बाढ़ सी आती जा रही है। मां की कोख से ही बच्चियों का भविष्य अंधकारमय रहने लगा है। भ्रूण हत्या से लेकर जन्म के बाद जीवन के हर मोरचे पर बेटी के लिए दुश्वारियां ही दुश्वारियां। ऐसे में स्वाति की जंग निर्भया की यादें ताजा कर देती है।

डीसीडब्लू की चेयरमैन स्वाति मालीवाल अनशन पर

डीसीडब्लू की चेयरमैन स्वाति मालीवाल अनशन पर


भ्रूण हत्या से लेकर जन्म के बाद जीवन के हर मोरचे पर बेटी के लिए दुश्वारियां ही दुश्वारियां। इस बीच उत्तर प्रदेश के उन्नाव और जम्मू-कश्मीर के कठुआ में रेप के मामलों को लेकर इन दिनों दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल दिल्ली के राजघाट पर बेमियादी अनशन कर रही हैं।

हमारे देश की ये कैसी विडंबना है कि एक ओर 'बेटी बचाओ' का नारा दियाा जाता है, दूसरी ओर उनसे दुराचार की वारदातों में बाढ़ सी आती जा रही है। मां की कोख से ही बच्चियों का भविष्य अंधकारमय रहने लगा है। भ्रूण हत्या से लेकर जन्म के बाद जीवन के हर मोरचे पर बेटी के लिए दुश्वारियां ही दुश्वारियां। इस बीच उत्तर प्रदेश के उन्नाव और जम्मू-कश्मीर के कठुआ में रेप के मामलों को लेकर इन दिनों दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल दिल्ली के राजघाट पर बेमियादी अनशन कर रही हैं।

उनकी मांग है कि दुष्कर्म के आरोपियों को मृत्युदंड की सजा मिलनी चाहिए। पीएम को लिखी एक चिट्ठी में वह कहती हैं कि वह अपना अनशन तब तक नहीं तोड़ेंगी, जब तक प्रधानमंत्री देश से बेटियों की सुरक्षा के लिए एक बेहतर प्रणाली बनाने का वादा नहीं करते। अन्ना आंदोलन के समय से ही अरविंद केजरावील की विश्वासपात्र स्वाति मालीवाल की इस समय आम आदमी पार्टी में काफी मजबूत स्थिति है। स्वाति हरियाणा के पार्टी प्रभारी नवीन जयहिंद की पत्नी हैं। पार्टी के भीतर इस समय दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के बाद स्वाति मालीवाल ही मुख्यमंत्री की सबसे भरोसेमंद मानी जाती हैं।

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद जब स्वाति को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया था तो अंदरखाने इसका विरोध भी होने लगा था। उस दौरान स्वयं सीएमने स्वाति का बचाव किया था। इसी तरह जब उन्हें दिल्ली महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया जा रहा था, उपराज्यपाल सम्बंधित फाइल पर हस्ताक्षर में देर करने लगे तो एक बार फिर स्वाति की तरफदारी में सीएम ने हस्तक्षेप किया। अब तो आम पब्लिक में संदेश जा चुका है कि मुख्यमंत्री के बाद पार्टी का दूसरा सबसे असरदार चेहरा स्वाति मालीवाल ही हैं। सत्ता प्रतिष्ठान से भरपूर विश्वास हासिल करने के दौरान दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में अवैध शराब की बिक्री के खिलाफ एक छोटी मोटी जंग सी लड़ चुकी हैं। इसके अलावा दिल्ली के कंजावला क्षेत्र में सात साल की एक बच्ची से रेप के बाद से ही दुष्कर्मियों को मृत्युदंड की मांग करने लगी हैं।

अब आइए, जरा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की एक महत्वपूर्ण सूचना पर नजर डालते हैं। ब्यूरो का रिसर्च है कि भारत में प्रतिदिन बलात्कार के कम से कम 50 मामले थानों में पंजीकृत हो रहे हैं। हर घंटे कोई न कोई दो महिलाएं अपनी अस्मत गंवा रही हैं। ऐसी घटनाओं के लिए सबसे असुरक्षित मध्यप्रदेश है, जबकि दूसरे और तीसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश-महाराष्ट्र हैं। इन तीनों प्रदेशों में रेप की घटनाओं का आकड़ा 44.5 प्रतिशत है। ब्यूरो का निष्कर्ष है कि दिल्ली रेप की घटनाओं के मामले में सबसे आगे है।

स्वाति मालीवाल के साथ पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा

स्वाति मालीवाल के साथ पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा


विश्व स्वास्थ संगठन के एक अध्ययन के अनुसार, भारत में प्रत्येक 54वें मिनट में एक औरत के साथ रेप हो जाता है। सेंटर फॉर डेवलॅपमेंट ऑफ वीमेन के अनुसार भारत में प्रतिदिन 42 महिलाएं रेप का शिकार बनती हैं। ऐसे मामलों की जांच करने वाले कुछ पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ऐसे अधिकतर मामलों में आरोपी को पीड़िता के बारे में जानकारी होती है। यह एक सामाजिक समस्या है और ऐसे अपराधों पर नकेल कसने के लिए रणनीति बनाना असंभव है। इनमें से अधिकांश मामले बेहद तकनीकी होते हैं।

अक्सर ऐसे अपराध दोस्तों या रिश्तेदारों द्वारा किए जाते हैं, जो पीड़िता को झूठे वादे कर बहलाते हैं, फिर गलत काम करते हैं। कई बार ऐसे अपराध अज्ञात लोग करते हैं और पुलिस की पहुंच से आसानी से बच निकलते हैं। सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि रेप पीड़ित महिला जीवन भर के लिए स्वयं की नजरों में गिर जाती है। एक स्त्री के लिए दुष्कर्म से ज्यादा जघन्य और कोई घटना नहीं।

रेपिस्टों को सजा-ए-मौत की मांग को लेकर आमरण अनशन कर रहीं स्वाति मालीवाल के अनशन का आज चौथा दिन है। आज उनके स्वास्थ्य में काफी गिरावट दर्ज की गई है। डॉक्टरों की टीम ने राजघाट पर उनका स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद बताया है कि उनका और ज्यादा भूखे रहना खतरे से खाली नहीं है। स्वाति आधी आबादी की इज्जत की लड़ाई राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर लड़ रही हैं। वह चाहती हैं कि रेप के आरोपियों को छह महीने के भीतर फांसी की सजा का प्रावधान किया जाए। वह फरवरी 2018 से 'रेप रोको' अभियान चला रही हैं।

वह केंद्र सरकार से बच्चों के मामले में एक सख्त कानून लाने की मांग कर रही हैं। वह चाहती हैं कि बच्चों के साथ रेप करने वालों की कार्रवाई फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में हो। बच्चों से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद और दुष्कर्म और हत्या के दोषियों को फांसी दी जाए। वह कहती हैं कि बच्चों के साथ रेप और उस पर सरकारों की खामोशी को और अधिक सहन नहीं किया जा सकता है। उन्नाव और कठुआ की दुष्कर्म पीड़ितों के साथ इंसाफ किया जाना चाहिए। अपनी मांगें नहीं माने जाने तक वह राजघाट से हटने वाली नहीं हैं।

स्वाति मालीवाल का चेकअप करते डॉक्टर

स्वाति मालीवाल का चेकअप करते डॉक्टर


बलात्कार की जघन्यता से जुड़े सवाल गंभीर हो चले हैं। हमारा विवेक जागे, इसके लिए हमें किसी निर्भया या आसिफ़ा की ही ज़रूरत क्यों पड़ती है? क्या हमारा समाज वाकई बलात्कार के विरोध में है? क्या वह हर बलात्कार का उसी तीव्रता से प्रतिरोध करता है जिस तीव्रता से अन्य तरह के मामलों का? हालात कितने भयावह हो चले हैं कि भगवान जगन्नाथ मंदिर के परिसर के अंदर ही, वह भी शारीरिक रूप से अक्षम, एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म किया जाता है। ऐसी बात नहीं है कि सरकार इन अपराधियों पर नियंत्रण करने का प्रयास नहीं कर रही है। बल्कि जहां अपराध की घटनाएं होती हैं, उसकी रोकथाम के लिए सरकारी तंत्र की व्यवस्था है, लेकिन जब सरकारी तंत्र अपराध रोकने की जगह स्वयं ही अपराध करने लगे तो हगामा होना स्वाभाविक है।

यह भी चिंताजनक है कि जहां बलात्कार के बाद पीड़िता को कानून और स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए, हमारे देश में न्याय के लिए पीड़िता को दर दर भटकना पड़ता है। ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक यौन हमले की पीड़िताओं की जांच करने वाले डॉक्टर ही उन्हें जाँच के बारे में पर्याप्त जानकारी देने से मना कर देते हैं। उनके साथ प्रायः पुलिस और डॉक्टर संवेदनहीन हो जाते हैं। ऐसे में स्वाति मालीवाल के अनशन को भले राजनीतिक नजरिए से लिया जाए, उनकी जंग निर्भया की जंग है।

यह भी पढ़ें: कभी करनी पड़ी थी गार्ड की नौकरी, अब आईपीएल में दिखाएगा अपनी धाक

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