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समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों में बढ़ जाता है डायबिटीज़ का खतरा

7th Aug 2017
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हाल में हुई एक शोध में यह बात सामने आई है, कि जो बच्चे समय से पहले पैदा हो जाते हैं और जिन्हें हम प्रीमेच्योर बेबी बोलते हैं उनमें मधुमेह का खतरा सही समय पर पैदा होने वाले बच्चों की अपेक्षा बढ़ जाता है और साथ ही प्रीमेच्योर बेबीज़ को भविष्य में और भी कई तरह की बीमारियों के होने की संभावना बढ़ जाती है।

फोटो साभार: सोशल मीडिया

फोटो साभार: सोशल मीडिया


शोध के मुताबिक पांच साल से कम उम्र के बच्चों में भी अब मधुमेह के लक्षण दिखाई देने शुरू हो गये हैं, जो कि आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती बन कर उभरेगा।

बेंगरियन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी हालिया स्टडी में ये बात सामने रखी है कि समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं में मधुमेह का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा ऐसे शिशु जब वयस्क होते हैं, उस उम्र में उनको कई तरह की बीमारियां घेर लेती हैं। यहां पर आपको बता दें कि समय से पहले पैदा होने वाले शिशु मतलब वे बच्चे जो गर्भावस्था के 37 से लेकर 39वें महीने में ही पैदा हो जाते हैं। 39 से लेकर 41वें महीने के बीच पैदा होने वाले बच्चे सबसे ज्यादा स्वस्थ माने जाते हैं। इसके पहले या इसके बाद पैदा होने वाले बच्चों में कई तरह के खतरे बढ़ जाते हैं।

ये स्टडी "अमेरिकन जरनल ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गाइनाकॉल्जी" में प्रकाशित हुई है। शोधकर्ताओं ने तकरीबन चौवन हजार समय से पहले की डिलीवरी और एक लाख इकहत्तर हजार सामान्य डिलीवरी के केसों का अध्ययन करके ये निष्कर्ष निकाला है।

पढ़ें: गरीबों में तेजी से फैल रही ये अमीरों वाली बीमारी

समय से पहले होने वाली डिलीवरी है खतरनाक?

प्रेग्नेंसी के समय मां को अगर मधुमेह हो तो गर्भ में बच्चे के जल्दी बढ़ने की वजह से बच्चा अपनी अवधि पूरी नहीं कर पाता। फिर शिशु को ऐसे में गर्भकाल पूरा होने से पहले ही निकाल लिया जाता है। मां के लिये प्राकृतिक प्रसव करवाना मुश्किल होता है और इससे मां को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। अगर शिशु की बात करें तो हो सकता है कि प्रसव करवाते समय उसका सिर तो बाहर आ जाए मगर उसके कंधे मां के गर्भ में ही अटक जाएं। कई सीरियस केसों में शिशु के शरीर में कई जरूरी खनिजों जैसे- कैल्शियम और मैग्नीशियम की कमी होने के कारण उन्हें पीलिया हो जाता है। जन्म के बाद अगर शिशु की सही देखभाल की जाए तो उन्हे यह समस्या नहीं आती। शिशु को डॉक्टर द्वारा खनिज की खुराक देने की सलाह भी दी जाती है।

एक शोधकर्ता के मुताबिक, 'हमने इन केसेज में जो बच्चे पैदा हुए थे और जो 18 साल के हो चुके थे उनके मेटाबॉलिज्म और स्वास्थ्य का परीक्षण किया। जो बच्चे समय से पहले हुई डिलीवरी से पैदा हुए थे उनमें बीमारियों के ज्यादा लक्षण पाए गए बजाय सामान्य पैदा हुए बच्चों के।'

शोधकर्ताओं ने ये भी पाया कि पांच साल से बड़े बच्चों में अभी से मधुमेह के शुरुआती लक्षण दिखने शुरू हो गए हैं। इस स्टडी में ये भी बताया गया कि जो बच्चे समय से पहले पैदा हुए था उनका वजन सामान्या यानि कि ढाई किलो से काफी कम था।

पढ़ें: मोटापे की वजह कहीं ये तो नहीं?

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