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गरीबों को अधिकारी बना रहा दिल्ली का ये शख्स

ज़रूरतमंद बच्चों की ज़िदगी में शिक्षा की लौ जलाकर समाज को नया संदेश दे रहा है ये शख़्स...

23rd May 2018
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दिल्ली के साधारण से अध्यापक राम कुमार नजाने कितने ही गरीब बच्चों के जीवन को ज्ञान की रौशनी सी रौशन कर चुके हैं। राम उन बच्चों की पढ़ाते हैं, जो सपना अफसर बनने का देखते हैं, लेकिन उनके पास संसाधनों का अभाव होता है। जो बात सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली है, वो ये है कि राम इन बच्चों से फीस नहीं लेते, यानी कि इन्हें फ्री में पढ़ाते हैं।

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राम कुमार के पूर्व छात्र इनकम टैक्स इंस्पेक्टर हिमांशु के अनुसार राम इन्सान के रूप में भगवान का हैं। वो बताते हैं, कि राम सर उनका खर्च तक उठाते थे। एक बार हिमांशु की हालत ऐसी हो गयी थी कि वो सुसाइड तक करने का मन बना चुके थे लेकिन राम की मदद से वो उस हालात पर काबू पा सके और आज ये मुकाम हासिल किया। हिमांशु बताते हैं, कि उनके बैच में ऐसे भी बच्चे थे जो चाय का ठेला लगाते थे और आज अच्छे ओहदे पर आसीन हैं।

कहते हैं कि "हीरे की परख सिर्फ एक जौहरी ही कर सकता है ।" इसका जीता जगता उदाहरण हैं राम कुमार। राम दिल्ली के रहने वाले हैं और पेशे से शिक्षक हैं। अब आप सोचेंगे कि शिक्षक तो लाखों लोग हैं हमारे देश में फिर इस शिक्षक में ऐसा क्या जो बाकियों में नहीं, तो हम बता देते हैं, कि ये सचमुच समाज में शिक्षा की नई लौ जगाने का काम कर रहे हैं। राम उन चंद लोगों में से हैं, जो झुग्गी-झोपड़ियों वाले गरीबों के हित में अपना जीवन जी रहे हैं, उन बच्चों को जमीनी स्तर से ऊपर उठ कर जीवन जीने का सपना दिखा रहे और साथ ही उस सपने को पूरा भी करवाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

दिल्ली के साधारण से अध्यापक राम कुमार नजाने कितने ही गरीब बच्चों के जीवन को ज्ञान की रौशनी सी रौशन कर चुके हैं। राम उन बच्चों की पढ़ाते हैं, जो सपना अफसर बनने का देखते हैं, लेकिन उनके पास संसाधनों का अभाव होता है। जो बात सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली है, वो ये है कि राम इन बच्चों से फीस नहीं लेते, यानि कि इन्हें फ्री में पढ़ाते हैं। आज जब शिक्षा एक बिजनेस यानी पैसे कमाने का साधन बन चुकी है वहीं ये शख्स बिना किसी फीस के फ्री में बच्चों को पढ़ा कर दुनिया को नया संदेश दे रहे हैं। राम कुमार द्वारा पढ़ाये हुए छात्र आज यूपीएसी सिविल सर्विस को छोड़ कर देश के लगभग सभी उच्च पदों पर आसीन हैं।

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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले राम कुमार ने गरीबी को अच्छे से देखा था और इसीलिए बचपन से ही वो समाज के लिए कुछ अलग करना चाहते थे। बिहार से अपनी स्कूलिंग और कॉलेज खत्म कर कुछ अच्छा करने की चाह में राम दिल्ली आ गये। सिविल सर्विसेज की तैयारी करने लगे लेकिन एग्जाम के तुरन्त पहले अस्थमा का अटैक पड़ने से परीक्षा छोड़नी पड़ी। उसके बाद से राम ने दिल्ली के गरीब बच्चों को पढ़ना शुरू किया और देखते ही देखते उनकी मेहनत रंग लाने लगी। उनके पढ़ाये बच्चे देश के विभिन्न उच्च पदों पर पहुँचने लगे। राम कुमार कहते हैं, उनके द्वारा निःशुल्क पढ़ाये गये पहले ही बैच के सभी 40 बच्चे किसी न किसी उच्च पद पर है।

स्वभाव से बेहद ही साधारण राम कुमार आज उन बच्चों और उनके परिवारों के लिए एक मसीहा बन चुके हैं। मुंबई के कस्टम विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर आसीन गौरव (जो कि एक समय में राम कुमार के छात्र थे) बताते हैं, कि राम सर उन लोगों में से हैं जो कि अपनी सब परेशानी को भूल कर सिर्फ बच्चों की भलाई के लिए काम करते रहते हैं। सर को अस्थमा होने के कारण सर्दियों में बहुत परेशानी होती है लेकिन वो इन सब परेशानियों की बावजूद भी बच्चो को सुबह उठ कर पढ़ाते थे। उनके अनुसार सिर्फ राम कुमार के कारण ही उन्होंने एक साथ 3-3 सरकारी नौकरियों में चयन पा लिया था वो भी एक अधिकारी के तौर पर। अब गौरव सिविल सर्विस में लगे हुए हैं और अब राम कुमार के सपने को साकार करना चाहते हैं।

राम कुमार के एक और पूर्व छात्र इनकम टैक्स इंस्पेक्टर हिमांशु के अनुसार राम इन्सान के रूप में भगवान का हैं। वो बताते हैं, कि राम सर उनका खर्च तक उठाते थे। एक बार हिमांशु की हालत ऐसी हो गयी थी कि वो सुसाइड तक करने का मन बना चुके थे लेकिन राम की मदद से वो उस हालात पर काबू पा सके और आज ये मुकाम हासिल किया। हिमांशु बताते हैं, कि उनके बैच में ऐसे भी बच्चे थे जो चाय का ठेला लगाते थे और आज अच्छे ओहदे पर आसीन हैं।

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राम कुमार एक और पूर्व छात्र इनकम टैक्स विभाग में ऑडिटर के पद पर कार्यरत अमनदीप बताते हैं, कि दिल्ली के एक स्लम इलाके से निकलकर आज इस पद तक पहुँचने तक का पूरा श्रेय राम सर को जाता है। वो उस इलाके से थे जहाँ लोगों को एक छोटी सी नौकरी के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ती थी, वहां से निकल कर आज इस मुकाम तक पहुंचना बहुत बड़ी बात है।

राम कुमार दिल्ली के संत नगर के परमानन्द नाम की जगह पर अपनी निःशुल्क कोचिंग चलाते हैं, जहाँ पर हर उस गरीब की सहायता की जाती है जो वास्तव में जीवन से कुछ चाहता है। राम के स्टूडेंट्स बताते हैं कि सर कभी किसी से एक रूपये भी नहीं लेते हैं। आज के समय में जहां लोग सांस लेने की भी कीमत वसूल कर लेते हैं, जहां पानी भी पैसों से बिकता है वहा राम कुमार जैसे लोग ज़रूरतमंदों को मुफ्त शिक्षा देकर एक नया समाज गढ़ रहे हैं।

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