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डिस्काउंट ऑफर चाहिए तो क्लिक करें माईडाला

अमरीका के बाद भारत में लौटकर शुरु किया नया बिजनेस। 196 शहरों तक पहुंचा 'माईडाला ' अनीषा ने लिखी माईडाला की सफलता की कहानीबिजनेस करने का सुझाया नया तरीका, लोगों को मिली डिस्काउंट डील्स

24th Apr 2015
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इंटरनेट के विस्तार के साथ ही भारत में ई-कॉमर्स ने काफी तेजी से पैर पसार लिए हैं। एक क्लिक और सामान आपके घर में। शॉपिंग का यह चलन विदेशों में खासा लोकप्रिय है और अब इसकी लोकप्रियता भारत में भी तेजी से बढ़ रही है। भारत में ऑनलाइन ग्राहकों की बढ़ती संख्या बताती है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में संभावनाएं अपार हैं। उद्योग संघ ऐसोचैम ने भी अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है कि देश में ऑनलाइन शॉपिंग का ट्रेंड काफी तेजी से बढ़ रहा है। इस बाजार में अपनी अधिक से अधिक हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न कंपनियों में प्रतिस्पर्धा हो रही है।

माईडाला एक ऐसा ही ऑनलाइन स्टोर है जो बहुत कम समय में बहुत तेजी से उभरा है। माईडाला की शुरुआत अनीषा सिंह ने 2009 में की थी। यह अनीषा की दूसरी कंपनी है लेकिन भारत में शुरू की गई उनकी यह पहली कंपनी है। दिल्ली के एक सिख परिवार में जन्मीं अनीषा की कहानी काफी रोचक है। उनकी पढ़ाई अमेरिका में हुई और क्लिंटन प्रशासन के दौरान उन्होंने महिला उद्यमियों के लिए कार्य किया। इसी दौरान उन्होंने एक सफल उद्यमी बनने के गुर भी सीखे। उसके बाद अनीषा ने खुद की एक कंपनी खोलकर अमेरिकी कंपनियों को डिजीटल कंटेंट उपलब्ध करवाना शुरू किया। इसी दौरान उन्होंने सोचा कि क्यों न कुछ और कार्य भी किया जाए और फिर इसी सोच के साथ सन 2009 में उन्होंने माईडाला की शुरुआत की। तब से लेकर आज तक माईडाला का सफर बहुत ही शानदार व सफल रहा।

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अनीषा पढ़ाई में औसत थीं। उस दौरान उन्होंने भविष्य को लेकर कोई योजना भी नहीं बनाई थी लेकिन उनके एक प्रोफेसर ने अनीषा के अंदर की प्रतिभा देख कर उन्हें एमबीए करने की सलाह दी थी और कहा कि तु्म्हारे अंदर एक सफल उद्यमी बनने के सारे गुण मौजूद हैं। इस बात ने अनीषा को बहुत प्रोत्साहित किया। एमबीए के बाद अनीषा ने बतौर इंटर्न एक नई कंपनी ज्वाइंन की यहां 400 लोग थे। यह कंपनी जूली नाम की एक महिला चला रही थी। जूली से अनीषा को बहुत प्रेरणा मिली उसके बाद उन्होंने तय किया कि वे भी कुछ ऐसा ही करेंगी। कुछ वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने सन 2009 में माईडाला की नींव रखी। माईडाला का मकसद ग्राहकों को बेहतर डील दिलवाना था। इस तरह के प्रयोगों की शुरूआत चीन और अमेरिका में हो चुकी थी। तब अनीषा ने सोचा कि क्यों न भारत में भी ऐसा ही कुछ प्रयोग किया जाए। शुरूआत में उन्हें काफी दिक्कतें आईं। अनीषा का पहला ऑफिस काफी छोटा था, मात्र पांच लोग ही काम पर रखे गए थे। सब कुछ नया था और कुछ भी आसान नहीं था।

2011 में माईडाला को लगभग 47 ई-कॉमर्स कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही थी लेकिन नई-नई तकनीक और क्रिएटिव आइडिया की वजह से माईडाला उन सब में काफी आगे निकल चुकी थी। माईडाला के जरिए लोग विभिन्न सर्विसेज जैसे रेस्टोरेंट, ट्रेवल, फिटनेस, सैलून आदि में बेहतरीन डिस्काउंट डील पा सकते हैं। यहां कुछ डील्स में तो आपको 90 प्रतिशत तक का फायदा हो सकता है।

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मात्र 6 सालों में माईडाला आज जिस मुकाम में पहुंच चुकी है वो किसी चमत्कार से कम नहीं। भारत के 196 शहरों में माईडाला की पहुंच है और लगभग 1 लाख व्यापारी माईडाला से जुड़े हैं। अब तक 200 मिलियन से ज्यादा लोग माईडाला का लाभ उठा चुके हैं। हाल ही में माईडाला ने कई और सर्विसेज में भी डिस्काउंट डील देना शुरू किया है। माईडाला की सबसे बड़ी बात यह है कि इसके 50 प्रतिशत ग्राहक द्वितीय श्रेणी के शहरों से आते हैं और 80 प्रतिशत डील मोबाइल के जरिए होती है।

अनीषा का परिवार उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उनकी दो बेटियां हैं। अनीषा के पति, माता-पिता, सास-ससुर सबने हमेशा उनका हौंसला बढ़ाया और हर दौर में उनके साथ खड़े रहे। भारत में आज भी महिला उद्यमियों की संख्या कम है ऐसे में अनीषा चाहती हैं कि भारत में भी ज्यादा से ज्यादा महिला उद्यमी उभर कर आएं। वे महिलाओं को प्रोत्साहित कर उनके अंदर जोश पैदा करना चाहती हैं। यह सत्य है कि अगर देश की महिलाएं आगे बढ़ेंगी तो देश भी तरक्की करेगा। माईडाला में भी काफी महिला कर्मचारी हैं जिनको अनीषा हर संभव मदद देती हैं।

अनीषा की सफलता का ये सफर तो बस अभी शुरू ही हुआ है लेकिन उनके काम करने की चाहत और हमेशा खुद को बेहतर बनाने की प्रवृति यकीनन उन्हें बिजनेस में काफी आगे ले जाएगी।

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