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वेंचर कैपिटलिस्ट (वीसी) निवेश करने से पहले किसी भी स्टार्टअप में क्या देखते हैं?

Pooja Goel
17th Oct 2015
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अपने उद्यम के प्रारंभिक दौर से गुजर रहे अधिकतर उद्यमियों को मुख्यतः एक जिस सबसे पेचीदा सवाल का सामना करना पड़ता है वह है, ‘‘उद्यम में पूंजी लगाने वाला (वेंचर कैपिटनिस्ट या जिसे वीसी भी कहते हैं) किस चीज की तलाश में है?’’ वे लोग कुछ ऐसा देख रहे हैं जिसका भविष्य में एक बड़ा बाजार हो और इसके अलावा वे एक बेहतरीन टीम के साथ हाथ मिलाने के लिये तत्पर हैं, अमूमन ये वे दो प्रतिक्रियाएं हैं जो अधिकतर वीसी से मिलती हैं। कई उद्यमियों ने मुझे बताया है कि उन्हें यह समझने में अपना काफी समय खर्च करना पड़ा कि इन बातों का भी इतना महत्व है और विशेषकर भविष्य के बड़े बाजार से संबंधित मत को जानने और समझने में। आखिरकार जिस बात का सबसे अधिक महत्व होना चाहिये वह है लाभप्रदता या प्राॅफिटेबिलिटी। आपका क्या मत है?

मैं भी कई वर्षों तक इन्हीं सवालों के जवाब तलाशता रहा और मैं इस मामले में काफी भाग्यशाली रहा कि गूगल, रेडबस और फ्रीचार्ज के साथ अपने कार्यकाल के दौरान मुझे दर्जनों उद्वमियों के साथ बातचीत करने का मौका मिला। व्यापार जगत में जब आपको यह जानने की आवश्यकता हो कि दूसरे कैसे सोचते हैं तो ऐसे में उस व्यक्ति के व्यापार की संरचना को समझने और जानने से बेहतर और कोई विकल्प नहीं हो सकता। ऐसे में विभिन्न वीसी के साथ वार्ताओं के अपने दौर में मैंने उद्यम पूंजी (वीसी) फंड की शक्ति को समझने का प्रयास किया और कुछ बेहतरीन जवाब तलाशने में सफल रहा। इनके आधार पर मैं एक रूपरेखा आपके साथ साझा करना चाहता हूँ कि जब वे संभावित निवेश की खोज में जाते हैं तो उन्हें वास्तव में क्या चाहिये होता है।

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मूलतः ऐसा होता है कि प्रत्येक वीसी फर्म के पास अपने भी कुछ निवेशक होते हैं जिन्हें आमतौर पर एलपी (लिमिटेड पार्टनर्स) कहा जाता है। ये एलपी वीसी फर्म को मुख्यतः 8 से 10 साल की लंबी लेकिन एक निश्चित अवधि के लिये धन उधार देते हैं। इस दौरान वीसी फर्म से उम्मीद की जाती है कि वे अपना धन ऐसे स्टार्टअप्स में निवेश करे जिनके आने वाले समय में मूल्यवान उद्यम बनने की संभावनाएं हों। एक बार निवेश के परिपक्व होने के बाद उम्मीद की जाती है कि वीसी फर्म उन कंपनियों से अपनी हिससेदारी को बेचकर एलपी से उधार ली गई रकम की वापसी करेगी।

स्वाभाविक रूप से ऐसा होता है कि क्योंकि एक लिमिटेड सहयोगी वीसी फर्म को पैसा उधार देता है ऐसे में उसे अपने निवेश के बदले अच्छे फायदे की उम्मीद होती है। ऐसे में वीसी फर्म की उस पैसे को लेकर जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है और वह उचित फायदे के साथ एलपी की रकम को वापस करने के लिये अपनी तरफ से सभी प्रयास करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। आप ऐसी वीसी फर्म की कल्पना करें जो एलपी का पैसा लौटाने में अससमर्थ रहे तो ऐसी स्थिति में क्या होगा? ऐसी फर्म एलपी का विश्वास खो देंगी और भविष्य में एलपी वीसी फर्म में अपना पैसा निवेश करने से बचने लगेंगे।

किसी भी वीसी फर्म से उम्मीद की जाती है कि वह इन 8 से 10 वर्षों में इस निवेश को कम से कम 3 गुना तो कर के लौटाये। लेकिन यह इतना आसान काम नही है। अमरीकी डाॅलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा का अवमूल्यन स्थितियों को और भी विकट बना देता है। नतीजतन इस पैसे को लौटाने की क्षमता वीसी फर्म के अस्तित्व के लिये एक चुनौती बन जाती है।

आपस में समझने के लिये हम एक काल्पनिक फर्म ‘एबीसी कैपिटल’ को ले लेते हैं जो दर्जन भर स्टार्टअप्स में निवेश करने के लिये एलपी से 30 डाॅलर लेती है। अब हम यह मान लेते हैं कि एसीबी कैपिटल 30 स्टार्टअप में इस रकम को (1 डाॅलर प्रति स्टार्टअप) की समान दर से निवेश करती है और इस निवेश के बदले प्रत्येक कंपनी के स्वामित्व में 20 प्रतिशत के भागीदार बन जाते हैं।

जैसे-जैसे समय बीतता है प्रत्येक निवेश के साथ स्थितियां एक सी नहीं होती हैं। कुछ स्टार्टअप प्रारंभिक दौर में ही दम तोड़ देते हैं, कुछ बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद प्रस्तुत करने में विफल रहते हैं और कुछ के संस्थापक आपस में लड़भिड़कर अलग हो जाते हैं और नतीजतन औसतन सभी 30 स्टार्टअप फेल हो जाते हैं।

अगर हम बाजार के पारंपरिक सिद्धांतो के अनुसार आगे बढ़ें तो 65 प्रतिशत निवेश बेकार जाते हैं जिसका सीधा मतलब यह है कि 30 में से 20 स्टार्टअप नतीजा देने में विफल रहते हैं। अगले 20 प्रतिशत बमुश्किल निवेश लौटाने में सफल होते हैं यानी कि 30 में 6 स्टार्टअप सिर्फ निवेश किया पैसा लौटाने में सफल होते हैं। सिर्फ अगले 10 प्रतिशत स्टार्टअप ही एबीसी के निवेश को दस गुना कर पाते हैं यानि कि 30 में से सिर्फ 3 ही 1 डाॅलर की रकम को 10 डाॅलर में बदलने में कामयाब होते हैं। आखिरकार सिर्फ 5 प्रतिशत स्टार्टअप अत्यधिक सफल होने में कामयाब होते हैं जो 50 गुणा तक का मुनाफा देते हैं और 1 डाॅलर के निवेश के बदले 50 डाॅलर लौटाते हैं।

ऐसे में एबीसी कैपिटल का काल्पनिक पोर्टफोलियो कुछ ऐसा दिखेगाः

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अब आता है सबसे दिलचस्प भाग! जब एबीसी कैपिटल ने इन स्टार्टअप्स में निवेश किया था तब किसी को भी यह नहीं मालूम था कि कौन 50 गुणा का मुनाफा कमाकर देगा और कौन निवेश किया गया पैसा लौटाने में भी नाकामयाब रहेगा। अगर इन्हें पहले से ही पता होता तो एसीबी कैपिटल में को संचालित कर रहे व्यक्ति स्वयं ही 50 गुणा लाभ देने वाले निवेश की स्थापना करते। कुल मिलाकर नतीजा यह निकलता है कि प्रत्येक स्टार्टअप औसतन निवेश के सापेक्ष 2.9 गुणा पैसा लौटाता है। ऐसे में आप देख सकते हैं कि इस प्रकार मूल धन की वापसी मुश्किल से ही स्वीकार्यता के स्तर तक पहुंच पा रही है ऐसे में एसीबी कैपिटल एक अच्छी वीसी फर्म बनने की दौड़ से बाहर हो जाएगी।

तो ऐसे में एबीसी कैपिटल को निवेश करते समय यह यकीन होना चाहिये कि प्रत्येक स्टार्टअप 10 गुणा फायदा देगा और इन्हें अपने भाग्य का इतना भी धनी होना होगा कि प्रत्येक स्टार्टअप विशाल वापसी करने में सफल रहे।

किसी भी कंपनी के लिये 250 मिलियन डाॅलर के स्तर तक पहुंचना एक काफी समय लेने वाली प्रक्रिया है जिसमें कम से कम 8 से 10 वर्ष तक लग सकते हैं। एबीसी कैपिटल का संचालन करने वाले वेंचर कैपिटलिस्ट किसी भी स्टार्टअप की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों पर नजर नहीं रख सकते हैं। यह एक व्यापारी का काम है! और 8 से दस साल तक का यह सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा हुआ हो सकता है। ऐसे परिदृश्य में एबीसी कैपिटल व्यवसायी के बारे में तीन सवालों के मायनों में स्वयं को संतुष्ट करना चाहते हैं।

(क) क्या इस टीम के पास मुद्दों से निबटने का कौशल और क्षमता है? आमतौर पर किसी भी स्टार्टअप के लिये प्रारंभिक दौर में ही बेहतरीन प्रतिभाओं को अपने साथ जोड़ना काफी टेढ़ा काम है। संस्थापकों के पास स्टार्टअप के एक सही मायनों में व्यापार में तब्दील होने से पहले उसके संचालन के लिये कौशल और क्षमता होनी चाहिये। उन्हें प्रतिभाओं को अपनी तरफ आकर्षित करने का हुनर आना चाहिये। अगर संस्थापक ऐसा करने में असफल होते हैं तो दुनिया में बहुत ही कम ऐसे लोग हैं जो उनके स्टार्टअप को बचाने में सफल होंगे।

(ख) क्या आपकी टीम बुरे समय से पार पाने में सफल होगी? आप खुद को कभी भी ऐसी कंपनी का हिस्सा बनते हुए नहीं देखना चाहेंगे जिसके संस्थापक बुरे समय में भाग खड़े हों। अगर कोई संस्थापक आगे बढ़ने की प्रेरणा ही खो देता है तो कंपनी निवेशक के लिये बोझ बन जाती है। समय के साथ निवेशकों को ऐसी कंपनी को संचालित करने के लिये अधिक प्रयास करने पड़ते हैं जिसके फलस्वरूप उसका अधिक नुकसान होगा।

(ग) क्या उद्यमी बौद्धिक रूप से ईमानदार है? जब भी आप अपना पैसा किसी को देते हैं इस विशेषता के बारे में सबसे पहले पता करते हैं। आपके निवेश करने के बाद चेक पर हस्ताक्षर करने में सक्षम अधिकारी व्यवसायी बन जाता है जो उस पैसा का प्रयोग कई अन्य स्थानों पर भी कर सकता है। एबीसी कैपिटल उस ऐसी स्थिति में खुद को पाना नहीं चाहेगा जहां व्यवसायी उन्हें धीमी गति से बढ़ते हुए दिखाई दे और उनके लिये बोझ बन जाए।

यह ढांचा उद्यमियों को सोचने के लिये कई बिंदु प्रदान करवाता है। ‘‘क्या बाजार वास्तव में बेहद वृहद है?’’ या फिर ‘‘क्या मेरे पास इसे करने के लिये आवश्यक चीजें हैं?’’ वास्तव में अगर इन सभी सवालों के जवाब नकारात्मक में होते हैं तो इस बात की संभावनाएं काफी कम हें कि उद्यमी कुछ बड़ा करने में सफल रहेगा। हालांकि हो सकता है कि प्रारंभ में एबीसी कैपिटल में बैठे निवेशकों को कुछ समय तक इन सवालों के बदले में मूर्ख बनाया जा सके लेकिन सत्य कभी छिपता नहीं है और अंत में नुकसान में रहने वालों में व्यवसायी ही सबसे आगे रहता है। ऐसे में इस बात पर आश्चर्य नहीं है कि वीसी हमेशा अपने साथ जोड़ने के लिये अच्छी टीमों की तलाश में रहते हैं।

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