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रिटायर्ड शिक्षिका ने 83 से भी ज्यादा बेसहारा परिवारों को दिया घर

ज़रूरतमंदों के लिए 83 से भी ज्यादा घरों का निर्माण करवाने वाली शिक्षिका...

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25th Dec 2017
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जरूरतमंद लोगों की मदद करना हमेशा सुनील के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। एक छात्र के रूप में, वह समुद्र तट पर भीख मांगने वाले बच्चों के लिए हॉस्टल कैंटीन से भोजन प्रदान करती थीं। जब वो नौकरी से रिटायर हुईं तो उन्होंने पक्के घरों के निर्माण के लिए गरीबों के उत्थान में पूरी तरह से खुद को समर्पित करने का फैसला किया। डॉ. सुनील अब तक तिरासी से भी ज्यादा परिवारों के रहने के लिए घर का निर्माण करवा चुकी हैं। उनके व्यापारी पति थॉमस और बेटा प्रिंस उनके अस काम को पूरा समर्थन देते हैं। थॉमस ने दो घरों का पूरा निर्माण भी कराया है...

साभार: रेडिफ

साभार: रेडिफ


डॉ. सुनील सेवानिवृत्त जूलॉजी शिक्षक हैं। वह अपने कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम की प्रभारी भी थीं।

जब वो नौकरी से रिटायर हुईं तो उन्होंने पक्के घरों के निर्माण के लिए गरीबों के उत्थान में पूरी तरह से खुद को समर्पित करने का फैसला किया। 

एक अच्छा शिक्षक वो रोशनी होता है जो पूरे समाज को प्रकाशित करता है। इस कथन को पूरी तरह चरितार्थ कर रही हैं 57 वर्षीय डॉ. एमएस सुनील। डॉ. सुनील सेवानिवृत्त जूलॉजी शिक्षक हैं। वह अपने कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम की प्रभारी भी थीं। डॉ. सुनील अब तक तिरासी से भी ज्यादा परिवारों के रहने के लिए घर का निर्माण करवा चुकी हैं।

2005 की बात है, वो अपनी एक छात्रा आशा से मिलने गईं। एक बड़े से सार्वजनिक मैदान के बीच में, एक अस्थायी प्लास्टिक शेड खड़ा था। यही आशा का घर था। उसके माता-पिता नहीं थे, उसकी दादी ही उसका सब कुछ थीं। शेड में कोई दरवाजा नहीं था। दरवाजे को कवर करने के लिए एक पुराना और पतला दुपट्टा लटकाया गया था। ये सब देखकर डॉ. सुनील की आंखें आंसुओं से भर गईं। उसी वक्त डॉ. सुनील ने आशा को घर बनाकर देने का फैसला किया। उन्होंने परिवार, दोस्तों, शिक्षकों और छात्रों के माध्यम से धन जुटाने की शुरुआत की। एक लाख रुपए में आशा के लिए घर बनकर तैयार हो गया।

आज आशा भी एक शिक्षक के तौर पर काम कर रही है। उसने एक आर्मीमैन से विवाह किया। एक कार भी खरीदी है जिससे वो हर दिन वह स्कूल आती है। उसकी बेटी केन्द्रीय विद्यालय में पढ़ रही है। इन घटनाओं ने न सिर्फ आशा की ज़िंदगी को बदल दिया बल्कि डॉ. सुनील का भी जीवन काफी बदल दिया। तब से लेकर आजतक वो कई परिवारों के लिए पालनहार बन गई हैं।

जरूरतमंद लोगों की मदद करना हमेशा सुनील के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। एक छात्र के रूप में, वह समुद्र तट पर भीख मांगने वाले बच्चों के लिए हॉस्टल कैंटीन से भोजन प्रदान करती थीं। जब वो नौकरी से रिटायर हुईं तो उन्होंने पक्के घरों के निर्माण के लिए गरीबों के उत्थान में पूरी तरह से खुद को समर्पित करने का फैसला किया। उनके पास कोई कार्यात्मक संगठन नहीं है और संसाधन सीमित हैं। वह कुछ मानदंडों पर उन लोगों का चयन करती हैं जिनके आवास बनाने में मदद करनी है। सुनील बताती हैं, हम प्लास्टिक शेड में लड़कियों के बच्चों के साथ रहने वाली विधवाओं को प्राथमिकता देते हैं। ये ऐसी महिलाएं हैं जिनके पास सरकार या संगठनों से कोई सुरक्षा या सहायता नहीं होती। हम बीमारियों, शारीरिक और मानसिक अक्षमता से पीड़ित लोगों के परिवारों को प्राथमिकता देते हैं।

साभार: ट्विटर

साभार: ट्विटर


2005 में एक घर का निर्माण करने का खर्च एक लाख था, आज हर घर का निर्माण कम से कम 2.5 लाख रूपये है। प्रत्येक घर में 450 वर्ग फुट का क्षेत्रफल है और इसमें एक बेडरूम, एक हॉल, रसोईघर, बैठने का क्षेत्र और एक शौचालय है। छत जस्ते-लोहे की शीट से बना है। कुछ परिवारों को बिजली की खपत और लागतों को बचाने के लिए सौर दीपक और एलईडी बल्ब भी उपहार में दिया जाता है। इन घरों का निर्माण करने के लिए औसत समय 30 से 35 दिन लगते हैं। सुनील के इस नेक काम के लिए प्रायोजकों में से कुछ में संयुक्त राज्य अमेरिका के चार परिवार शामिल हैं। लेकिन जब स्पॉन्सर नहीम होते हैं तो सुनील अपने स्वयं के पैसे से घरों का निर्माण करना जारी रखती है। वह न केवल घर के लिए सभी कच्चे माल खुद खरीदती है बल्कि निर्माण की निगरानी भी करती है और हर दिन श्रमिकों को निर्देश देती है।

इन लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए डॉ. सुनील ने उन्हें जीवनयापन के लिए बकरियां भी दी है। आज तक उन्होंने 25 परिवारों को एक-एक बकरी दिया है। हर महीने, वह 50 से अधिक परिवारों को किराने की किट भी प्रदान करती हैं। साथ ही महिलाओं के लिए एक स्व-रोजगार इकाई और वंचित छात्रों के लिए मुफ्त ट्यूशन भी शुरू कर दी है। वह अपने परिवार के विवादों को हल करने के लिए सलाहकार के रूप में भी काम करती हैं और महिलाओं और बच्चों का शोषण करने के लिए कानूनी मार्गदर्शन प्रदान करती है। उनके व्यापारी पति थॉमस और बेटा प्रिंस उनके अस काम को पूरा समर्थन देते हैं। थॉमस ने दो घरों का पूरा निर्माण भी कराया है।

ये भी पढ़ें: आइसक्रीम की दुकान से सालाना 20 करोड़ का बिजनेस खड़ा करने वाले नारायण पुजारी

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