संस्करणों
प्रेरणा

104 साल की कुंवर बाई ने अपनी बकरियां बेचकर घर में बनाया शौचालय, पीएम ने पैर छूकर लिया आशीर्वाद

Ravi Verma
21st Feb 2016
9+ Shares
  • Share Icon
  • Facebook Icon
  • Twitter Icon
  • LinkedIn Icon
  • Reddit Icon
  • WhatsApp Icon
Share on

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की 104 साल की महिला ने अपनी बकरियां बेचकर बनवाया शौचालय....

पीएम के स्वच्छता मिशन से प्रेरित होकर बनवाया शौचालय...

पीएम ने पैर छूकर लिया आशीर्वाद...


कहते हैं जज़्बे के लिए को उम्र नहीं होती। एक बच्चा भी अपने जज़्बे से जंग जीत सकता है और एक उम्रदराज भी। क्या आप यक़ीन करेंगे कि 104 साल की एक महिला में ऐसा जज़्बा है जो देश के बहुत सारे लोगों में नहीं है. आपको हैरानी तब और होगी जब आप जान पाएंगे कि यह उम्रदराज़ महिला ने न कभी टीवी देखा और ही कभी अखबार पढ़ा। नक्सल प्रभावित इलाके में रहने वाली इन महिला ने जो किया वो वाकई बहुत बड़ी बात है। बड़ी इसलिए कि उनके इस कार्य से देश की तमाम महिलाएं और पुरुष सीख ले सकते हैं और खुद को और समाज को बेहतर कर सकते हैं। इन महिला का नाम है कुंवर बाई। कुंवर बाई ने पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान मिशन से प्रेरित होकर अपनी 10 बकरियां बेचकर अपने घर में शौचालय बनवाया। यही नहीं कुंवर बाई शौचालय बनवाने के अभियान के बारे में वो लोगों को भी बताती हैं। इस उम्र में भी वो गांव में घुमकर लोगों को इसके बारे में जानकारी भी दे रही हैं। बात बड़ी है तो इसको उसे बड़े फलक पर कहने की ज़रूरत भी है। 


image


राजनांदगांव ज़िले के नक्सल प्रभावित बरारी गांव की कुंवर बाई ने ज़िंदगी के 104 साल इसी इलाके में काट दिया। शहर क्या चीज़ होती है, कैसा दिखता है- यह उनके लिए सपने जैसा है। लेकिन कहते हैं ज़रूरी नहीं कि अति पिछड़े गांव में रहने वालों की सोच भी वैसी ही हो। इसी को साकार कर दिखाया कुंवर बाई ने। कुंवर बाई बताती हैं, 

"हम जहां रहते हैं, वहां आप लोग आएंगे, तो देखेंगे कि जिंदगी कितनी मुश्किल है। गंगरेल बाँध के बीच टापू की तरह है हमारा बरारी गांव। एक बारिश हो, तो जिंदगी दुनिया से कट गई सी लगती है। पचास साल हो गए मुझे यहां रहते। हम लोगों ने कभी टॉयलेट की जरूरत तो महसूस नहीं की, लेकिन जब घर में बहुएं आईं तो ठीक नहीं लगा। घर के पैसे की जरूरत बकरियों से पूरी होती है। मेरे पास आठ-दस बकरियां थीं। बहुओं, पोतियों और नातिनों को अच्छी जिंदगी और अच्छी सेहत देने बकरियां बेच दीं। उससे मिले 22 हजार रुपयों से दो टॉयलेट बनाए।" 


image


कुंवर बाई बड़े गर्व से बताती हैं, 

"कोई घर में आता, तो उन्हें भी बताती हूँ । देखो, मेरे घर के लोग अब बाहर नहीं जाते, तुम भी बनवाओ। सब लोग पैसों से काबिल नहीं थे, इसलिए टॉयलेट बनाने दूसरों की जो मदद हो सकी, वो भी की। अब हमारे गांव में हर घर में टॉयलेट है।" 


image


असल में छतीसगढ़ के नक्सल प्रभावित राजनांदगांव जिले के कुर्रूभाठ गांव में 21 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरअर्बन मिशन की शुरुआत की। यहाँ आयोजित जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 104 साल की कुंवर बाई के पांव छूकर आशीर्वाद लिया। पीएम मोदी ने मंच पर उन्हें सम्मानित किया और मंच पर मिनटों तक उनकी तारीफ करते रहे। कुंवर बाई के बारे में पीएम ने कहा...

"यहां 104 वर्ष की मां कुंवर बाई का आशीर्वाद पाने का सौभाग्य मिला। देश बदल रहा है। ऐसा लगता है कि दूर दराज के एक गांव की महिला जब स्वच्छ भारत मिशन के सपने को पूरा करने की कोशिशें करती है तब वह हर किसी के लिए, खासतौर पर युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत होती हैं। कुंवर बाई जैसी बुजुर्ग महिला का यह विचार पूरे देश में तेजी से आ रहे बदलाव का प्रतीक है। मैं उन्हें प्रणाम करता हूं। जो लोग अपने आप को नौजवान मानते हैं, वे तय करें कि उनकी सोच भी जवान है क्या ?”


image


मोदी ने मीडिया से अपील की है कि वे भले ही उनका भाषण न दिखाए, लेकिन कुंवर बाई के इस प्रेरणादायक कार्य को जरूर जन-जन तक पहुंचाये । ज़ाहिर है कुंवर बाई इस उम्र में भी जि बातों के लिए लोगों को जागरुक कर रही हैं ऐसे में उनके लिए तमाम विशेषण छोटे हैं। इसलिए कहा जाता है कि कोई भी उम्र से छोटा या बड़ा नहीं होता। मन, मस्तिष्क और मानसिकता से आदमी छोटा बड़ा होता है। कुवंर बाई जैसी उम्र के लिहाज से बुजुर्ग महिला भी मन-मस्तिष्क से सचेतन हो सकती हैं और दुनिया को राह दिखा सकती हैं। ज़रूरत है कुंवर बाई जैसे और लोगों की ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों का भारत हकीकत में दिख सके। 


9+ Shares
  • Share Icon
  • Facebook Icon
  • Twitter Icon
  • LinkedIn Icon
  • Reddit Icon
  • WhatsApp Icon
Share on
Report an issue
Authors

Related Tags

Latest Stories

हमारे दैनिक समाचार पत्र के लिए साइन अप करें