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वायु प्रदूषण से ताजमहल और पर्यावरण को बचाने के लिए छात्रों ने चलाया अभियान

20th Dec 2017
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वायु प्रदूषण सिर्फ दिल्ली भर का मसला नहीं है, आगरा और उत्तर प्रदेश के दूसरे शहर भी जहरीली हवा की चपेट में हैं। वायु प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य के लिये गंभीर खतरा बन चुका है। 

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हर जिले में वायु गुणवत्ता मापन, स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन, कचरा निस्तारण के लिये उत्तम साधन आदि के सवाल पर भी ध्यान देने की जरुरत है। इन चीजों पर ध्यान देकर ही वायु प्रदूषण की समस्या से निजात मिल सकती है।

हमें ज्यादा से ज्यादा सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करना चाहिए, पुराने वाहनों पर रोक लगनी चाहिए और अपने आसपास वायु प्रदूषण को लेकर जागरुकता कार्यक्रम चलाना चाहिए।

पर्यावरण संस्था ग्रीनपीस के नेतृत्व में सिविल सोसाइटी संगठनों ने आगरा में एक साथ मिलकर वायु प्रदूषण के खिलाफ साईकिल रैली निकाल कर जागरुकता अभियान चलाया। इस अभियान में शामिल लोगों ने सरकार से वायु प्रदूषण से निपटने के लिये क्षेत्रीय स्वच्छ वायु कार्ययोजना को लागू करने की मांग की। साईकिल रैली दशहरा घाट पर जाकर खत्म हुई। रैली में करीब 200 छात्रों और अन्य लोगों ने हिस्सा लिया। साईकिल रैली से पहले दो दिन लगातार ताजगंज, महताबगंज, पालीवाल पार्क और शहर के विभिन्न इलाकों में वायु प्रदूषण के खिलाफ संवाद आयोजित किये गए, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं के साथ समाज के अन्य लोग शामिल हुए।

अभियान में शामिल अमृता विद्या सोसाइटी के सचिव अनिल शर्मा ने कहा, 'वायु प्रदूषण सिर्फ दिल्ली भर का मसला नहीं है, आगरा और उत्तर प्रदेश के दूसरे शहर भी जहरीली हवा की चपेट में हैं। वायु प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य के लिये गंभीर खतरा बन चुका है। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए तत्काल कई तरह के व्यवस्थागत निर्णय लेने की जरूरत है, जिसके बदौलत ही प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सकता है। इसलिए राज्य सरकार को तुरंत राज्य स्तर पर कार्ययोजना बनाने की जरूरत है।'

राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के छात्रों ने बड़ी संख्या में साईकिल रैली में भाग लिया। एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी सत्येन्द्र सिंह ने कहा, 'हमारी हवा जहरीली होती चली गयी है। हमें जरुरत है कि एक नागरिक के तौर पर हम वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिये निजी स्तर पर भी प्रयास करें। हमें ज्यादा से ज्यादा सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करना चाहिए, पुराने वाहनों पर रोक लगनी चाहिए और अपने आसपास वायु प्रदूषण को लेकर जागरुकता कार्यक्रम चलाना चाहिए।'

कार्यक्रम में शामिल क्लाइमेट एजेंडा के अभियानकर्ता ओम प्रकाश मिश्र ने कहा, 'उत्तर प्रदेश में प्रदूषण नियंत्रण के लिये मुख्य रुप से एक क्षेत्रीय कार्ययोजना बनाये जाने की जरुरत है। हर जिले में वायु गुणवत्ता मापन, स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन, कचरा निस्तारण के लिये उत्तम साधन आदि के सवाल पर भी ध्यान देने की जरुरत है। इन चीजों पर ध्यान देकर ही वायु प्रदूषण की समस्या से निजात मिल सकती है।'

अभियान के आयोजक ग्रीनपीस कार्यकर्ता अभिषेक चंचल ने कहा, 'उत्तर भारत में वायु प्रदूषण से निपटने के लिये छोटे-मोटे उपाय किये जा रहे हैं जो कि वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या का निदान करने में सक्षम नहीं हैं। जरुरत इस बात की है कि तय समय-सीमा के भीतर व्यवस्थागत और व्यापक कार्य योजना बनाकर इससे निपटा जाये। दिल्ली ने हाल ही में वायु प्रदूषण से निपटने के लिये ग्रेडेड रिस्पॉंस सिस्टम लागू किया है, अब आगरा और उत्तर प्रदेश के दूसरे शहरों में भी इसे लागू करने की तत्काल जरुरत है।'

यह भी पढ़ें: 21 साल की उम्र में इन दो युवाओं ने टीशर्ट बेचकर बनाए 20 करोड़ रुपये

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