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'वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति', राम रहीम के कारनामे

26th Aug 2017
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पिछले दो-तीन दिनो से पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों में जिस तरह हिंसक घटनाएं हो रही हैं, अथवा आसाराम बापू की गिरफ्तारी के दिनों में जैसे सामूहिक तांडव हुए थे।

राम रहीम को रेप का दोषी सुनाए जाने के बाद हिंसा में फूंक दी गई गाड़ी

राम रहीम को रेप का दोषी सुनाए जाने के बाद हिंसा में फूंक दी गई गाड़ी


वैदिकी का अर्थ होता है वेद विज्ञान अथवा वेद विहित अनुशासन। वेद शब्द का अर्थ ज्ञान होता है। देव को ज्ञान का सर्वोच्च स्तर भी कहा गया है। यह कोई अतिशयोक्ति या पक्षपात पूर्ण उक्ति नहीं है। बहुत समझ बूझकर कही गयी प्रामाणिक बात है।

 पंजाब और हरियाणा में भड़की हिंसा के चलते 445 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। उत्तर रेलवे प्रवक्ता ने बताया है कि हिंसा के चलते 485 ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई हैं। पंजाब में मालौत और बल्लुआना रेलवे स्टेशनों पर डेरा प्रमुख के उग्र समर्थकों ने आग लगा दी। 

देश-दुनिया के ताजा परिवेश पर यह बात व्यंग्योक्ति में अक्सर कही, सुनी जाती है, 'वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति'। यद्यपि यह भारतेंदु हरिश्चंद्र लिखित एक नाटक का शीर्षक है। इस प्रहसन में भारतेंदु ने परंपरागत नाट्य शैली में हिंसा पर व्यंग्य किया गया है। नाटक का आरम्भ नांदी के दोहा गायन के साथ होआ है - 'बहु बकरा बलि हित कटैं, जाके बिना प्रमान। सो हरि की माया करै, सब जग को कल्यान' पिछले दो-तीन दिनो से पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों में जिस तरह हिंसक घटनाएं हो रही हैं, अथवा आसाराम बापू की गिरफ्तारी के दिनों में जैसे सामूहिक तांडव हुए थे।

या बाकी कई अप्रिय मौकों पर धर्म और संस्कृति की मनमानी व्याख्या करते हुए जिस तरह आम लोगों को आंदोलित किया जाता रहा है, भारतेंदु जी का व्यंग्य अन्यथा सा नहीं होना चाहिए कि 'वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति'। इस उक्ति का अर्थ निहित स्वार्थ अथवा पूर्वाग्रह के कारण अटपटा निकाल लिया गया है। यज्ञों में पशुओं की हिंसा करते हुए कहा गया कि 'यह हिंसा वेदोक्त है, इसलिए इसमें कोई दोष नहीं है।' यह अर्थ किसी भी प्रकार बुद्धि−विवेक संगत नहीं है। सही अर्थ समझने के लिए पूर्वाग्रहों से हटकर विचार करना आवश्यक है। पहला विचारणीय शब्द है 'वैदिकी'

भौतिकी का अर्थ होता है भौतिक पदार्थों से सम्बद्ध विज्ञान अथवा अनुशासन। नैतिकी का अर्थ होता है नीति विज्ञान या नीतिगत अनुशासन। इसी प्रकार आत्मिकी का अर्थ होता है आत्म विज्ञान अथवा आत्मचेतना से सम्बद्ध अनुशासन। इसी क्रम में वैदिकी का अर्थ होता है वेद विज्ञान अथवा वेद विहित अनुशासन। वेद शब्द का अर्थ ज्ञान होता है। देव को ज्ञान का सर्वोच्च स्तर भी कहा गया है। यह कोई अतिशयोक्ति या पक्षपात पूर्ण उक्ति नहीं है। बहुत समझ बूझकर कही गयी प्रामाणिक बात है।

बात सन 2010 की है। उन दिनो विश्व स्तर पर हिंसा को लेकर बड़े देशों में कुछ गंभीर चर्चाएं छिड़ीं तो विनोद वर्मा ने लिखा- 'वैदिकी हिंसा, हिंसा न भवति' में 'वैदिकी' की जगह 'राजनीति' शब्द का इस्तेमाल करने पर मंत्रिमंडल विचार कर रहा है। इस विचार के समर्थकों का तर्क है कि हत्या, अपहरण और बलात्कार जैसे मामलों के अभियुक्त चुनाव जीत रहे हैं। इसका अर्थ है कि लोग राजनीतिज्ञों की हिंसा को हिंसा नहीं मानते। इसलिए सीआरपीसी में संशोधन करके 'राजनीतिक हिंसा, हिंसा न भवति' को अपना लेना चाहिए। तालेबान की तरह नक्सलियों में भी फ़र्क किया जाए।

अच्छे नक्सलियों से कहा जाए कि वे आदिवासियों की भलाई, ग़रीबी दूर करने और भ्रष्टाचार कम करने में सरकार के साथ काम करें क्योंकि सरकारें तो पिछले कई दशकों से यही कर रही हैं। दलालों और भ्रष्टतम लोगों को माननीय कहना, 40 साल के अधेड़ को युवा कहना, रासलीला की सीडी को झूठा कहना और अख़बारों में पैसे देकर ख़बर छपवाने जैसे छोटे-छोटे अनगिनत विचार फल-फूल रहे हैं।' वर्मा का यह कथन भी एक तरह की व्यंग्योक्ति ही थी, लेकिन प्रकारांतर से राज्य के अनुशासन को उसमें प्रश्नांकित किया गया।

इसी तरह बात हिंसा और कुर्बानी को ध्यान में रखते हुए कही जाए तो देखा जाता है कि बस बहस के लिए ही अब बहस हो रही है, जो अनर्गल और अनुत्पादक है। ठीक है, पेड़ पौधों में भी जान है और मनुष्य में भी जान है, तो क्या मनुष्य भी भोज्य बन जाना चाहिए? कुछ धर्म नरमेध को भी उचित मानते रहे। शुक्र है, अब आख़िरी साँसें ले रहे हैं। किसी भी धर्म को अगर अपने श्रेष्ठ मूल्यों को बचाए रखना है तो उसे समय के साथ आ रही बुराइयों को पहचानना और प्रतिकार भी करना होगा। यह जितना शीघ्र हो जाए, उतना अच्छा।

आज यह कितना दुखद है कि मानवता के बीच की कितनी ही खाइयां धर्मों ने तैयार की हैं - जहां हम अच्छे मित्र हैं, सहपाठी हैं, एक जगह काम करने वाले सहकर्मी हैं, लेकिन धर्म-जाति-सम्प्रदाय के नाम पर परले दर्जे के अहमक बन जाते हैं। आंखों के आगे पर्दा पड़ जाता है। अगर धर्मों का यही उत्स है तो इससे हमे क्या सबक लेना चाहिए।

अब, आइए, बात आजकल की आश्रमवादी हिंसक हालात से रूबरू होते हैं। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम को शुक्रवार दुष्कर्म का दोषी पाए जाने के बाद पंजाब-हरियाणा से लेकर उत्तर प्रदेश से दिल्ली-राजस्थान तक हिंसा भड़क उठी। इसमें 31 लोगों की मौत हो गई और 250 से ज्यादा घायल हुए हैं। हरियाणा सरकार ने पंचकूला के डीसीपी अशोक कुमार को धारा 144 ठीक तरह से लागू न कराने पर निलंबित कर दिया है। 

सबसे ज्यादा खूनखराबा और तोड़फोड़ पंचकूला में हुई, जहां की विशेष सीबीआई अदालत ने ही दोपहर करीब तीन बजे अपना फैसला सुनाया। इसके बाद कोर्ट परिसर के पास में जमा हजारों डेरा समर्थक हिंसा पर उतारू हो गए। उपद्रवियों ने सरकारी वाहनों और इमारतों को निशाना बनाया। शहर में दो लोगों की मौत और 30 से ज्यादा घायल हुए हैं। पंचकूला में हुई हिंसा पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुख जताते हुए लोगों से शांति की अपील की है। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख के छह 'कमांडो' को गिरफ्तार कर लिया गया और उनके पास से हथियार और गोली-बारूद बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक उनके पास से एक पिस्तौल, 25 जिंदा कारतूस, दो पेट्रोल बम और दो वाहन जब्त किए गए। ये डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के ‘कमांडो’ होने का दावा करते हैं।

हरियाणा में बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने एक सुरक्षा समीक्षा बैठक बुलाई है। उन्होंने ताजा हिंसा पर पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से भी बात की है। उधर, सीबीआई की विशेष अदालत के जज जगदीप सिंह को हरियाणा सरकार से पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करने को कहा है। पंजाब और हरियाणा में भड़की हिंसा के चलते 445 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। उत्तर रेलवे प्रवक्ता ने बताया है कि हिंसा के चलते 485 ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई हैं। पंजाब में मालौत और बल्लुआना रेलवे स्टेशनों पर डेरा प्रमुख के उग्र समर्थकों ने आग लगा दी। उधर, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने पंचकूला में हिंसा के दौरान मीडिया पर हुए हमले की निंदा की है।

उन्होंने न्यूज चैनलों को नसीहत भी दी कि वे घबराहट, तनाव और अनुचित डर पैदा करने वाली खबरें दिखाने से परहेज करें। इस बीच केरल के सीएम पी विजयन ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है कि हिंसा के बाद मलयाली लोगों के फोन कॉल आ रहे हैं, जिनमें सुरक्षा को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। केंद्र हिंसा की घटनाओं के पीछे मौजूद लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने प्रधानमंत्री और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से हिंसा रोकने में 'राजधर्म' का पालन करने को कहा है।

इस बीच 'ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन' (बीईए) और 'नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स' (एनयूजे) ने मीडिया कर्मियों पर हमले की निंदा करते हुए हरियाणा, पंजाब की सरकारों से पत्रकारों की सुरक्षा और आजादी सुनिश्चित करने को कहा है। उधर, ऑस्ट्रेलिया, बिट्रेन और कनाडा ने अपने नागरिकों के लिए आकस्मिक एडवाइजरी जारी कर भारत की यात्रा कर रहे अपने नागरिकों को आगे भी हिंसा भड़कने की आशंका जाहिर की है। 

यह भी पढ़ें: बाबाओं के चक्कर में सुलगता भारत, कई राज्यों में हाई अलर्ट

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