71वें स्वतंत्रता दिवस पर भारत को चाहिए पर्यावरण के इन संकटों से आजादी

By yourstory हिन्दी
August 15, 2017, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:16:30 GMT+0000
71वें स्वतंत्रता दिवस पर भारत को चाहिए पर्यावरण के इन संकटों से आजादी
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भारतीय सभ्यता प्रकृति के निकट रहकर ही विकसित हुआ है। नदी, पहाड़, मिट्टी की पूजा हम सदियों से करते आये हैं। महात्मा गांधी से लेकर मेधा पाटकर तक पर्यावरण को बचाने और उसके लिये आवाज उठाने वाले नेताओं की एक लंबी परंपरा हमारे यहां रही है। भारत में चिपको आंदोलन से लेकर नर्मदा बचाओं आंदोलन हुए, जिन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खिंचा है। ऐसे में आज जरुरी है कि हम फिर से प्रकृति और पर्यावरण को बचाने के लिये एक नया आंदोलन छेड़े और पर्यावरण की इन समस्याओं से आजादी पायें...

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भारत आज विश्व शक्ति बनने के सपने देख पा रहा है। लेकिन इन सबके बीच बहुत कुछ है जो हम खो रहे हैं, विकास की अंधी दौड़ में हम नई-नई समस्याएं पैदा कर रहे हैं। हमारे जंगल खत्म हो रहे हैं, हमारी नदी प्रदूषित हो चुकी है, हमारी हवा सांस लेने लायक नहीं बची है, खेत और मिट्टी ज़हरीली हो चुकी है।

देश 71वें स्वतंत्रता दिवस को मना रहा है। एक देश के हिसाब से 70 साल बहुत नहीं होते, लेकिन कम भी नहीं होते। हमारे देश ने इन सालों में हर एक क्षेत्र में नये-नये कीर्तिमान स्थापित किये हैं। विकास की दौड़ में हम सरपट भागे जा रहे हैं। हमारी जीडीपी उबर-खाबर रास्तों पर लगातार बढ़ रही है। देश में एक नया मध्यवर्ग पैदा हुआ है। भारत आज विश्व शक्ति बनने के सपने देख पा रहा है। लेकिन इन सबके बीच बहुत कुछ है जो हम खो रहे हैं, विकास की अंधी दौड़ में हम नई-नई समस्याएं पैदा कर रहे हैं। हमारे जंगल खत्म हो रहे हैं, हमारी नदी प्रदूषित हो चुकी है, हमारी हवा सांस लेने लायक नहीं बची है, खेत और मिट्टी ज़हरीली हो चुकी है।

भारतीय सभ्यता प्रकृति के निकट रहकर ही विकसित हुआ है। नदी, पहाड़, मिट्टी की पूजा हम सदियों से करते आये हैं। महात्मा गांधी से लेकर मेधा पाटकर तक पर्यावरण को बचाने और उसके लिये आवाज उठाने वाले नेताओं की एक लंबी परंपरा हमारे यहां रही है। भारत में चिपको आंदोलन से लेकर नर्मदा बचाओं आंदोलन हुए, जिन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खिंचा है। ऐसे में आज जरुरी है कि हम फिर से प्रकृति और पर्यावरण को बचाने के लिये एक नया आंदोलन छेड़े और पर्यावरण की इन समस्याओं से आजादी पायें..

वायु प्रदूषण से आज़ादी

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 16 लाख लोग हर साल वायु प्रदूषण की वजह से मारे जाते हैं। वायु प्रदूषण आज भारतीयों के लिये स्वास्थ्य संकट बन चुका है। इसे खत्म करने के लिये देश में तत्काल एक राष्ट्रीय पहल की जरुरत है। पूरे देश में राष्ट्रीय मुहिम छेड़ कर और राष्ट्रीय कार्ययोजना बनाकर इस संकट से निपटने की जरुरत है। इसमें उद्योगों और थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाले कार्बन उत्सर्जन के लिये बनाये स्टैंडर्ड मानकों की कड़ाई से पालन करना भी शामिल है। हमारे बच्चों के भविष्य को बचाना है तो हमें इस समस्या से निपटना ही होगा। वायु प्रदूषण से आजादी वक्त की जरुरत है।

गंदे उर्जा स्रोतों से आजादी

अभी भारत में लगभग 70 प्रतिशत ऊर्जा कोयले से पैदा की जाती है। लेकिन अब वक्त आ गया है कि हमें दूसरे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की तरफ ध्यान देना चाहिए। पेरिस जलवायु समझौते में भारत ने 2022 तक 174 गिगावाट अक्षय ऊर्जा हासिल करने का लक्ष्य रखा है। वहीं दूसरी तरफ कोयला जनित ऊर्जा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। आज सोलर की कीमत भारत में 80 प्रतिशत तक कम गया है, जबकि सरकार 30 प्रतिशत की सब्सिडी दे रही है। अपने छतों पर हम सोलर लगाकर कार्बन उत्सर्जन को कम कर सकते हैं और हवा को भी प्रदूषित होने से बचा सकते हैं। सोलर ऊर्जा से हम 40 प्रतिशत तक अपनी बिजली बिल को कम कर सकते हैं।

रसायनिक खेती से आजादी

देश की पूरी खेती रसायनिक कंपनियों की चपेट में है। सरकार रासायनिक कंपनियों को हजारों करोड़ की सब्सिडी दे रही है। रसायनों के प्रयोग से न सिर्फ हमारी मिट्टी प्रदूषित और बर्बाद हो रही है बल्कि इसका बुरा प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। हमारा भोजन सुरक्षित नहीं रह गया है। किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। इन समस्याओं से निपटने के लिये हमें रसायनिक खेती से आजादी लेनी ही होगी और जैविक खेती को अपनाना होगा। सरकार को जैविक खेती के लिये अलग से सब्सिडी का प्रावधान करना होगा। हालांकि बहुत से राज्यों ने जैविक खेती के लिये अलग से नीतियां भी बनाने की दिशा में पहल करना शुरू भी कर दिया है। हमें फर्टिलाइजर कंपनियों को सब्सिडी देना भी बंद करना होगा। बदलते जलवायु परिवर्तन की स्थिति में सुरक्षित भोजन के लिये हमें नये वैज्ञानिक शोधों को बढ़ावा देना होगा और उसे वैकल्पिक कृषि नीतियों पर फोकस करना होगा।

डीजल वाहनों और ट्रैफिक की समस्या से आजादी

हमारे देश में ऑटोमोबईल सेक्टर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। एक नजरीये से देखा जाये तो यह देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था का संकेत हो सकता है लेकिन दूसरी तरफ कारों के अत्यधिक इस्तेमाल ने शहरों की हवा को खराब कर दिया है, वहीं ट्रैफिक सिस्टम भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। कारों के इस्तेमाल की एक बड़ी वजह सार्वजनिक परिवहन सिस्टम का अच्छा न होना भी है। अगर शहरों में सार्वजनिक परिवहन को ठीक किया जाये और उसे ज्यादा तेज, सुविधाजनक और सुरक्षित बनाया जाये तो इस समस्या से निपटा जा सकता है।

जीएम फसलों से आजादी

भारत में एक बड़ा धड़ा सरसो फसलों में जीएम लाने की तैयारी कर रही है। इससे पहले बीटी कॉटन को देश के खेतों में पहुंचा दिया गया है। इसका नतीजा है कि आज कपास की खेती करने वाले किसानों की आर्थिक हालत खराब है और कपास की खेती करने वाले किसानों की आत्महत्या की खबरें आती ही रहती हैं। जानकारों की माने तो सरसो में जीएम की अनुमति देने का मतलब होगा दूसरे फसलों में भी जीएम के लिये दरवाजा खोलना। पहले से ही प्रदूषित भोजन, कृषि संकट से जूझ रहे देश के लिये जीएम को अपनाना एक नये संकट को जन्म देने जैसा होगा।

कचरे से आजादी

हर दिन हम बहुत बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करते हैं और उसे अपने पड़ोस में फेंक देते हैं धीरे-धीरे ये कचरा हमारी मिट्टी और सागर को गंदा करते हैं। अगर हम चाहें तो कचरे का उचित प्रबंधन करके इससे खाद और बिजली बना सकते हैं। देश के हर नागरिक को यह जिम्मेदारी लेनी होगी, सरकार व नगर निगमों को ऐसी व्यवस्था करनी होगी जिससे जैविक पदार्थों को अलग करके रखा जा सके और उसका इस्तेमाल खाद के रूप में मिट्टी को स्वस्थ्य बनाने के लिये किया जा सके। इससे न सिर्फ हमारी मिट्टी अच्छी होगी, बल्कि देश के किसानों की स्थिति में भी सुधार होगा और शहर की सड़कें कचरामुक्त बन पायेंगे।

70 साल पहले भारत ने अंग्रेजों से आजादी पायी थी, अब वक्त है कि हम अपने जीवन, देश और लोगों को एक सुरक्षित, भयमुक्त वातावरण मुहैया करायें। पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन एक बड़ी समस्या है, जिससे पूरी दुनिया जूझ रही है। क्या हम जलवायु परिवर्तन के संकटों से निपटने के लिये आजादी की इस मुहिम को शुरू करने के लिये तैयार हैं!

-प्रीति, 

GreenPeace India

(गेस्ट अॉथर)