लॉकडाउन के दौरान चलाई गई श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में अब तक 21 बच्चों का जन्म हुआ: रिपोर्ट

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नयी दिल्ली, श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू होने के बाद से ट्रेनों में 21 बच्चों का जन्म हो चुका है। यह जानकारी अधिकारियों ने दी।


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सांकेतिक चित्र (फोटो साभार: ShutterStock)


ममता यादव आठ मई को गुजरात के जामनगर से एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार हुई थीं। वह अकेले सफर कर रही थीं। हालांकि बिहार में गंतव्य स्टेशन पर उतरने पर उनकी गोद में उनकी बच्ची थी। ममता ने ट्रेन में बच्ची को जन्म दिया।


ममता बहुत मुश्किल समय में ट्रेन में सवार हुई थीं, उनके पति नगर में एक कारखाने में काम करते थे और लॉकडाउन के चलते उनकी नौकरी चली गई। वह गर्भावस्था के अंतिम दौर में थी और उनका घर सैकड़ों किलोमीटर दूर था।


उन्होंने कड़ा फैसला लेते हुए आठ मई को जामनगर-मुजफ्फरपुर श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार होने का निर्णय किया ताकि वह जब अपने बच्चे को जन्म दें तो वह बिहार के छपरा जिले में स्थित अपने गांव में अपनी मां के पास हों।


अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन रात आठ बजे जामनगर स्टेशन से रवाना हुई। 35 वर्षीय ममता को मध्यरात्रि में प्रसव पीड़ा होने लगी।


रेलवे ने यद्यपि कहा था कि ट्रेन बीच में कहीं नहीं रुकेगी लेकिन इस ट्रेन को आगरा फोर्ट स्टेशन पर रोका गया ताकि ममता को चिकित्सकीय देखभाल मुहैया करायी जा सके।


अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन में सवार रेल कर्मचारियों ने ट्रेन से ही आगरा फोर्ट स्टेशन पर चिकित्सकों को जानकारी दे दी थी। ट्रेन सुबह साढ़े चार बजे स्टेशन पहुंची।



अधिकारियों ने बताया कि ममता की बोगी को प्रसव कक्ष में तब्दील कर दिया गया और अन्य यात्री बाहर चले गए थे। रेलवे कर्मचरियों ने चिकित्सकों की टीम के साथ ममता की देखरेख की और ममता ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।


रेलवे के प्रवक्ता आर डी बाजपेयी ने कहा,

‘‘चिकित्सकीय आपात स्थिति से निपटने के लिए हमारे पास एक सुदृढ़ व्यवस्था है। जब भी किसी यात्री को मदद की जरुरत होती है, ट्रेन में चल रहे हमारे कर्मी उस स्टेशन को अलर्ट कर देते हैं जहां चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध होती है। स्टेशन के पास रेलवे कालोनियों में रहने वाले चिकित्सक हमेशा ही मदद के लिए उपलब्ध रहते हैं।’’

अधिकारियों ने कहा कि ममता को उसके बच्चे के साथ यात्रा जारी रखने दिया गया।


13 मई को पिंकी यादव ने अहमदाबाद-फैजाबाद श्रमिक स्पेशल ट्रेन में आरपीएफ कर्मियों की सहायता से बच्चे को जन्म दिया। कानपुर में उसे चिकित्सकीय देखभाल मुहैया करायी गई। हालांकि उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।


अधिकारियों ने बताया कि रेलवे ने अभी तक करीब 2050 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलायी हैं। ट्रेनों में सबसे अधिक सात बच्चों का जन्म पश्चिम मध्य रेलवे में हुआ है। वहीं तीन-तीन बच्चों के जन्म दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे में हुए हैं। मध्य रेलवे में दो ऐसे बच्चों का जन्म हुआ है। वहीं पूर्व मध्य रेलवे, उत्तर रेलवे, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे, दक्षिण मध्य रेलवे, उत्तर पूर्व रेलवे और पश्चिम रेलवे में एक-एक बच्चे का जन्म हुआ है।


(Edited by रविकांत पारीक)

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