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रिटायर प्रोफेसर ने डिजाइन की ऐसी लिफ्ट जो बिना बिजली के सह सकती है 200 किलो का वजन

नौकरी से रिटायर होने के बाद प्रोफेसर ने तैयार की अनोखी लिफ्ट...

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27th Apr 2018
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 अधिकतर लोग रिटायरमेंट के बाद आराम की जिंदगी गुजारने के बारे में सोचते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो अपनी नौकरी के बाद की बची बाकी जिंदगी लोगों का सपना पूरा करने में लगा देते हैं। प्रोफेसर डॉ. विजयन ऐसे ही लोगों में से हैं।

प्रोफेसर विजयन

प्रोफेसर विजयन


अगर बिजली न भी रहे तो यह लिफ्ट काम कर सकती है। यह लिफ्ट कंप्रेशर के सहारे चलती है और कंप्रेशर में एयर होती है। प्रोफेसर को इसे तैयार करने में 6 महीने लग गए। 

आपने अपने रिटायरमेंट के बारे में क्या सोचा है? क्या करेंगे आप अपनी नौकरी से रिटायर होने के बाद, अपने घर के कोने में झूला लगवाएंगे और उस पर बैठकर किताबें पढ़ेंगे, अपने दोस्तों, रिश्तेदार या परिवार के साथ समय बिताएंगे या अपनी मनमर्जी कुछ भी करेंगे। अधिकतर लोग रिटायरमेंट के बाद कुछ ऐसे ही जिंदगी गुजारने के बारे में सोचते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो अपनी नौकरी के बाद की बची बाकी जिंदगी लोगों का सपना पूरा करने में लगा देते हैं। प्रोफेसर डॉ. विजयन ऐसे ही लोगों में से हैं।

प्रोफेसर विजयन कॉलेज में बच्चों को पढ़ाने के बाद रिटायर हो चुके हैं। लेकिन रिटायरमेंट के बाद भी उनके अंदर का इंजीनियर रिटायर नहीं हुआ था। उन्होंने एक कंप्रेशर की मदद से चलने वाली लिफ्ट तैयार कर दी। यह लिफ्ट दो मंजिल तक 200 किलोग्राम का वजन ले जा सकती है। इस लिफ्ट की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यह बिना बिजली के भी चल सकती है। मशीन के कंप्रेशर में जब तक एयर रहेगी यह मशीन काम करती रहेगी।

इस अनोखी लिफ्ट को तैयार करने वाले प्रोफेसर डॉ. विजयन ने एएनआई से बात करते हुए कहा, 'अगर बिजली न भी रहे तो यह लिफ्ट काम कर सकती है। यह लिफ्ट कंप्रेशर के सहारे चलती है और कंप्रेशर में एयर होती है।' प्रोफेसर को इसे तैयार करने में 6 महीने लग गए। इस लिफ्ट को बनाने के पीछे मकसद के बारे में बात करते हुए प्रोफेसर ने बताया कि उनका घर पहली मंजिल पर है और कई वृद्ध-बुजुर्ग लोगों को घर पहुंचने में मुश्किल होती थी। कई बार पानी के कैंटर भी चढ़ाने में पसीने छूट जाते थे। लेकिन इस लिफ्ट की मदद से लोगों को तो आसानी होगी ही, साथ ही उनके घर के काम भी आसान हो जाएंगे।

यह भी पढ़ें: दुनिया के पहले सोलर कोऑपरेटिव मॉडल ने बदल दिया गुजरात का गांव, किसानों की जिंदगी बनी खुशहाल

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