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अपने सपनों को पूरा करने के लिए नौकरी को अलविदा कहने वाले ये दमदार युवा

24th Oct 2017
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हर स्नातक की मूल ख्वाहिश नौकरी पाना होता है लेकिन कुछ स्नातकों के सपनें किसी कारणवश अधूरे रह जाते है या पूरे नहीं कर पाते है। जिसकी वजह से उनके सपने टूट जाते हैं। 

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कुछ लोग अपने विश्वास को और सशक्त बनाने के लिए कॉर्पोरेट नौकरियों को हमेशा के लिए अलविदा कह देते हैं और अपने सपनों को पूरे करने के लिए आगे बढ़ जाते हैं।

जुनून एक ऐसी चीज है जो लोगों को जीवन में महान उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कुछ भी करा सकती है। यदि आपके मन में कुछ कर गुजरने की इच्छा है तो पूरी दुनिया आपके आगे छोटी है और दुनिया आपका घर है।

भारत के टॉप इंजिनियरिंग एंड मैनेजमेंट स्कूल शिक्षा के साथ साथ लोगों को एक अच्छी जॉब की भी गारंटी देते हैं। वो देश के हर कोने में नौकरी उपलब्ध कराने की गारंटी देते है। आईआईटी और आईआईएम के स्नातकों ने अच्छे और बेहतरीन ऑफर्स का चुनाव किया है। ऐसे बेहतरीन ऑफर्स को पाकर लोगों में कॉफिडेन्स आता है साथ ही वो अपने आपको दूसरो की अपेक्षा कम नहीं समझते है।

हर स्नातक की मूल ख्वाहिश नौकरी पाना होता है लेकिन कुछ स्नातकों के सपनें किसी कारणवश अधूरे रह जाते है या पूरे नहीं कर पाते है। जिसकी वजह से उनके सपने टूट जाते हैं। कुछ लोग अपने विश्वास को और सशक्त बनाने के लिए कॉर्पोरेट नौकरियों को हमेशा के लिए अलविदा कह देते हैं और अपने सपनों को पूरे करने के लिए आगे बढ़ जाते हैं।

आइए जानते है कुछ ऐसे ही लोगों के बारे में-

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स्वाति कौशल

स्वाति कौशल ने कोलकाता के आईआईएम से शिक्षा प्राप्त की उसके बाद उन्होंने कार्पोरेट सैक्टर में जॉब की। स्वाति को बुक लिखने का शौक था जिसके लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। लेखन के लिए उनका जुनून इतना मजबूत था कि उन्होंने नौकरी और बुक में बुक को चुना। कौशल ने तब से तीन पुस्तकें लिखी हैं- ए पीस ऑफ केक, ए गर्ल लाइक मी और ड्रॉप डेड।

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शुजाजित पायने

पैन ने फाइनेन्स और मार्केटिंग की डिग्री लखनऊ के आईआईएम के प्राप्त की। पैन ने लंदन में आईबीएम को अपने चार साल दिए। बहरहाल, पैन के अंदर अपने गांव के लोगों को सशक्त बनाने एक झनझनाहट हुई जो उनको भारत वापस लौटा लाई। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के यूथ फॉर इंडिया प्रोग्राम के समर्थन के साथ पैन ने मूल प्रशिक्षण प्राप्त किया जिसके बाद उनकी पोस्टिंग महाराष्ट्र के वर्धा जिले में की गई। उन्होंने ग्रामीणों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए एक एनजीओ स्थापित किया और बड़े पैमाने पर काम किया।

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मुनाफ कपाड़िया

मुनाफ कपाडिया ने मुंबई के नर्सरी मोनजी से एमबीए करके गुगल कंपनी में नौकरी की। उस दौरान वो अपनी मां से कुछ दूरी महसूस कर रहे थे। उनकी मां भी बोरियत महसूस करती थी। उसके बाद कपाडिया ने अपने आपको व्यस्त रखने के लिए बोहरी रसोई शुरू की। इस रसोई को शुरू करने के पीछे लोगों को स्वादिस्ट भोजन और लोगों को मां के हाथ का प्यार देना था। यह बिजनेस महज दो साल पुराना है और यहां सात तरह का भोजन मिलता है। यहां का खाना रानी मुखर्जी, फराह खान, आशुतोष गोवारीकर , हुमा कुरैशी द्वारा पसंद किया जाता है।

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निहार रंजन

निहार रंजन ने आईआईटी खरगपुर से स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी। इसके बाद उन्होंने मल्टीनैशनल कंपनी इंडिया एंड यूएस में जॉब की। रंजन ने ओडिशा को बेहतरीन और सुव्यवस्था के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी। इस साल निहार रंजन ने दुमका ग्राम पंचायत के पंचायत समिति के सदस्य के लिए अपना नाम के प्रस्ताव के लिए अपना नाम दिया है। रंजन अपने गांव में एक दूध की डेयरी लगाना चाहते हैं जहां लोगों को शुद्ध और सस्ता दूध मिल सके।

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अभिषेक सिंघानिया

2012 में सिंघानिया ने आईआईटी मद्रास से स्नातक की डिग्री प्राप्त की और मुंबई के प्राइसवाटरहाउस कूपर्स को जॉइन किया। उसके बाद, एक प्रॉजैक्ट के लिए सिंघानिया 6 महीने के लिए सउदी अरब चला गया। उसने कृषि के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी और खेती करने लगा। खेती-बाड़ी के लिए उसने देश के कोने कोने में यात्रा की और किसानों की मदद की। सिंघानिया ने इस तरह से प्राकृतिक खेती के बारे में सीखा। अब वो कोलकाता के पास के एक गांव में रहता है और काम करता है।

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अंकिता कुमावत

अंकिता कुमावत ने कोलकाता के आईआईएम संस्थान के पोस्ट ग्रैजएसन की। उसने अपनी नौकरी छोड़कर अजमेर की एक डेयरी किसान का काम किया। अंकिता ने अपने पिता की मदद के लिए अपनी नौकरी दाव पर लगा दी। अंकिता के पिता ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर डेयरी कारोबार शुरू किया था। अंकिता अब मातृतव डेयरी और ऑर्गेनिक फूड कंपनी चलाती है। जो लोगों को शुद्ध और बिना मिलावटी फूड उपलब्ध कराती है।

जुनून एक ऐसी चीज है जो लोगों को जीवन में महान उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए कुछ भी करा सकती है। यदि आपके मन में कुछ कर गुजरने की इच्छा है तो पूरी दुनिया आपके आगे छोटी है और दुनिया आपका घर है।

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