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छोटे किसानों के लिए संजीवनी बूटी है 'कमल किसान'

- छोटे किसानों के लिए बनाए कृषि उपकरण।- सबसे पहले अपना प्रोडक्ट 'राइस ट्रांसप्लांटर' लॉच किया।- सन 2015 तक 50 हजार किसानों तक पहुंचना है कमल किसान का लक्ष्य।

12th Oct 2016
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भारत कृषि प्रधान देश है यहां की कुछ आबादी का हमेशा से एक बड़ा हिस्सा कृषि पर ही निर्भर रहा है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भारत में कृषि की स्थिति ठीक नहीं रही है और धीरे-धीरे कृषि ने भारत में बैकसीट ले ली है। कई किसानों ने भी खेती को छोड़कर अन्य विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से किसानों के लिए अब खेती करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे समय में अगर कोई पढ़ा लिखा युवा इस क्षेत्र में आए और अपने प्रयासों से किसानों की मदद करे तो सच में उसका यह प्रयास बहुत ही सराहनीय है। ऐसी ही एक युवा हैं देवी मूर्ति जिन्होंने 'कमल किसान' नाम की एक कंपनी शुरू की और उस कंपनी के माध्यम से देवी मूर्ति ने किसानों को छोटी मशीने बना कर दीं जोकि खेती के दौरान उन्हें काफी मदद दे रही हैं।

देवी मूर्ति ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और उसके बाद बतौर प्रोडक्ट मैनेजर मैटल शीट के निर्माण में लग गईं। बाद में देवी मूर्ति ने आईआईएम बैंगलूरु से मास्टर्स इन एंटरप्रन्योरशिप की पढ़ाई की।

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देवी अपने प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर अर्जित किए हुए अनुभव को व्यर्थ नहीं होने देना चाहती थीं। वे खुद कोई अपना काम शुरु करना चाहती थीं इसी दौरान उनके एक मित्र ने उन्हें खेती के उपकरण बनाने की सलाह दी। देवी को यह सलाह पसंद भी आई लेकिन वे किसी प्रकार का जोखिम भी नहीं लेना चाहती थीं इसीलिए उन्होंने दो साल रिसर्च की। वे किसानों से मिलीं और कई स्थानों का दौरा किया। अपनी इस रिसर्च में देवी ने पाया की किसानों को सच में खेती के लिए नए आधुनिक उपकरणों की जरूरत है।

खेती में लगे लोगों की संख्या लगातार कम हो रही थी जिसका सीधा असर पैदावार पर हो रहा था। किसानों के पास बड़ी मशीनों को खरीदने के पैसे नहीं थे इसलिए वे खुद ही मेहनत कर रहे थे यह देख देवी ने महसूस किया कि यदि वे किसानों की इन उपकरणों के माध्यम से मदद कर पाई तो किसानों की जिंदगी थोड़ी आसान हो सकती है साथ ही पैदावार भी बढ़ेगी जो किसानों और देश के लिए अच्छा संकेत होगा।

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देवी ने सन 2012 में 'कमल किसान' की नीव रखी। कमल किसान छोटे किसानों के लिए खेती में प्रयोग होने वाले उपकरण बनाकर देता है। इन उपकरणों की मदद से किसानों का काम आसान हो गया। यह उपकरण इसने सरल हैं कि किसान आसान से इनका इस्तेमाल कर अपनी मेहनत और समय बचा सकते हैं। साथ ही उत्पाद की लागत कीमत को भी कम कर सकते हैं।

बाजार में जो बड़ी मशीने किसानों के लिए हैं वो छोटे किसानों के लिए उपयुक्त नहीं हैं क्योंकि इनके पास ज्यादा बड़े खेत नहीं होते इसलिए छोटे किसानों के लिए उन मशीनों का प्रयोग करना बेहद महंगा सौदा भी है। छोटे किसानों को ऐसी मशीनों की जरूरत थी जो उनके छोटे-छोटे कार्यों को करने में मददगार हों, प्रयोग में आसान हों और साथ ही महंगा सौदा भी न हों। देवी ने कमल किसान के जरिए ऐसी ही मशीने किसानों को मुहैया कराईं। कमल किसान फ्रैंचाइज़ी बेस्ड मॉडल पर काम करता है। कमल किसान ने विभिन्न सेंटर्स बनाए, एक्सटेंशन ऑफिस बनाए और विभिन्न ग्रुप्स का निर्माण किया ताकि हर किसान तक पहुंचा जा सके और उस तक सेवाएं पहुंच सकें। कमल किसान को आईआईटी मद्रास के रूलर टेकनोलॉजी और बिजनेस सेंटर ने पांच लाख रुपए का सीड फंड दिया है।

कमल किसान चार लोगों की एक टीम है और उन्होंने सबसे पहले अपना प्रोडक्ट 'राइस ट्रांसप्लांटर' लॉच किया उसके बाद कई और मशीनों पर काम चल रहा है तो कई लांच हो चुकी हैं।

देवी बताती हैं कि किसानों को मशीनो के प्रयोग के लिए मनाना काफी कठिन कार्य है क्योंकि किसानों को मशीनों पर भरोसा नहीं होता ऐसे में देवी को काफी दिक्कत आती है लेकिन वे और उनकी टीम प्रयास में लगी रहती हैं और किसानों की शंकाओं का समाधान करती हैं उन्हें बताती हैं कि किस तरह इनके प्रयोग से वे लोग आसानी से अपनी पैदावार बढ़ा सकते हैं। देवी ज्यादातर समय ऑफिस से दूर किसानोंं के साथ खेतों में ही बिताती हैं। वे बताती हैं कि जो किसान उनकी मशीनों को एक बार इस्तेमाल कर लेता है वो खुद ही लोगों को उस मशीन के फायदे के बारे में बताता है। कंपनी का लक्ष्य सन 2015 तक 50 हजार किसानों तक पहुंचना है।

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