संस्करणों
विविध

'जिस घर शौचालय नहीं उस घर शादी नहीं', UP में एक गांव का सराहनीय कदम

22nd Aug 2017
Add to
Shares
245
Comments
Share This
Add to
Shares
245
Comments
Share

खुले में शौच से मुक्त करने के लिए पंचायत का फैसला काफी हद तक कारगर साबित होगा। खुले में शौच जाने से गंदगी फैलती है, जिससे तरह-तरह की बीमारियां जन्म लेती हैं।

सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार: सोशल मीडिया)


पंचायत में ग्रामीणों ने फैसला किया कि जिस घर में शौचालय नहीं होगा, उस घर में ब्रह्मणपुट्ठी गांव का कोई भी नागरिक अपनी बेटी की शादी नहीं करेगा।

प्राइमरी स्कूल में हुई इस पंचायत में ग्राम प्रधान सहित गांव भर के लोगों ने अपनी राय दी। महिलाएं, स्कूली छात्राएं भी भारी मात्रा में पंचायत में शामिल हुईं।

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के ब्रह्मपुट्ठी गांव के लोगों ने 'स्वच्छ भारत मिशन' के तहत एक सराहनीय कदम उठाया है। ग्रामीणो ने पंचायत कर खुले में शौच न करने की कसम खाई है। पंचायत में ग्रामीणों ने फैसला किया कि जिस घर में शौचालय नहीं होगा उस घर में ब्रह्मणपुट्ठी गांव का कोई भी नागरिक अपनी बेटी की शादी नहीं करेगा। जिस घर में शौचालय नहीं है, उस घर में आज के बाद ब्रह्मणपुट्ठी गांव से बारात नहीं जाएगी।

पंचायत के इस फैसले के बाद गांव की महिलाएं और बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। खुले में शौच से मुक्त करने के लिए पंचायत का फैसला काफी हद तक कारगर साबित होगा। खुले में शौच जाने से गंदगी फैलती है, जिससे तरह-तरह की बीमारियां जन्म लेती हैं। पहली बार बागपत की पंचायत ने कोई सराहनीय कदम उठाया है, वरना यहां की पंचायतें अक्सर उलूल-जुलूल फरमानों को लेकर चार्चाओं में रहती हैं।

गांव वालों के लिए गर्व का क्षण

ग्रामीण अब केन्द्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन को समझ गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि खुले में शौच जाने से कीटाणु पैदा होते हैं, गांव में गंदगी फैलती है, जिससे तरह-तरह की बीमारियां जन्म लेती हैं। गांव की एक महिला मुन शर्मा ने बताया, 'हमारे गांव ब्रह्मणपुट्टी सभी ग्रामवासियों और प्रधानजी ने ये निर्णय लिया है कि हम अपने बच्चों की शादी ऐसे घर में करेंगे, जहां पर शौचालय हो। इससे हम औरतों को काफी ठीक रहेगा वरना बहुत दिक्कत होती है।'

सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय

पंचायत का आयोजन बागपत कोतवाली के आदर्श गांव ब्रह्मणपुट्ठी मे किया गया था। प्राइमरी स्कूल में हुई इस पंचायत में ग्राम प्रधान सहित गांव भर के लोगों ने अपनी राय दी। महिलाएं, स्कूली छात्राएं भी भारी मात्रा में पंचायत में शामिल हुई थीं। पंचायत का आयोजन ग्राम प्रधान की ओर से किया गया था। काफी विचार करने के बाद ग्रामीणों ने शौचालय न होने वाले गांव में बेटी का रिश्ता न करने का निर्णय लिया। इस निर्णय के बाद मिलने वाली तारीफों से पूरे गांव में खुशी का माहौल है

खुले में शौच मतलब बीमारियों को निमंत्रण

हिन्दुस्तान में 60 करोड़ लोग खुले में शौच करते है। इससे न सिर्फ वातावरण प्रदूषित होता है बल्कि सैकड़ों तरह की बीमारियां भी फैलती है। सर्वेक्षण में यह बात भी सामने आई है कि खुले में शौच जाने की वजह से बच्चों का शारीरिक ग्रोथ कम हो रहा है। खुले में किया गया शौच किसी न किसी तरीके से घूम-फिरकर व्यक्ति के खाने-पीने में शामिल हो जाता है। इससे कई तरह की बीमारियां होती है। बीमारियों का ईलाज समय पर न हो पाने की वजह से असामयिक मृत्यु भी होती है। डायरिया, पीलिया, पोलियो जैसी बीमारियों का प्रमुख कारण गंदगी और खुले में शौच करना है। डायरिया से देश में प्रतिवर्ष सवा दो लाख बच्चे मौत के मुंह में समा जाते है। डायरिया का प्रमुख कारण प्रदूषित जल का सेवन है।

खुले में शौच को बोलें न बाबा न

जिस दिन लोग खुले में शौच करने के दुष्परिणाम के बारे में जान जायेंगे उस दिन अपने आप इस आदत से तौबा कर लेंगे। लोग जानते है कि यह आदत खराब है फिर भी करते है। कई लोगों को खुले में शौच जाना आनंददायक लगता है। घर में शौचालय न बनवाना और उसका उपयोग न करना सिर्फ बहानेबाजी है। खुले में शौच से जल की गुणवत्ता खत्म हो जाती है और यह पीने के लायक नहीं रहता। इससे बीमारियां होने की भी संभावनाएं ज्यादा होती हैं। 

यह भी पढ़ें: दो दोस्तों ने मिलकर बनाई मीट कंपनी, अब हर महीने कमाते हैं 3 करोड़

Add to
Shares
245
Comments
Share This
Add to
Shares
245
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags