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हौसला बुलंद हो, तो कामयाबी कदम चूमेगी

ऐसे बनें एक सफल आंत्रेप्रेन्योर...

जय प्रकाश जय
14th Jul 2017
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जमाने को तरक्की की ऐसी हवा लगी है कि बिजनेसमैन बनने या कहें तो स्टार्टअप शुरू करके आंत्रेप्रेन्योर बनने के लिए बैंक और कंपनियां खुद-ब-खुद दरवाजे पर दस्तक देने लगी हैं। अब इतने पर भी कोई होश न संभाले और अपने कदमों की पहुंच कामयाब मंजिल तक न आजमाना चाहे तो भला कोई क्या कर सकता है। 

फोटो साभार: Shutterstock

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समय ऐसा है, कि स्टार्टअप के लिए तमाम संभावनाएं सामने खड़ी हैं। बस जरूरत है तो ऐसे गोल सेट करने की जो आपको स्ट्रेच करें, ऐसी चीजें करने के लिए आपको प्रोत्साहित करें, जिसे अभी तक आपने कभी नहीं किया है।

ई-कॉमर्स की परिघटना पिछले पांच साल में काफी लोकप्रिय हुई है। इसमें भी स्टार्टअप निर्यात इकाइयों के लिए बड़ा अवसर सामने है कि वे मार्केट प्लेस के दिग्गज खिलाड़ियों जैसे ईबे, अमेजॉन और अलीबाबा आदि के जरिए तेजी से बढ़ते बी2सी ई-कॉमर्स के एक हिस्से पर अपना अधिकार कर सकें। भारत में बी2सी ई-कॉमर्स बिक्री 25.5 अरब डॉलर की है। यद्यपि अभी भारत के कुल खुदरा कारोबार में भारतीय ऑनलाइन रिटेल का स्थान एक फीसदी से भी कम है।

यदि आप आंत्रेप्रेन्योर हैं, अथवा अपने छोटे से बिजनेस को बड़ा बनाना चाहते हैं और आपको लाखों का फंड चाहिए तो कूरियर कंपनी फेडेक्स है न, आपकी मदद के लिए। वह आपको अपने बिजनेस आइडिया के लिए 15 लाख रुपए तक देने को तैयार बैठी है। यद्यपि राशि पाने के लिए कुछ शर्तों पर अमल करना जरूरी होगा। फेडेक्स की ओर से स्‍मॉल बिजनेस ग्रांट कॉन्‍टेस्‍ट इंडिया में शिरकत कर अपनी बिजनेस स्‍टोरी सब्मिट करने वाले ऐसे ही दस विनर कॉन्‍टेस्‍टेंट्स को बुलावा आ चुका है। 31 मई से लेकर 17 जून के बीच सेलेक्‍ट हुए इन टॉप 10 आंत्रेप्रेन्योर्स को ईमेल के जरिए इंटरव्‍यू के लिए बुलाकर उन्हें एक तय राशि दी गई।

आज स्टार्टअप के लिए तमाम संभावनाएं सामने खड़ी हैं। बस जरूरत है तो ऐसे गोल सेट करने की जो आपको स्ट्रेच करें, ऐसी चीजें करने के लिए अपने आप को प्रोत्साहित करें, जिसे अभी तक आपने कभी नहीं किया है। मसलन, देखिए कि आज ई-कॉमर्स का असर वैश्विक कारोबार तंत्र में तेजी से बदलाव ला रहा है। ई-कॉमर्स की परिघटना पिछले पांच साल में काफी लोकप्रिय हुई है। इसमें भी स्टार्टअप निर्यात इकाइयों के लिए बड़ा अवसर सामने है कि वे मार्केट प्लेस के दिग्गज खिलाड़ियों जैसे ईबे, अमेज़न और अलीबाबा आदि के जरिए तेजी से बढ़ते बी2सी ई-कॉमर्स के एक हिस्से पर अपना अधिकार कर सकें। भारत में बी2सी ई-कॉमर्स बिक्री 25.5 अरब डॉलर की है। यद्यपि अभी भारत के कुल खुदरा कारोबार में भारतीय ऑनलाइन रिटेल का स्थान एक फीसदी से भी कम है, क्योंकि भारत ई-कॉमर्स अवसरों का पूरा लाभ नहीं उठा रहा है।

इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की बढ़ती संख्या, कारोबार से उपभोक्ता तक वस्तुओं एवं सेवाओं की तेजी सी बढ़ती खरीद एवं बिक्री की वजह से ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय व्यापार काफी फल-फूल रहा है। इसमें स्टार्टअप से सीधा लाभ मिल सकता है। फिलहाल ई-कॉमर्स निर्यात की स्थितियों और चुनौतियों और अवसरों को समझने की सख्त जरूरत है।

ई-चौपाल एक तरह की ऐसी क्रांति है जिसने किसानों की जिंदगी में रिफॉर्म का काम किया। यहाँ किसानों को बाजार की कीमतें व मौसम के बारे में मिली जानकारी ने उन्हें उनकी खेती की पूरी कीमत दिलाई। किसानों के साथ कॉर्पोरेट कंपनियों से जुड़कर अच्छा खासा वेतन तो प्राप्त कर सकते ही हैं, एंटरप्रेन्योर के तौर पर सीधा किसानों के साथ जुड़कर फल-सब्जी आदि के रिटेलर्स के तौर पर सीधे कमाई कर सकते हैं।

इसी तरह ग्रामीण भारत में साइंटिस्ट, इंजीनियर्स, एमबीए, बैंकर, मैन्युफैक्चरर, ट्रेडर एग्रीकल्चर मैनेजर, रूरल मैनेजर व आंत्रेप्रेन्योर जैसे कई करियर अवसर हैं। गाँवों के विकास से जुड़ी सभी योजनाओं की देख-रेख एग्रीकल्चर मैनेजर करते हैं। गाँवों के विकास के लिए शोध अध्ययन, वहाँ की जलवायु के अनुरूप किसानों को खेती संबंधित नई-नई जानकारी देना, नई तकनीक से परिचित कराना तथा लघु एवं कुटीर उद्योगों का भविष्य तलाशना आदि इनका कार्यक्षेत्र है। गौरतलब है कि ई-चौपाल ने एग्रीकल्चर सेक्टर में क्वालिफाइड प्रोफेशनल्स की माँग को बहुत गति दी है। ई-चौपाल एक तरह की ऐसी क्रांति है जिसने किसानों की जिंदगी में रिफॉर्म का काम किया। यहाँ किसानों को बाजार की कीमतें व मौसम के बारे में मिली जानकारी ने उन्हें उनकी खेती की पूरी कीमत दिलाई। किसानों के साथ कॉर्पोरेट कंपनियों से जुड़कर अच्छा खासा वेतन तो प्राप्त कर सकते ही हैं, आंत्रेप्रेन्योर के तौर पर सीधा किसानों के साथ जुड़कर फल-सब्जी आदि के रिटेलर्स के तौर पर सीधे कमाई कर सकते हैं। प्राइवेट सेक्टर बैंक रूरल क्षेत्रों में अपने को फैला रहे हैं। इससे भी एग्रीकल्चर मैनेजमेंट के जानकारों के लिए रोजगार और कारोबार, दोनों के अवसर बढ़ रहे हैं।

एक जगह कार्तिक नटराजन लिखते हैं कि वैसे तो मैं जाने कहां-कहां घूम आया लेकिन कहीं मन नही लगा। इच्छा थी ऊँची उड़ान भरने की। आखिरकार मंजिल मिल ही गई डॉ.क्रिस्चियन स्त्रेडिक पर। नटराजन ने किसानों की समस्याओं को अपनी समस्या समझते हुए उनको एक प्लेटफार्म दिया, जिससे कृषि व्यवसाय को आसानी से आगे बढ़ाया जा सके। उनके मन में फार्मिली शुरू करने का विचार आया। जैसा कि नाम से जाहिर है फार्मिली दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है खेती, किसान और उससे जुड़े हर व्यक्ति का एक परिवार। इसे हम आज की भाषा में ई-कॉमर्स अथवा एग्रीकल्चर ई-कॉमर्स कहते हैं। फार्मिली वो प्लेटफार्म है, जहाँ किसानों और उनकी फसल और उत्पादों के खरीददारों को एक ही स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया है, जिसके जरिए एक किसान अपनी फसल को घर बैठे आसानी से बिना मंडी में गए बेच सकता है और खरीददार अपनी जरुरत के हिसाब से आसानी से खरीद सकता है।

अब सवाल उठता है कि इस काम को कैसे किया जाए। आज से 10 साल पहले किसी ने यह नहीं सोचा होगा कि एक छोटा-सा मोबाइल इतना स्मार्ट हो जायेगा की गाँव में रहने वाला किसान मोबाइल के जरिये घर बैठे अपने उत्पाद या फसल को आसानी से सीधा ग्राहक को अच्छे दामों में बेच सकेगा। फार्मिली सोशल मीडिया का ही वह रूप है जिससे किसानों, ग्राहकों, बागवानी करने वालों और मछुआरों को एक साथ जोड़ने का काम कर रहा है। 

कृषि और किसान को डिजिटलाईज करने के लिए फार्मिली एक वेबसाइट के रूप में पुल का काम कर रहा है। जिस पर किसान अपने खेत में खड़ी फसल के फोटो खींचकर सीधे वेबसाइट पर पूरी जानकारी और मांगने के साथ-साथ वेबसाइट पर अपलोड भी कर सकता है। वेबसाइट से जिस ग्राहक या खरीददार को वो फसल पसंद आएगी वो उस किसान से सीधा संपर्क कर सकता है। इसके अलावा दूसरे किसानों के साथ अपनी जानकारी भी शेयर कर सकता है। इस तरह फार्मिली भविष्य में किसानों और कृषि से जुड़े हर व्यक्ति के लिए एक बड़ा प्लेटफार्म बनकर सामने आ रहा है। इस तरह के स्टार्टअप की भी आज पर्याप्त संभावनाए हैं। बस, ज़रा-सा तकनीकी होने और हिम्मत के साथ दिमाग बड़ा करने की जरूरत है।

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