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10वीं पास इस शख़्स ने खड़ी की 3,250 करोड़ रुपए की कंपनी, 18 साल की उम्र से कर रहा बिज़नेस

2,500 रुपए में की थी शुरूआत, आज कंपनी का टर्नओवर है 3,250 करोड़ रुपए...

29th Mar 2018
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आपने विजय सेल्स का नाम तो सुना ही होगा? जिन्हें नहीं पता, उन्हें बता दें कि इस कंपनी के भारत के विभिन्न शहरों में कुल 76 स्टोर्स हैं। यह तो हुआ सफलता का आंकड़ा, लेकिन इस उपलब्धि को अपनी मेहनत से गढ़ने वाली शख़्सियत के बारे में भी जानना ज़रूरी है। हम बात कर रहे हैं विजय सेल्स के चेयरमैन और फ़ाउंडर, 75 वर्षीय, नानू गुप्ता की। आईये जानें नानू गुप्ता के बारे में विस्तार से... 

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मुंबई, दिल्ली, एनसीआर, पुणे, अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा को मिलाकर विजय सेल्स ने पूरे देश में कुल 76 स्टोर्स खोल रखे हैं। विजय सेल्स की रीटेल स्टोर चेन से कुल 1,900 कर्मचारी जुड़े हुए हैं और नानू गुप्ता सभी को अपना परिवार ही मानते हैं। कंपनी की कोशिश रहती है कि हर साल 3-4 नए स्टोर्स खोले जाएं।

न तो मेहनत की कोई सीमा होती है और न ही उससे मिलने वाली सफलता की। दोनों ही को किसी दायरे में नहीं समेटा जा सकता। इंसान लक्ष्य साधकर मेहनत करता है और वक़्त के साथ-साथ सफलता किसी न किसी रूप में उसके कदम से कदम मिलाकर चलती है। आपने विजय सेल्स का नाम तो सुना ही होगा? जिन्हें नहीं पता, उन्हें बता दें कि इस कंपनी के भारत के विभिन्न शहरों में कुल 76 स्टोर्स हैं। यह तो हुआ सफलता का आंकड़ा, लेकिन इस उपलब्धि को अपनी मेहनत से गढ़ने वाली शख़्सियत के बारे में भी जानना ज़रूरी है। हम बात कर रहे हैं विजय सेल्स के चेयरमैन और फ़ाउंडर, 75 वर्षीय, नानू गुप्ता की। 1967 में सिर्फ़ 2,500 रुपए से उन्होंने अपनी ऑन्त्रेप्रेन्योर लाइफ़ की शुरुआत की थी और आज उनकी कंपनी का टर्नओवर 3,250 करोड़ रुपए (2016-17 वित्तीय वर्ष) तक पहुंच चुका है।

मुंबई, दिल्ली, एनसीआर, पुणे, अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा को मिलाकर विजय सेल्स ने पूरे देश में कुल 76 स्टोर्स खोल रखे हैं। विजय सेल्स की रीटेल स्टोर चेन से कुल 1,900 कर्मचारी जुड़े हुए हैं और नानू गुप्ता सभी को अपना परिवार ही मानते हैं। कंपनी की कोशिश रहती है कि हर साल 3-4 नए स्टोर्स खोले जाएं।

कहां से हुई शुरूआत?

आपको बता दें कि 2017-18 में विजय सेल्स का टर्नओवर 3,700 करोड़ रुपयों तक पहुंचने की संभावना है और इतनी बड़ी कंपनी का मालिक सिर्फ़ 10वीं पास है। ज़ाहिर है कि नानू गुप्ता ने सब कुछ अपने हौसलों और आत्मविश्वास से ही बनाया है। हरियाणा के छोटे से गांव कैथल में पैदा हुए और एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले नानू गुप्ता ने 18 साल की उम्र में ही काम की तलाश में घर छोड़ दिया था। 1954 में वह मुंबई आए थे और अपने एक चचेरे भाई की डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए सेल्समैन का काम करते थे। लगभग एक दशक तक काम सीखने के बाद उन्होंने 1967 में मुंबई के माटुंगा में एक किराए की दुकान से अपने स्टोर की शुरूआत की। नानू अपने भाई विजय को बहुत पसंद करते थे इसलिए उन्होंने स्टोर का नाम अपने भाई के नाम पर ही रखा। उन्होंने सिलाई मशीन, पंखे और ट्रांज़िस्टर की रीटेलिंग से शुरूआत की। 1975 में उन्होंने माहिम में अपनी दुकान ख़रीद ली और एक साल बाद ही कंपनी रजिस्टर करवा ली।

एक प्रोग्राम में नानू गुप्ता

एक प्रोग्राम में नानू गुप्ता


अलहदा सोच से पाए मुकाम

1986 में जब विजय सेल्स ने बांद्रा में अपना पहला बड़ा स्टोर खोला, तब ऐसे लार्ज-फ़ॉर्मेट स्टोर्स का प्रचलन नहीं था और लोगों को लगा कि इसकी ज़रूरत नहीं थी। ख़ैर, नानू गुप्ता औरों से अलग और दूर की सोचते थे। वह चाहते थे कि विजय सेल्स के प्रोडक्ट्स की पूरी रेंज, ग्राहकों के सामने ठीक तरह से डिस्प्ले हो। डिस्प्ले स्टोर्स का यह फ़ंडा काम कर गया और सेल बढ़ गई। 1993-94 तक विजय सेल्स ने ऐसे ही दो बड़े डिस्प्ले स्टोर्स और खोल लिए। मुंबई में ग्राहकों के लिए डिस्प्ले कॉन्सेप्ट की शुरुआत करने वाला विजय सेल्स पहला था। सेल बढ़ती गई और विजय सेल्स के स्टोर्स भी।

2007 में आई बड़ी चुनौती

2007 तक रीटेलिंग बिज़नेस बिल्कुल नए स्वरूप ले चुका था और तेज़ी से बढ़ रहा था। इस दौरान ही टाटा, रिलायंस और फ़्यूचर ग्रुप्स ने क्रोमा और रिलायंस स्टोर्स जैसे बड़े डिजिटल-इलेक्ट्रॉनिक स्टोर्स खोलने शुरू कर दिए। इन स्टोर्स ने मल्टी ब्रैंड प्रोडक्ट्स को एक ही छत के नीचे लाने की शुरूआत की। इस वक़्त तक मुंबई में विजय सेल्स के 14 स्टोर्स खुल चुके थे।

नानू गुप्ता के बेटे निलेश गुप्ता और आशीष गुप्ता

नानू गुप्ता के बेटे निलेश गुप्ता और आशीष गुप्ता


मार्केट में विजय सेल्स के लिए चुनौतियां बढ़ने लगीं और कंपनी के पास ब्रैंड को बेचने के प्रस्ताव आने लगे। मार्केट विशेषज्ञों को लगने लगा कि अब विजय सेल्स मार्केट में टिक नहीं पाएगा। हर मुद्दे की तरह, इस मुद्दे पर भी नानू गुप्ता आम लोगों से अलग सोच रखते थे। उनका मानना था कि आपकी मेहनत, आपसे कोई नहीं छीन सकता। उनका कहना था कि अगर आप कड़ी मेहनत करते हैं और ग्राहकों का ख़्याल रखते हैं तो आपका नाम और आपके ग्राहक, कोई नहीं छीन सकता। उदाहरण के तौर पर जब ईएमआई सिस्टम मार्केट में प्रचलित नहीं था, तब से ही नानू अपने ग्राहकों को क़िश्तों में क़ीमत चुकाने की सुविधा दे रहे हैं। ग्राहकों की सहूलियत को प्राथमिकता देने वाले नानू गुप्ता को उनके ग्राहकों ने कभी निराश नहीं किया।

नानू की जुदा सोच एकबार फिर सभी के क़यासों पर भारी पड़ी और विजय सेल्स के स्टोर्स दूसरे शहरों जैसे कि पुणे, सूरत, दिल्ली और अहमदाबाद में भी खुल गए। 2007 के बाद से ही विजय सेल्स ने लैपटॉप और मोबाइल जैसे डिजिटल प्रोडक्ट्स अपने स्टोर्स पर रखने शुरू किए।

ये भी पढ़ें: स्टार्टअप में अब आए नौकरियों की बहार के दिन

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