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‘सेल्फी’ खींचें, हेयर और स्किन के बारे में घर बैठे 'MyDermacy' से सलाह लें.

MyDermacy (माईडरमेसी) पर चैट के जरिये तस्वीर भेजें और त्वचा विशेषज्ञों से परामर्श लेंफिलहाल इनके नेटवर्क में 150 से अधिक डरमेटोलाॅजिस्ट उपलब्ध हैं जो रोगियों को दे रहे हैं परामर्शबीते तीन महीनों में प्रतिमाह करीब 1 लाख लोगों के सवालों का जवाब दे चुका है यह वर्चुअल क्लीनिक

12th Aug 2015
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सुनकर यकीन नहीं होता लेकिन सिर्फ एक छोटी सी लगने वाली खुजली के चलते अंकित खुराना ने MyDermacy (माईडरमेसी) की नींव रखी।

अंकित बताते हैं, ‘‘मैं यात्रा करने का बहुत अधिक शौकीन था और इतना आलसी था कि कोई परेशानी होने पर त्वचा विशेषज्ञ (Dermatologist) के पास जाने से बचने की कोशिश करता था। ऐसी ही एक यात्रा के दौरान मुझे अहसास हुआ कि मुझे पैरों में मोजे पहनने से होने वाले चकत्ते (Dermatitis) की परेशानी हो रही है और मैंने खुद से कहा, ‘काश ऐसा हो पाता कि मैं इसकी तस्वीर खींचकर डाॅक्टर को भेज सकता और उसकी राय ले पाता।’’

आज अंकित की इसी सोच के ऊपर काम करते हुए दिल्ली स्थित स्टार्टअप MyDermacy (माईडरमेसी) खुद को एक ऐसे मंच के रूप में स्थापित कर रहा है जहां ‘‘लोग अपनी त्वचा और बालों से संबंधित दिक्कतों से संबंधित मदद सिर्फ एक ‘सेल्फी’ खींचकर पा सकते हैं।’’

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इसके संस्थापकों ने त्वचा विज्ञान (Dermatology) को इसलिये चुना क्योंकि ओहियो की प्रसिद्ध केस वेस्टर्न यूनिवर्सिटी से जैव चिकित्सा में स्नातक कर चुके अंकित त्वचा की देखभाल से संबंधित दुनिया में लगभग एक दशक से भी अधिक का अनुभव रखते थे और इस वजह से वे कई त्वचा रोग विशेषज्ञों के संपर्क में थे। वहीं दूसरी तरफ कोलंबिया बिजनेस स्कूल से स्नातक कर चुके कुबेर व्यवसाय प्रबंधन के लिये अति आवश्यक कौशल को लेकर आए।

वर्ष 2013 में अंकित और उनसे सहसंस्थापक और सीटीओ कुबेर शर्मा ने माईडरमेसी को शुरू करने का फैसला किया और प्रारंभ में उनका इरादा इसे एक ऐसी ई-काॅमर्स वेबसाइट के रूप में स्थापित करने का था जहां उच्च स्तर पर त्वचा, केश और यौन स्वास्थ्य संबंधी उत्पाद उपलब्ध हों।

पारिस्थितिकी तंत्र में मौजूद अन्य स्टार्टअप की तरह इन्होंने भी समय के साथ अपने दृष्टिकोंण में परिवर्तन लाते हुए इसे एक आॅनलाइन त्वचा क्लीनिक का रूप देने का फैसला किया।

अंकित कहते हैं, ‘‘हम प्रारंभ में ई-काॅमर्स वेबसाइट को लेकर काफी उत्साहित थे लेकिन बाद में हमें महसूस हुआ कि त्वचा संबंधी सलाह का एक बहुत बड़ा बाजार है और अगर हम जल्द ही इसे शुरू करने में कामयाब रहे तो हम भारत में ऐसा करने वाले सबसे पहले लोग हो सकते हैं।’’

और इसस तरह मई 2015 में कुछ लाख रुपयों के निवेष के साथ इन्होंने अपने इस चैट आधारित परामर्श मंच का शुभारंभ किया।

स्किन केयर उद्योग से जुड़ी फ्रोस्ट एंड सुल्लिवेन की वर्ष 2014 में प्रकाशित रिपोर्ट में वर्ष 2015 के अंत तक भारतवर्ष में करीब 19 करोड़ लोगों के त्वचा संबंधी विकारों से पीडि़त होने का अनुमान जताया गया है। यह रिपोर्ट यह भी बताती है कि स्किनकेयर के क्षेत्र में जर्बदस्त वृद्धि देखने को मिली है और आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र नए खिलाडि़यों के लिये संभावित निवेश का एक बेहतरीन क्षेत्र बनकर उभरने के अनुमान हैं।

इसके अलावा यह रिपोर्ट यह भी साफ करती है कि समूचे भारतवर्ष में सिर्फ 7 हजार डरमेटोलाॅजिस्ट कार्यरत हैं। इसका सीधा मतलब है कि अमरीका में जहां प्रति लाख लोगों पर 3.2 डरमेटोलाॅजिस्ट उपलब्ध हैं वहीं दूसरी तरफ भारत में सिर्फ 0.49 ही उपलब्ध हैं।

भारत में माईडरमेसी इस अंतर को पाटने के भरकस प्रयास कर रहा है। यह अनूठा वर्चुअल स्किन क्लीनिक जिसके नेटवर्क में अब 150 से भी अधिक डरमेटोलाॅजिस्ट मौजूद हैं अब एक अतुल्यकारी चैट पर त्वचा, केश और यौन स्वास्थ से संबंधित वालों का जवाब प्रदान कर रहे हैं।

इस मंच पर मौजूद डरमेटोलाॅजिस्ट अपने अनुभव के आधार पर 300 रुपयों से लेकर 1000 रुपये तक वसूलते हैं। यह मंच जो वल्र्ड बिजनेस एक्सीलरेटर का एक हिस्सा है बीते तीन महीनों में प्रतिमाह लगभग 1 लाख अनूठे मरीजों के प्रश्नों का जवाब दे रहा है और इनमें से लगभग 90 प्रतिशत भारतीय हैं।

अंकित कहते हैं, ‘‘इस मंच के लिये कोई भी सवाल अजीब नहीं है क्योंकि यह मंच सिर्फ इसीलिये है ताकि लोग अपनी बीतारियों के बारे में खुलकर बात कर सकें लेकिन कई बार ऐसे सवाल आ जाते हैं जिन्हें पढ़कर हम हंसे बिना नहीं रह पाते। हम लगातार कई अजीब तहर के सवालों से रूबरू होते रहते हैं जैसे ‘कल मेरी शादी है और मेरे चेहरे पर एक मुहांसा है, मुझे क्या करना चाहिये?’ या फिर ‘मैं जल्द ही शादी करने का इरादा कर रहा हूँ और मेरे जननांगों पर एक मस्सा है, क्या मैं आपको उनकी एक तस्वीर भे सकता हूँ? कृपया मेरी सहायता कीजिये।’’

एक तरफ जहां दूसरे वर्चुअल अस्पताल वीडियो परामर्श की सुविधा उपलब्ध करवा रहे हैं अंकित को नहीं लगता कि इससे कोई बहुत बड़ा फर्क पड़ता है।

अंकित आगे कहते हैं, ‘‘हमें वीडियो की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती है क्योंकि त्वचा से संबंधित चिकित्सक त्वचा की स्थितियों की छवियों के साथ प्रशिक्षित होते हैं। सिर्फ टेली-रेडियोलाॅज और टेली-डर्मेटोलाॅजी आराम से ‘स्टोर एंड फारवर्ड’ प्रणाली को अपना सकते हैं जबकि दूसरे क्षेत्रों में दूसरी राय के लिये टेली-मेडिसन का इस्तेमाल किया जा सकता है।’’

‘स्टोर एंड फारवर्ड’ प्रणाली में चिकित्सा जानकारी के लिये डिजिटल छवियों, दस्तावेजों और पहले से रिकाॅर्ड किये हुए वीडियो की आवश्यकता होती है जिन्हें ई-मेल, एसएमएस या अन्य चैट एप्लीकेशनों की सहायता से इनतक पहुंचाया जा सकता है।

त्वचा विशेषज्ञों से परामर्श उपलब्ध करवाने के अलावा माईडरमेसी चिकित्सकों को चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में नित-नई हो रही प्रगति से भी अवगत करवाता रहता है और अगर कोई मरीज त्वचा विज्ञान से संबंधित चिकित्सालयों के बारे में जानकारी चाहता है तो उसके लिये ऐसे क्लिनिकों की एक पूरी सूची भी उपलब्ध है।

अंकित कहते हैं, ‘‘भारत में मौजूद दर्जनों अन्य वर्चुअल क्लीनिकों और माईडरमेसी में सबसे बुनियादी और मुख्य अंतर यही है कि हमारा पूरा पारिस्थितिकि तंत्र त्वचा विज्ञान और सौंदर्य की देखभाल के लिये समर्पित है। मारा मंच डाॅक्टरों और रोगियों के बीच वार्तालाप करवाने के अलावा चिकित्सकों और तकनीक प्रदाताओं के बीच सांमंजस्य बनाने और सेवा प्रदाताओं और विभिन्न ब्रांडों के बीच बातचीत की सुविधा भी उपलब्ध करवाता है।’’

यह मंच विभिन्न कार्यक्षेत्रों से संबंधित चिकित्सकों से विचार-विमर्श की सुविधा उपलब्ध करवाने वाले मंचों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है जिनमें से प्रमुख Lybrate, iCliniq, HealthcareMagic, AskADoctor, HealthEMinds, MediAngels, HelpingDoc और Practo हैं। ऐसी भी अफवाहें हैं कि जल्द ही प्रैक्टो भी आॅनलाइन परामर्श के क्षेत्र में पांव रखने वाली है।

हालांकि माईडरमेसी को केवल आधा दर्जन के करीब वैश्विक प्रतिस्पर्धियों से स्पर्धा करनी पड़ रही है जिनमें मुख्य रूप से FirstDerm, Klara, Dermatologistoncall.com और RealSelf शामिल हैं।

जहां तक भविष्य की योजनाओं की बात है तो अंकित और कुबेर का इरादा आने वाले समय में त्वचा विज्ञान और यौन स्वास्थ्य को लेकर सामान्य जागरुकता को जगाते हुए अपने इस मंच के माध्यम ये देश के छोटे शहरों के लोगों को भी आॅनलाइन समाधान देने की है।

अंकित कहते हैं, ‘‘जब छोटे शहरों के लोग हमसे अपने आस-पास में स्थित डरमेटोलाॅजिस्ट के बारे में जानकारी मांगते हैं तो हमें उन्हें उनके शहर से 150 किलोमीटर दूर के चिकित्सालय के बारे में बताने में बेहद संकोच होता है और ऐसे में हम उन्हें संबंधित चिकित्सालय या व्यक्ति का फोन नंबर दे देते हैं। हमारा प्रयास है कि जल्द ही हम व्यक्तिगत रूप से ऐसे लोगों को डाॅक्टर उपलब्ध करवा सकें।’’

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