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अच्छी ख़ासी नौकरी छोड़कर नईम अख्तर ने शुरू किया मुस्लिम फैशन का ई-कॉमर्स स्टार्टअप...'मुबारक डील्स'

नईम अख्तर को शुरू से ही व्यापार में नाम कमाने की इच्छा थी, लेकिन वे माता पिता की अनुमति न मिलने के कारण ऐसा नहीं कर सके थे, लेकिन अब वे अपने लिए क्या अच्छा है इसका निर्णय लेने की स्थिति में हैं यही कारण है कि उन्होंने नौकरी छोड़कर कारोबार में कदम रखा है।

F M SALEEM
21st Jul 2016
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जिन्हें कारोबार कर अपने पैरों पर खड़ा होने और दूसरों के लिए रोज़गार प्रदान करने की ख़्वाहिश हो, भला उनका दिल नौकरियों में कैसे लगेगा। वहाँ नौकरी का अनुभव तो मिलता है, लेकिन वे स्थायी रूप से नौकरी करना पसंद नहीं करते। बीजापुर में पले-बढ़े और उत्तरी कर्नाटक के विभिन्न शहरों में नौकरी कर प्रारंभिक जीवन जी चुके नईम अख्तर भी ऐसे ही लोगों में से एक हैं, जिन्हें अपनी सफलता की मंजिलें अपने निजी व्यवसाय में लगाने का शौक है। उन्होंने ऐसा किया भी। उन्होंने मुस्लिम फैशन को समर्पित एक ई-कॉमर्स वेबसाइट शुरू की है।

नईम बताते हैं,

'भारत के 17 करोड़ मुसलमानों के साथ-साथ दुनिया के विभिन्न देशों में फैले मुसलमानों में अपनी तरह के फैशन की चीजों की मांग बढ़ती जा रही है, लेकिन दुनिया में करोड़ों रुपये के व्यापार का यह क्षेत्र आज भी असंगठित है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मुबारक डील्स के द्वारा इस विशेष बाज़ार में कदम रखा है।'
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नईम अख्तर ने अपने जीवन की शुरुआत एमबीए करने के बाद बजाज एलाईन्ज़ में नौकरी से की। एक कार्यकारी के रूप में उन्होंने काम शुरू किया और बाद में एनएसएमएसएल, एचडीएफसी और सन एडीसन जैसी कंपनियों में काम किया। उन्होंने प्रबंधक तक पद यात्रा की। वह बताते हैं,

'सन एडीसन में काम करते हुए मैंने बाज़ार के बारे में खूब जानकारी ली। यहाँ काम करने के लिए पर्याप्त स्वतंत्रता थी और अपना बाज़ार की खोज खुद ही करना था। यहीं पर मुझे लगा कि अब अपना सपना साकार करने के लिए निकल पड़ना चाहिए। स्नैप डील और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों के बारे में पढ़ता रहा। मुझे ख्याल आया कि क्यों न ऐसा मंच तैयार किया जाए, जहाँ मुस्लिम फैशन की सारी बातें कर रहे हैं और फिर कुछ दोस्तों के साथ मैं खुश डील्स शुरू की।'

नईम कहते हैं ई-कॉमर्स में मुस्लिम परिवारों के लिए अपनी पसंद के कपड़े कम ही हैं। मुबारक डील्स ने इस बात को ध्यान में रखते हुए अपने काम को देश भर में विस्तार करने का फैसला किया। Mubarakdeals.com ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट है। इस पर न केवल आम समय के लिए उपयोग में लाई जाने वाली चीजें हैं, लेकिन यह भी विशेष अवसरों पर उपयोग किए जाने वाले कपड़े, गहने और अन्य सामान भी हैं।

कंपनी के सीईओ नईम अख्तर बताते हैं कि मुस्लिम महिलाओं को अपनी पसंद की चीजें आसानी से प्राप्त नहीं होतीं। उन्हें वे चीज़ें मजबूरन खरीदना न पड़े, जो उन्हें कम पसंद हैं, इसी सोच को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने नये उद्यम की नींव रखी। उनके अनुसार मुस्लिम शैली के कपड़ों का कारोबार 2015-16 में 230 मिलियन डॉलर का था। इस 2019 तक दस लाख 327 डॉलर तक बढ़ेगा। उनका वेबसाइट दुनिया की मुस्लिम बस्तियों में अपनी पहचान बना कर अपना व्यापार बढ़ाना चाहता है।

नईम अख्तर के अनुसार भारत में महिलाओं को जब अपनी पसंद के कपड़े तलाश करने निकलती हैं तो उन्हें केवल 10 प्रतिशत संतोष होता है। कम गुणवत्ता वाला कपड़ा, सिलाई में खामियाँ, एम्बराईडरी में भद्दापन जैसी कई बातें उन्हें अपनी पसंद की चीजों को खोजने में काफी समय खर्च करने का कारण बनती हैं। डिज़ाइनर बाज़ार भी कपड़े डिजाइन में मुस्लिम महिलाओं की पसंद की ओर अधिक ध्यान नहीं देता।

दरअसल नईम अख्तर की ध्यान शुरू से ही व्यवसाय की ओर था, लेकिन माता-पिता ने उन्हें इसकी इजाज़त नहीं दी और कहा कि जब पच्चीस छब्बीस साल के हो जाओ तो इस बारे में सोचते हैं।

'माता पिता को डर था कि कारोबार के चक्कर में पड़ कर मैं कहीं अपनी शिक्षा अधूरी न छोड़ दूँ, लेकिन आज मैं न केवल नौकरियों का अनुभव रखता हूँ, बल्कि अपना कारोबार फैलाने की योजना भी मेरे पास है। शुरुआत हुई है। मुझे उम्मीद है कि धीरे-धीरे कारोबार आगे बढ़ेगा।'

मुबारक डीलस इन दिनों बैंगलोर से काम कर रहा है। वे चाहते हैं कि भारत भर में वे ग्राहकों तक पहुँच सकें। बहुत जल्द वे कंपनी में 10 नए कर्मचारियों की नियुक्ति करने की योजना रखते हैं। वे बताते हैं।

'इस समय साइट पर हिजाब अबाया, शेरवानी, कुर्ता पाईजामा, गहने, इत्र, हज यात्रा के कपड़े जैसे समान हैं। धीरे-धीरे इस सूची में विस्तार किया जाएगा।

नईम अख्तर ने जब नौकरी छोड़ी उनका वेतन व्यापार की शुरुआती आय से काफी बेहतर था। अच्छी ख़ासी निर्धारित आय छोड़कर व्यापार की ओर आना साहस का काम होता है। आज वे इस बात से खुश हैं कि बचपन से अपने व्यापार के बारे में जो सोच थी, आज उसे अमली जामा पहनाने का मौका मिला। मेहनत और लगन से आगे की मंज़िलें तय की तय करने का संघर्ष जारी है।

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