'StoryXpress' है तो फिर टेंशन किस बात की..

    By Sahil
    June 28, 2015, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:20:58 GMT+0000
    'StoryXpress' है तो फिर टेंशन किस बात की..
    ऐसा API जो SMBs के लिए बनाए ऑटोमेटिक वीडियो
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    ज्यादातर उद्यमियों को शायद ही इस बात का एहसास हो कि गूगल के बाद यूट्यूब ही दूसरा सबसे बड़ा सर्च इंजन है। बिंग, याहू. आस्क.कॉम और एओएल को एक साथ मिला दें तो भी यूट्यूब बड़ा है। जब आप अपने पेज में वीडियो का इस्तेमाल करते हैं, तो फ्रंट पेज पर ही अपने खोज का नतीजा प्रात कर लेना 50 गुना आसान हो जाता है। इंटरनेट रिटेलर की एक शोध के मुताबिक़ 52 फीसदी उपभोक्ता मानते हैं कि प्रोडक्ट्स का वीडियो देखकर ऑनलाइन खरीदारी का फैसला लेना उनके लिए ज्यादा आसान होता है।

    इससे साफ़ होता है कि वीडियो सिर्फ एक वेबसाइट के हिट्स नहीं बढ़ाते, बल्कि इनके जरिए यूजर इंटरक्शन भी बेहतर होता है। यही आधार बना, जिसके चलते आईआईटी हैदराबाद के छात्रों ने मिलकर स्टोरीएक्सप्रेस तैयार किया। ये लोग उस मार्केट सेगमेंट पर नज़र रख रहे हैं, जो प्रोफेशनल वीडियोग्राफर का खर्च वहन नहीं कर सकता। ये एपीआई उन क्लाइंट्स को लक्ष्य कर तैयार किया गया है, जिन्हें बड़ी संख्या में वीडियो बनाने की जरूरत पड़ती है और उन्हें मैनुअल प्रक्रिया काफी धीमी मालूम पड़ती है। स्टोरीएक्सप्रेस में यूजर को रचनात्मकता पर ज्यादा ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है। वो वीडियो की प्लानिंग, कहानी पहचानने, ट्रांजिशन्स और एनिमेशन का काम स्टोरीएक्सप्रेस को सौंप सकता है।

    कैंपस आइडिया से लेकर प्रोडक्ट बनने तक

    पिछले साल छठे सीमेस्टर के दौरान, अंकित की एक प्रोफेसर डॉ. सुमोहना ने उसे मल्टीमीडिया कम्युनिकेशन कोर्स का प्रस्ताव दिया। ये कोर्स मल्टीमीडिया यानी मुख्य रूप से इमेज और वीडियो के बारे में था। सभी लोगों को इस कोर्स में एक प्रोजेक्ट करने के लिए कहा गया। अंकित मिश्रा और उसके दोस्तों ने फैसला किया कि वो एक ऐसा मोबाइल ऐप्प बनाएंगे जो कुछ तस्वीरों और टेक्स्ट को इनपुट के तौर पर लेगा, और उसे वीडियो के रूप में पब्लिश करके देगा। कहावत है कि एक तस्वीर एक हज़ार शब्दों के बराबर होती है। इन लोगों ने सोचा कि एक वीडियो कहानियां शेयर करने से बेहतर रहेगा। यहीं से स्टोरीएक्सप्रेस की शुरुआत हुई।

    स्टोरीएक्सप्रेस में 5 लोगों की टीम है, जिसमें सभी फिलहाल आईआईटी हैदराबाद के छात्र हैं। मुदित तनवानी ने कोर्स प्रोजेक्ट के लिए अंकित मिश्रा की टीम में ज्वाइन किया। सन्यम कपूर और चिन्मय जिंदल आईआईटी हैदराबाद में उनके जूनियर थे। इन लोगों को टीम में ज्वॉइन करने के लिए उस वक्त कहा गया जब वो स्टार्टअप वीकेंड यूनिवर्सिटी, हैदराबाद में हिस्सा ले रहे थे। स्टार्टअप वीकेंड में हिस्सा लेने से इन लोगों को अपने आइडिया पर शुरुआती फीडबैक मिलने और प्रारूप में सुधार करने से काफी फायदा हुआ। यहीं से उनका आइडिया आगे बढ़ने लगा। कुछ दिनों बाद उनकी टीम में रिजुल शामिल हो गया।

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    मुदित, सन्यम और चिन्मय कम्प्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग से हैं, जबकि रिजुल और अंकित मिश्रा इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से हैं। अंकित बिजनेस डेवलपमेंट और प्रोडक्ट की मार्केटिंग जैसी नॉन टेक्निकल चीजें देखता है। मुदित डिज़ाइन में एक्सपर्ट है, वो प्रोडक्ट डेवलपमेंट और ऑपरेशंस संभालता है। रिजुल, सन्यम और चिन्मय को क्रिएटिविटी में महारत है, ये लोग डिज़ाइन्स को कोड में बदलते हैं, ताकि एंड यूज़र को वीडियो बनाना काफ़ी आसान हो सके।

    छोटे कारोबारियों ने अब तक इस कला को नहीं अपनाया है

    इस टीम ने वीडियो इंडस्ट्री के बाज़ार पर शोध किया। उपभोक्ताओं की ज़रूरत और उनके अनुभवों के फासले को समझने की कोशिश की। उन्हें जो पता चला, वो हैरान करने वाला था। ज्यादातर भारतीय उद्यमियों, ख़ासकर छोटे और मंझोले कारोबारियों ने स्टोरीटेलिंग की ताकत का इस्तेमाल नहीं किया है। ज्यादातर उद्यमी (भारत में ही नहीं) डिजिटल मार्केटिंग के नए टूल्स जैसे वीडियो मार्केटिंग का इस्तेमाल नहीं करते हैं। उन्होंने कुछ व्यवसायियों से बातचीत की और पूछा कि वो इसे एक आदत क्यों नहीं बनाते हैं। छोटे कारोबारी वीडियो प्रोफेशनल्स के महंगे दामों के चलते ऐसा नहीं कर रहे थे। यहां तक कि अगर वो खुद अपना वीडियो बनाना चाहते हैं तो इसके लिए उन्हें अपना बहुत सारा समय खर्च करना होगा, जिसे वो अपने असली कारोबार में लगा सकते हैं। इसके साथ ही, उन्हें कहानी को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने, वीडियो को विजुअली अपीलिंग बनाने के तरीकों और अन्य चीजों की भी जानकारी रखनी होगी। लेकिन, अब उनके पास स्टोरीएक्सप्रेस आने से वो इसे बार-बार करना चाहेंगे।

    स्टोरीएक्सप्रेस के सह-संस्थापक अंकित का कहना है कि वर्तमान में हम एपीआई प्लेटफॉर्म पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं और इसके जरिए ई-कॉमर्स और रियल एस्टेट के बड़े कारोबारियों को आकर्षित कर फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए क्लाइंट के साथ जुड़कर काम करने की ज़रूरत है। पहले कुछ महीनों में हमारी कोशिश संभावित भारतीय क्लाइंट्स में अपनी पकड़ बनाने की है। भारतीय बाज़ार से मिली सीख हमें दूसरे देशों में अपना विस्तार करने में मदद करेगी। स्टार्टअप और एसएमई हॉटबेड्स जैसे कि अफ्रीका और यूरोप हमारी विस्तार सूची में सबसे ऊपर हैं। उपभोक्ताओं के मामले में हम किसी बाज़ार विशेष तक सीमित नहीं है, लेकिन मुख्य रूप से हमारा ध्यान भारत और अफ्रीका के बढ़ते हुए बाज़ार पर है।

    स्टोरीएक्सप्रेस यूजर्स को पर्सनलाइज्ड डाइनैमिक टैम्पलेट देता है

    हमसे बात करते हुए अंकित ने बताया कि उनमें और उनके प्रतिस्पर्धियों में क्या फर्क है। उनके दो बड़े प्रतिस्पर्धी हैं, एनिमोटो और स्टपफ्लिक्स, लेकिन अंकित का कहना है कि उनका सिस्टम दूसरों से बेहतर हैं। उनका पहला यूनिक कंसेप्ट स्टोरीबोर्डिंग का है। ये उपभोक्ताओं के लिए ऐसे वीडियो तैयार करता है, जो दूसरे एनिमेटेड वीडियोज़ से कई गुना बेहतर है। अंकित के मुताबिक़ स्टोरीएक्सप्रेस एक ऐसा पर्सनलाइज्ड डायनेमिक टेम्पलेट देता है जो इस बात की गारंटी देता है कि कोई भी 2 वीडियो एक जैसे नहीं हो सकते हैं। अंकित ने कहा – ‘हमारा सिस्टम काफी होशियारी से इनपुट की गईं इमेजेज़ से उनकी प्रॉपर्टीज़ के मुताबिक़ एनिमेशन चुनता है। इसके अलावा, कुछ ऐसे प्रोडक्ट फीचर हम लाने वाले हैं जो हमें सबसे अलग खड़ा कर देंगे।’

    अंकित के मुताबिक़ टीम जुलाई-अगस्त के दौरान शुरुआती फंडिंग की उम्मीद में है। अभी, कंपनी ने बस शुरुआत ही की है। अंकित कहते हैं, “जब आप कॉलेज में होते हैं, उसी वक्त शुरुआत करने की सबसे अच्छी बात ये है कि आपसे कोई तनख़्वाह की उम्मीद नहीं करता, इसलिए आपको खुद को सेलरी नहीं देनी है। आपका हॉस्टल ही आपका ऑफिस है और आपको फ्री वाई-फाई मिल जाता है। हम माइक्रोसॉफ्ट बिज़स्पार्क जैसे प्रोग्राम्स के आभारी हैं, जिसने हमें प्रारंभिक सर्वर उपलब्ध कराया। हम साथी उद्यमियों को जो शुरुआत करने की कोशिश में हैं, उन्हें एमएस बिजस्पार्क के इस्तेमाल की सलाह देते हैं।”

    अगर आप इस एपीआई को उपयोग करना चाहते हैं, तो आप हमारी टीम के पास अपनी ज़रूरतों के साथ पहुंच सकते हैं। स्टोरीएक्सप्रेस के साथ आप अपने एप को कैसे जोड़ना चाहते हैं। [email protected] पर अपनी राय दें।

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