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'बॉर्डर' पर देश की रक्षा करने के बाद गांव को बदलेंगे सेना के जवान

14th Sep 2017
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फौजियों का साथ पाकर महिलाएं भी बेहद उत्साहित हैं। गांव के लोगों को भी लगता है कि ग्रामीण परिवेश में अभी कई कमियां और बुराईयां हैं जिन्हें दूर किया जाना चाहिए। 

ग्रीन ग्रुप की महिलाओं के साथ रिटायर्ड फौजी

ग्रीन ग्रुप की महिलाओं के साथ रिटायर्ड फौजी


 कैंपस से निकल छात्रों की टोलियों ने महिलाओं के ग्रीन ग्रुप के जरिए जुआरियों और नशेड़ियों के खिलाफ अभियान छे़ड़ रखा है।

रिटायर्ड फौजी सुधीर राय की अगुवाई में जुटे दो दर्जन फौजियों ने ग्रीन ग्रुप की महिलाओं की चौपाल में अनुभव साझा किए। वे इतने प्रभावित हुए कि मिलकर साथ काम करने का ऐलान किया।

सेना के जांबाज जवान देश की रक्षा करने का दायित्व पूरी तरह से निभाते हैं। सेना में सेवा देने के बाद भी उनमें समाज के लिए काम करने की ललक होती है यही वजह है कि कई भूतपूर्व सैनिक दोबारा किसी न किसी सेवा में अपना योगदान देने लगते हैं। ऐसे ही कुछ जवानों ने मिलकर वापस गांव की तस्वीर बदलने की ठानी है। ये पूर्व सैनिक पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस के गांवों में जाकर काम करेंगे। विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों की संस्था 'होप वेलफेयर ट्रस्ट' का 'ग्रीन ग्रुप' इन फौजियों का साथ देगा।

ये सभी सैनिक गांव में साफ सफाई से लेकर जुआ-नशा, दहेज और प्रताड़ना से दूर रहने का पाठ पढ़ाएंगे तो अपने तजुर्बे, कठिन हालात में रहने की सीख कर्तव्य-निष्ठा और अनुशासन के जरिए ऐसा रास्ता दिखाएंगे ताकि युवा पीढ़ी खुली हवा में सांस ले सके। दरअसल, बनारस के ग्रामीण इलाकों में जुआ और नशा रोकने की पहल देश के नामी विश्वविद्यालय बीएचयू, काशी विद्यापीठ, जेएनयू, और डीयू के छात्र-छात्राओं ने की है। कैंपस से निकल छात्रों की टोलियों ने महिलाओं के ग्रीन ग्रुप के जरिए जुआड़ियों और नशेड़ियों के खिलाफ अभियान छे़ड़ रखा है।

बनारस शहर से दूर देउरा गांव में रविवार को रिटायर्ड फौजी सुधीर राय की अगुवाई में जुटे दो दर्जन फौजियों ने ग्रीन ग्रुप की महिलाओं की चौपाल में अनुभव साझा किए। वे इतने प्रभावित हुए कि मिलकर साथ काम करने का ऐलान किया। फौजियों का साथ पाकर महिलाएं भी बेहद उत्साहित हैं। गांव के लोगों को भी लगता है कि ग्रामीण परिवेश में अभी कई कमियां और बुराईयां हैं जिन्हें दूर किया जाना चाहिए। होप ट्रस्ट के युवाओं की पहल पर इलाके की महिलाओं ने 'ग्रीन ग्रुप' बनाया है। जिनकी पहचान हरी साड़ी है। ये वो महिलाएं हैं जो कल तक घर की चौखट तक नहीं लांघती थी, वो आज घरेलू हिंसा, नशाबंदी और जुए जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ रही हैं और कई तरह के सामाजिक बदलाव ला रही हैं।

सेना के रिटायर्ड जवानों के साथ ग्रीन ग्रुप की महिलाएं

सेना के रिटायर्ड जवानों के साथ ग्रीन ग्रुप की महिलाएं


गांव में 'होप' संस्था के दिव्यांशु ने बताया कि दो दर्जन पूर्व फौजियों ने अब हर हफ्ते में एक दिन का समय गांव में बिताने का संकल्‍प लिया है। ग्रीन ग्रुप के अभियान को आगे बढ़ाने संग ये युवाओं को सेना में भर्ती की तैयारी के टिप्‍स देंगे। फौजी पंकज कुमार, प्रेम ओझा, अवधेश सिंह, जी. सिंह व प्रदीप सिंह ने अपने पुराने दिन को याद करते हुए कहा कि सीमा पर तैनाती के दौरान दुश्‍मनों पर कड़ी नजर रखते हुए देश की सुरक्षा में जिस तरह योगदान दिया, ठीक उसी तरह ग्रीन ग्रुप गांव में सामाजिक बुराइयों व असामाजिक तत्‍वों पर नजर रख गांव की रक्षा कर रहा हैं।

‘ग्रामीण दिवस’ की आवाज बुलंद- होप वेलफेयर ट्रस्ट देश की 70 फीसद आबादी के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण दिवस की मांग को जन आंदोलन बनाने में भी जुटा है। मानव श्रृंखला, हस्ताक्षर अभियान, ग्राम चौपाल के बाद 11 हजार किसान और ग्राम प्रधानों का लिखित समर्थन पीएमओ व पर्यटन मंत्री को भेजा है। ग्रामीण दिवस घोषित होने की स्थिति में पंचायत से जुड़े सभी कार्य डिजिटल होंगे तो विकास की योजनाओं से लेकर शिक्षा की स्थिति, ग्रामीण स्वच्छता के लिए किए गए प्रयास के साथ शौचालय, सड़क, हैंडपंप व ग्राम चौपाल की रिपोर्ट सार्वजनिक होगी। 

यह भी पढ़ें: सिर्फ 5 लाख में बिना मिट्टी के खेती की, दो साल में टर्नओवर हुआ 6 करोड़

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