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नौकरी की चाह रखने वाली महिलाओं की राह आसान बनाने'जाब्स फॉर हर'

दूसरे बेटे के जन्म केबाद नेहा को आया उद्यमी बनने ख़याल..एक ओर महिलाओं को नौकरी के लिए तो दूसरी ओर कंपनियों को प्रतिभावान महिला कर्मियों तक पहुँचाने के स्थापित की जाब्स फार हर..नौकरी से ब्रेक लेने के बाद दोबारा नौकरी देने का प्लेटफॉर्म...नौकरी के लिए आवेदन होता है मुफ़्त

Harish Bisht
20th Aug 2015
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मुश्किलें तो जिंदगी में आती रहती हैं, लेकिन अगर इंसान इन मुश्किल हालात से लड़ने का माद्दा पैदा कर ले तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ था नेहा बागारिया के साथ, जब वो बाली बीच में अपने पति और दो बच्चों के साथ एक शादी में हिस्सा लेने गई थी। तब उनके एक बच्चे की उम्र साढ़े तीन साल थी और दूसरे की 6 महीने। शादी के इस माहौल में उनके बड़े बच्चे ने उनको ख़ूब परेशान किया। उसने वो सारी हरकतें की जो इस उम्र के बच्चों से उम्मीद की जाती हैं।

नेहा बागारिया

नेहा बागारिया


उस दौरान नेहा को काफी शर्मिंदगी भी उठानी पड़ी। तब उन्होंने सोचा कि उन्होंने अपने बच्चों को बड़ा करने के लिए अपना आकर्षक करियर बर्बाद कर दिया। उस रात उन्होंने अपने पति के साथ इस मसले पर काफी देर बातचीत की और बाद में नेहा का पूरा परिवार बेंगलुरू लौट आया। नेहा के दिमाग में अब भी वही बात कौंध रही थी। उन्होंने इस मसले को अपने दोस्तों के बीच उठाया और एक सर्वे किया। 

नेहा को पता चला कि वो अकेली नहीं हैं, जो ऐसा सोचती हैं। और भी कई महिलाएं हैं, जिन्होंने अपने बच्चों के खातिर करियर का बलिदान कर दिया। इस दौरान नेहा को पता चला कि महिलाएँ अपने करियर में इसलिए वापस नहीं लौट सकीं, क्योंकि वो मानती थी कि उनके पास तजुर्बा होने के बावजूद कंपनियां उनको काम पर नहीं रखेंगी। जब नेहा ने सच्चाई जानने की कोशिश की तो उनको पता चला की उल्टे कंपनियां तो चाहती हैं कि ऐसी प्रतिभाशाली महिलाएँ उनके लिए काम करें, लेकिन कंपनियां ये नहीं जानती थी को वो ऐसी प्रतिभाओं को कहाँ पर खोजे।

नेहा ने सोचा कि क्यों ना इसी समस्या से जुड़ा एक स्टार्टअप अब शुरू किया जाये और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर उन्होंने ‘JobsForHer’ की शुरूआत कर दी। नेहा का दिल तो शुरूआत से ही एक उद्यमी वाला था। नेहा को भारत में 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल में वही पढ़ाई दोबारा करनी पड़ी थी, जब उन्होंने यहाँ पर फाइनेंस और बिजनेस स्टडी की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया था। क्योंकि वहां पर भारतीय बोर्ड को मान्यता नहीं है। इसलिए उन्होने वहां पर दूसरे छात्रों की पढ़ाई में ज्यादा मदद की। जब नेहा 21 साल की थी तो उन्होंने वहीं पर कॉलेज बोर्ड प्रतिनिधि के तौर पर पढ़ाना शुरू कर दिया और वहाँ पढ़ने वाले छात्र बमुश्किल उनसे पांच साल छोटे थे।

कुछ वक़्त तक पढ़ाने के बाद मुंबई की इस लड़की की बेंगलुरू के एक लड़के के साथ शादी हो गई, जिसके बाद दोनों लोग सिलकॉन सिटी में आकर रहने लगे। यहाँ पर उन्होंने अपने पति के फॉर्मा उत्पादन के पारिवारिक कारोबार में हाथ बंटाना शुरू कर दिया। यहां पर नेहा मार्केटिंग से जुड़ी नीतियां, सूचना प्रणाली का प्रबंधन और कई चीजों के प्रदर्शन की समीक्षा करती। संक्षेप में कहें तो उन्होंने इस दौरान काफी कुछ सीखा। उन्होंने करीब 5 साल तक अपने पति की कंपनी Kemwell में काम किया।

साल 2009 में जब नेहा पहले बच्चे की मां बनी तो उन्होंने सोचा कि अगले छह महिने बाद वो फिर अपने काम में लौट आएंगी लेकिन मां बनने के बाद चीजें तेजी से बदलती गई और उनके लिए काम पर लौटना मुश्किल हो रहा था। क्योंकि जब वो अपने बेटे की ओर देखती तो उनको उसके प्रति अपनी जिम्मेदारी का अहसास होता। इसके बाद उन्होंने अपने करियर से ब्रेक लेने का फ़ैसला लिया। इस तरह साल गुज़रते गए और नेहा हालात ठीक होने का इंतजार करती रहीं, लेकिन उनका बेटा नेहा को काम पर लौटने के लिए सोचने का वक्त ही नहीं दे रहा था। तीन साल बाद जब दूसरे बेटे ने जन्म लिया तो उनका ध्यान अपने बड़े बेटे से हटकर छोटे बेटे पर आ गया।

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एक बार नेहा के कॉलेज के पुराने दोस्तों ने एक पार्टी, रखी जिसमें नेहा भी शामिल हुई। तब वो दूसरे बच्चे की माँ बनने वाली थीं और उनकी गोदी में उनका बड़ा बेटा था। तब किसी दोस्त ने उनसे पूछा कि वो आजकल क्या कर रही हैं, तो उन्होंने अपने बच्चे और पेट की और इशारा कर दोस्त के सवाल का जवाब दिया, लेकिन उनके दोस्त ने फिर उनसे सवाल दागा कि व्यवसायिक तौर पर वो क्या कर रही हैं तब उनको अहसास हुआ कि उनके साथ सबकुछ ठीक नहीं है।

इस घटना के बाद नेहा ने अपनी देवरानी के बारे में सोचा जो अमेरिका में रहती थी और वो जहाँ एक ओर काम कर रही थी वहीं दूसरी ओर अपने बच्चे की सही तरीके से देखभाल भी कर रही थी। इसके बाद उन्होंने निश्चय किया कि वो मजबूत बनेंगी और एक बार फिर उद्यमी बनेंगी।

‘JobsForHer’ की संस्थापक नेहा का कहना है कि अब उनको विश्वास हो गया था कि उनके काम पर जाने से बच्चों पर उल्टा असर नहीं पड़ेगा। वो जान गई थी कि वो काम पर ना जाकर अपनी प्रतिभा की बर्बादी कर रही हैं। उनका मानना है कि बिना उचित कारण के किसी महिला को अपने काम से ब्रेक नहीं लेना चाहिए और अगर कभी किसी महिला को उचित वजहों से ब्रेक लेना भी पड़े जैसे शादी के लिए, मां बनने के लिए या फिर घर में मौजूद बुजुर्ग लोगों की मदद के लिए तो कोशिश करनी चाहिए वो काम पर जल्द जल्द लौट सकें।

‘JobsForHer’ अपने वेबसाइट पर ऐसी कंपनियों की सूची बनाता है जिनको तलाश होती है अच्छे टेलेंट की। यहां पर महिलाएं अपने मन मुताबिक नौकरी तलाश कर सकती हैं वो भी बिना एक पैसा दिये। नौकरी की इच्छुक महिलाएं इनकी वेबसाइट के जरिये कंपनियों में आवेदन करती हैं जिसके बाद ये कंपनियों को महिलाओं से जुड़ी सभी जानकारियां भेज देते हैं। ये लोग ठीक उसी बिजनेस मॉडल की तरह काम करते हैं जैसे नौकरी या लिंक्डइन काम करते हैं। इस तरह महिलाएँ एक बार फिर काम पर लौट आती हैं, जिन्होंने थोड़े वक्त के लिए ब्रेक लिया था। आम लोगों के बीच ‘JobsForHer’ किस कदर लोकप्रिय है इस बात का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इसको हर रोज 2 हजार के आसपास लोग देखते हैं। नेहा, शेरिल सैंडबर्ग की प्रशंसक हैं। वो मानती हैं कि सैंडबर्ग की किताब ‘Lean In’ में उनकी ही कहानी है।

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