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सीए क्रैक करना लग रहा हो मुश्किल, तो ये प्लेटफॉर्म है आपके लिए

28th Dec 2017
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 विषय के मूलभूत सिद्धांत से लेकर कॉन्सेप्ट क्लियर करने में इंडिया गो लर्न (IndigoLearn) काम कर रहा है। यह एक एडटेक स्टार्टअप है। जिसकी परिकल्पना सत्या रघु वी मोक्कपति और श्रीराम सौम्याजुला ने की थी।

इंडिया गो लर्न की टीम

इंडिया गो लर्न की टीम


यह प्लेटफॉर्म उन लोगों के लिए काफी कारगर साबित हो रहा है जिन्हें किन्हीं वजहों से शिक्षा और अध्यापकों का प्रबंध नहीं हो पा रहा है।

यह ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म छात्रों को सीए एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करवाता है। यहां पर सर्वश्रेष्ठ अध्यापकों के साथ ही सीए के टॉपर भी छात्रों को पढ़ाने का काम भी किया जाता है।

टीचिंग को काफी मुश्किल पेशा माना जाता है वहीं दूसरी ओर पढ़ाई करना उतना ही बोरिंग। हालांकि टेक्नोलॉजी के आ जाने के बाद मैथ और साइंस जैसे विषयों को नए तरीके से सिखाने के लिए नए इनीशिएटिव तो लिए जा रहे हैं, लेकिन बाकी विषयों के लिए उतने संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन एक वेबसाइट ऐसी भी है जो छात्रों को फाइनैंस और अकाउंट जैसे विषयों के बारे में अच्छे से पढ़ाची है। विषय के मूलभूत सिद्धांत से लेकर कॉन्सेप्ट क्लियर करने में इंडिया गो लर्न (IndigoLearn) काम कर रहा है। यह एक एडटेक स्टार्टअप है। जिसकी परिकल्पना सत्या रघु वी मोक्कपति और श्रीराम सौम्याजुला ने की थी।

IndigoLearn छात्रों के लिए वीडियो फॉर्मैट में पाठ्य सामग्री तैयार करता है जिससे सीए की पढ़ाई करने में आसानी हो जाती है। सत्या रघु खुद पेशे से एक सीए हैं और पिछले एक दशक से वे सीए की पढ़ाई करने वाले बच्चों को तैयारी करवाते हैं। स्टूडेंट्स के साथ काफी समय बिताकर ही उन्हें लगा कि जिस तरह से छात्रों को पढ़ाया जा रहा है उसमें मजा नहीं आ रहा है। सत्या और श्रीराम की मुलाकात 2013 में हुई थी। उन्होंने छात्रों के लिए ऐसे मॉड्यूल बनाने पर काम किया जो काफी इंटरऐक्टिव हो और छात्र उसमें रुचि भी दिखाएं। दोनों ने इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस से एमबीए किया था। कुछ ही दिनों बाद उन्हें सीए में ऑल इंडिया टॉपर सूरज लखोटिया ने भी जॉइन किया।

उन्हें टेक एक्सपर्ट सरत वेलुमुरी का साथ मिला और फिर 'इंडिया गो लर्न' की तस्वीर बनने लगी। इस काम की शुरुआत 2013 में ही हो गई थी, लेकिन इसे फाइनल शेप देने में तीन साल लग गए और 2016 के अंत में यह प्लेटफॉर्म तैयार हुआ। कोर्स का पहला मॉड्यूल अप्रैल 2017 में वेबसाइट और ऐप दोनों जगहों पर लॉन्च हुआ। यह प्लेटफॉर्म उन लोगों के लिए काफी कारगर साबित हो रहा है जिन्हें किन्हीं वजहों से शिक्षा और अध्यापकों का प्रबंध नहीं हो पा रहा है। हालांकि इस टीम ने पिछले 10 सालों में लाखों स्टूडेंट्स को पढ़ाया होगा, लेकिन इस ऐप में तैयार किए गए पहले मॉड्यूल के जरिए सिर्फ 1,000 छात्रों ने शिक्षा ली।

यह ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म छात्रों को सीए एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करवाता है। यहां पर सर्वश्रेष्ठ अध्यापकों के साथ ही सीए के टॉपर भी छात्रों को पढ़ाने का काम करते हैं। कोर्स के लिए वीडियो तैयार करने में टीम को पूरे दो महीने का वक्त लगा। अभी तक चार्टर्ड अकाउंटेंसी सीखने के लिए लगभग 3,000 छात्रों ने इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया होगा। वीडियो में इंस्ट्रक्टर कॉन्सेप्ट के साथ-साथ ग्राफिक का भी इस्तेमाल करते हैं इसलिए समझने में भी आसानी हो जाती है। श्रीराम कहते हैं कि अनुभव से वे सीख गए हैं कि जो सफल व्यक्ति और सफलता पाने के लिए संघर्ष कर रहे व्यक्ति में अंतर होता है।

वे बताते हैं कि ऐसा नहीं है कि इंटरनेट पर सीए की पढ़ाई करने के लिए कोर्स मटीरियल नहीं उपलब्ध है, लेकिन उन सभी में अक्सर सिर्फ शॉर्ट कट सिखाया जाता है। कॉन्सेप्ट क्लियर कराने पर किसी का जोर नहीं होता है। श्रीराम कहते हैं कि वे इसी सिस्टम को चेंज करना चाहते थे। हर एक वीडियो तैयार करने के लिए स्पेशल शूटिंग और पोस्ट प्रोडक्शन को हायर किया गया था। इन लोगों का ध्यान इसी पर सबसे ज्यादा था कि छात्र इन वीडियोज को देखते वक्त बोरिंग न महसूस करें। वीडियो खत्म होने के बाद छात्रों को आत्मविश्लेषण करने का भी वक्त दिया जाता है। इस प्लेटफॉर्म पर हर वीडियो की औसत लंबाई 8 से 12 मिनट है।

यह भी पढ़ें: छोटे शहरों, कस्बों में युवाओं के करियर की दुविधा को सुलझा रहा है ये स्टार्टअप

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