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पटियाला के महाराजा को हिटलर से मिली दुर्लभ मेबैक कार की रोचक यात्रा

‘‘ महाराजा ने बड़ी विनम्रता से कहा कि वह किसी को वह कार नहीं बेचने जा रहे, लेकिन उनका मेहमान वह कार उपहार के तौर पर लेना चाहे तो ले सकता है। सरदार सत्यजीत ने बेझिझक यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। इसके अलावा, उन्हें पटियाला पैलेस के गैराज प्रभारी से एक पत्र मिला जिसमें कार सुपुर्द करने का निर्देश था।’’

6th Jun 2016
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क्या आपको पता है कि एडोल्फ हिटलर ने 1930 में पटियाला के महाराजा भूपिन्दर सिंह को जो दुर्लभ मेबैक कार उपहार में दी थी, वह बिना पैसे के लेनदेन के कैसे दूसरे हाथों में चली गई और अंतत: विंटेज कारों का संग्रह करने वाले एक व्यक्ति के पास पहुंच गई।

इसी तरह, बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि यहां स्थित पटियाला हाउस में एक ऐतिहासिक बैठक हुई थी, जिसमें हर चार साल में एशियाई खेल आयोजित करने का निर्णय किया गया और पहला एशियाई खेल राष्ट्रीय राजधानी में 1951 में हुआ।

photo navarngindia

लेखक सुमंत के. भौमिक द्वारा लिखित और नियोगी बुक्स द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘प्रिंसली पैलेसेज इन न्यू डेल्ही’ में महलों से जुड़ी ऐसी कई कहानियां हैं, जिनसे लोग अनजान हैं। ये महल नयी दिल्ली के शहरी क्षेत्र का एक आंतरिक हिस्सा रहे हैं।

पटियाला हाउस में 1957 की एक घटना का जिक्र करते हुए लेखक ने लिखा है, ‘ 1935 में जर्मनी में एक बैठक के बाद एडोल्फ हिटलर द्वारा महाराजा भूपिन्दर सिंह को उपहार में दी गई दुर्लभ मेबैक कार गुम हो गई। यह कार दुनिया में खास तौर पर बनाई गई केवल छह कारों में से एक थी और इनमें से आखिरी कार पटियाला में मोतीबाग पैलेस में गैराज में बेकार पड़ी रही।’’

भूपिन्दर सिंह के पोते युवराज मलविंदर सिंह पटियाला हाउस की पहली मंजिल में बैठक कक्ष में बैठे थे तो उनके पिता महाराज यदविंदर सिंह ने उन्हें कुछ मेहमानों के लिए ड्रिंक्स बनाने को कहा। भरोली के सरदार सत्यजीत सिंह उस पार्टी में शामिल होने आए और बातचीत के दौरान उन्होंने महाराजा से पूछ लिया कि क्या वह पटियाला में बेकार पड़ी मेबैक कार खरीद सकते हैं।’’

‘‘ महाराजा ने बड़ी विनम्रता से कहा कि वह किसी को वह कार नहीं बेचने जा रहे, लेकिन उनका मेहमान वह कार उपहार के तौर पर लेना चाहे तो ले सकता है। सरदार सत्यजीत ने बेझिझक यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। इसके अलावा, उन्हें पटियाला पैलेस के गैराज प्रभारी से एक पत्र मिला जिसमें कार सुपुर्द करने का निर्देश था।’’

‘ अगले दिन वह कार बिना पैसे के लेनदेन के दूसरे हाथ में चली गई और बाद में वह विंटेज कार का संग्रह करने वाले एक व्यक्ति के हाथ में चली गई।’’ इस पुस्तक में यह भी जिक्र किया गया है कि कैसे 13 फरवरी, 1949 को पटियाला हाउस में एशियाई खेलों के महासंघ का जन्म हुआ। इस कॉफी टेबल बुक में हैदराबाद, बड़ौदा, बीकानेर, जयपुर, पटियाला, दरभंगा और त्रावणकोर की रियासतों के सात मुख्य महलों का वर्णन करते हुए इनसे जुड़े पुराने फोटोग्राफ, पत्र, नक्शे और योजना भी शामिल हैं। इसके अलावा, इसमें दिल्ली में अन्य महलों जैसे बहावलपुर हाउस, भावनगर हाउस, बूंदी हाउस, कोचीन हाउस, धोलपुर हाउस, फरीदकोट हाउस, ग्वालियर हाउस, जैसलमेर हाउस, जींद हाउस, जुब्बाल हाउस, मंडी हाउस और पटौदी हाउस के बारे में भी दिलचस्प जानकारियां दी गई हैं। (पीटीआई)

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