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अमेरिका में अपने स्टार्टअप से हज़ारों लोगों को रोज़गार दे रही हैं भारतीय महिला सुचि रमेश

भारतीय महिला सुचि रमेश ने किया अमेरिकन फैशन इंडस्ट्री में अपने स्टार्टअप से कामयाबी का झंडा बुलंद...

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8th Jun 2017
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एक दिन मीटिंग के लिए तैयार होते वक्त सुचि को लगा कि उनके पास मीटिंग में जाने के लिए मनचाहे कपड़े ही नहीं हैं और फिर उन्हें खयाल आया, कि आमतौर पर ये समस्या तो सबके साथ होती होगी। उनके उसी खयाल ने उन्हें अपैरल व फैशन डिजाइनिंग कंपनी खोलने के लिए प्रेरित किया। आज की तारीख में सुचि अमेरिका में वो भारतीय नाम हैं, जो न सिर्फ अपने लिए कुछ कर रही हैं बल्कि हज़ारों लोगों की आमदनी का साधन भी बनी हैं। अब वे डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक का काम करती हैं और लोगों को रोज़गार भी देती हैं...

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सुचि रमेश, फोटो साभार: money.cnna12bc34de56fgmedium"/>

कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट और डेटा एनालिटिक्स में एमबीए सुचि ने 12 साल टेक फील्ड में बिताए हैं। धीरे-धीरे उन्हें अहसास हुआ कि वह अपने पिता के पदचिन्हों पर चलना चाहती हैं।

सुचि रमेश अमेरिका की फैशन इंडस्ट्री में काफी जानी मानी शख्सियत हैं। मूल रूप से भारतीय सुचि इन दिनों अमेरिका में अपना फैशन का साम्राज्य स्थापित करने में व्यस्त हैं। पेशे से डेटा एनालिस्ट सुचि अब फैशन रीटेल और मैन्युफैक्चरिंग का काम करती हैं। एक चुनौती ने उन्हें इस इंडस्ट्री में आने के लिए प्रेरित किया। कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट और डेटा एनालिटिक्स में MBD सुचि ने 12 साल टेक फील्ड में बिताए हैं। धीरे-धीरे उन्हें अहसास हुआ कि वह अपने पिता के पदचिन्हों पर चलना चाहती हैं। एक दिन मीटिंग के लिए तैयार होते वक्त सुचि को लगा कि उनके पास मीटिंग में जाने के लिए मनचाहे कपड़े ही नहीं हैं और फिर उन्हें खयाल आया, कि ये समस्या तो सबको होती होगी और उन्होंने अपैरल व फैशन डिजाइनिंग कंपनी खोलने की सोच। आज की तारीख में सुचि डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक का काम करती हैं।

सुचि के पिता और उनके दादा इंडिया में एक मोटरबाइक कंपनी चलाते हैं। वह अपने पिता से प्रभावित होकर हमेशा से कुछ अपना शुरू करना चाहती थीं। हालांकि सुचि की शुरुआत इतनी आसान भी नहीं थी। वह 2006 में इंडिया से यूएस काम की तलाश में गई थीं। इसके लिए उन्हें अमेरिका में रेजिडेंट स्टेटस हासिल करना था। यह स्टेटस मिलते ही वह अपने काम में लग गईं।

सुचि को पहले से ही फैशन डिजाइनिंग इंडस्ट्री की नॉलेज थी और वह इस सप्लाई चेन को अच्छे से समझती थीं। हालांकि उनका पहले का क्षेत्र काफी अलग था, लेकिन उन्हें यह काम करने में काफी मजा आने लगा। अमेरिकी अपैरल एंड फुटवेयर एसोसिएशन के मुताबिक 97%कपड़े और 98% जूते विदेश में बनते हैं। इसलिए उन्हें अमेरिका में ही मैन्युफैक्चर कर के बेचने में काफी आसानी हो रही थी और लागत के कम आने के साथ ही यह काफी किफायती भी हो रहा था।

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36 साल की सुचि ने जून 2015 में कंपनी स्थापित करने के बाद इस साल लगभग 1.3 मिलियन डॉलर का रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा है। सुचि कहती हैं कि वह बड़ी आसानी से इस लक्ष्य को हासिल कर लेंगी क्योंकि उनके पास ऐसी टेक्नॉलजी और लोग हैं कि सिर्फ 5 दिन के भीतर मनचाही डिजाइन के कपड़े तैयार कर दे देते हैं। अपनी इस पहल से सुचि उन विदेशियों के लिए भी चुनौती पेश कर रही हैं जो अमेरिकियों से नौकरियां हथिया रहे हैं। वो अपनी फर्म में सिर्फ अमेरिकी नागरिकों को ही जॉब देती हैं। उनके स्टाफ में 80 फीसदी वर्कर महिलाएं हैं। सुचि कहती हैं, कि 'अमेरिका ने उन्हें वाकई में एक सफल बिजनेसवुमन बनने में काफी मदद की है। बहुत अच्छा लगता है जब कोई देश किसी दूसरे देश से आई महिला को काम करने का मौका देता है।' इस साल वह 40 लोगों की भर्तियां करने जा रही हैं। इसमें भी बड़ी भागीदारी महिलाओं की ही रहेगी।

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फोटो साभार: money.cnna12bc34de56fgmedium"/>

सुचि अपनी कंपनी में प्रॉडक्शन, डिवेलपमेंट से लेकर वेयरहाउस मैनेजमैंट, मैन्युफैक्चर तक सारे काम करती हैं। इसके लिए उन्होंने नॉर्थ बर्जन इलाके में 6,000 स्क्वॉयर फीट की जगह भी ले रखी है। सुचि को किसी दूसरे ब्रांड्स की परवाह ही नहीं है, क्योंकि वह कहती हैं कि उनका किसी से मुकाबला नहीं है। उनका आइडिया एकदम अलग है।

सुचि के मुताबिक अब ट्रेंड बदल रहा है। भारत, चीन और बांग्लादेश रीटेल की बढ़ रही मांग को पूरी तरह हैंडल नहीं कर पा रहे हैं और यदि आधी दुनिया में ही आपकी सप्लाई चेन है तो मार्केट में आपकी स्पीड अपने आप ही घट जाती है। पूरी दुनिया की जरूरतों से मैच करना मुश्किल हो जाता है। सुचि के पास रेवेन्यू के तीन मॉडल हैं। उनका सबसे मेन सोर्स बिजनेस टू बिजनेस ऑप्शन का है जिसमें वह बड़े-बड़े फैशन स्टोर और हाउसेस से सीधे संपर्क करती हैं और उनके लिए अपैरल तैयार करती हैं।

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सुचि रमेश की कंपनी महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के अलावा पैट्स के लिए भी कपड़े तैयार करती है। उनकी सबसे बड़ी क्लाइंट कंपनी सिंटास है, जिसका रेवेन्यू बिलियन डॉलर से अधिक है। यह कंपनी यूनिफॉर्म बनाने के लिए जानी जाती है। सुचि की कंपनी अमेरिकी रिटेलर्स को युवाओं की फैशनेबल ड्रेस मुहैया कराती है। साथ ही होटल, फैक्ट्री और केसिनो के लिए तय यूनिफॉर्म भी तैयार करके देती है।

आपको जानकर शायह हैरानी होगी, कि सुचि दिन में लगभग 16 घंटे काम करती हैं और हफ्ते में सिर्फ एक दिन की छुट्टी लेती हैं। उनकी फैमिली बाहर रहती है। सुचि ने बताया कि उनका एक बॉयफ्रेंड है, जो कि उन्हें अच्छे से समझता है और काफी सपोर्टिव भी है। सुचि ने एक कुत्ता और एक बिल्ली भी पाल रखा है। वह अपनी सफलता का श्रेय अपने दोस्तों को देती हैं जो हर वक्त उनकी मदद के लिए तैयार रहे। हालांकि सुचि कहती हैं कि अभी भी उन्हें तमाम चुनौतियों का सामना करना है।

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