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सत्ता से टक्कर लेकर अक्सर विवादों में रहने वाले आईपीएस अमिताभ ठाकुर

जय प्रकाश जय
16th Oct 2018
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उत्तर प्रदेश के जुझारू आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने खाकी वर्दी ओढ़ने के बाद से कभी चैन की सांस नहीं ली है। वह यूपी के विभिन्न जिलों में कप्तान रहे, इस समय आईजी (रुल्स) हैं। उनकी पत्नी नूतन ठाकुर भी एक निर्भीक, जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता हैं। ठाकुर दंपति दशकों से सरकारी अनीतियों से टकराते आ रहे हैं।

अमिताभ ठाकुर

अमिताभ ठाकुर


अब कॉल कर धमकाने के संबंध में दर्ज मुकदमे पर वर्तमान आईजी अमिताभ ठाकुर पहले की तरह मुखर नहीं दिखते हैं। वह कहते हैं कि प्रकरण के विवेचक के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री ने मान लिया है कि आवाज उन्हीं की है और वाइस सैंपल देने से मना कर दिया।

उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित एवं जुझारू 1992 बैच के आईपीएस आईजी (रूल्स) अमिताभ ठाकुर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, कवि एवं लेखक भी हैं। उनका जन्म बोकारो (बिहार-झारखंड) में हुआ था। शुरुआती पढ़ाई बोकारो के केंद्रीय विद्यालय से पूरी करने के बाद अमिताभ ने आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। आईपीएस बनने के बाद वह उत्तर प्रदेश के सात जिलों बस्ती, देवरिया, बलिया, महाराजगंज, गोंडा ,ललितपुर और फीरोजाबाद में कप्तान रहे। मुलायम सिंह‍ की नाराजगी का शिकार हुए अमिताभ अमिताभ ठाकुर साल 2006 में जब फिरोजाबाद के एसपी थे, उसी दौरान मुलायम सिंह किसी बात को लेकर उनसे नाराज हो गये और उनका तबादला कर दिया। मुलायम सिंह की नाराजगी ही थी कि अमिताभ ठाकुर को किसी भी बड़े जिले में बतौर कप्तान तैनाती नहीं मिली।

उसी साल अमिताभ ठाकुर को डीआईजी, और साल 2010 में आईजी के पद पर प्रमोशन मिलना था लेकिन गोंडा में कप्तान रहते शस्त्र लाइसेंस में धांधली के मामले में विभागीय जांच उनके खिलाफ चली गई, जिसके चलते बाद में मायावती राज में उनको पांच साल कोई प्रमोशन नहीं दिया गया। इसके बाद ठाकुर ने एक लम्बी लड़ाई लड़ी और आखिरकार अखिलेश सरकार ने साल 2013 में इनका डाइरेक्ट प्रमोशन एसपी से आईजी के पद पर कर दिया। प्रमोशन के बाद इन्हे आईजी रूल्स मैन्युअल बनाया गया, जिसके बाद इनका तबादला आईजी सिविल डिफेंस के पद पर कर दिया गया। नौकरी के दौरान गैरविभागिय कामों में दखलअंदाजी का अमिताभ ठाकुर पर आरोप लगा। उन्होंने कई आरटीआई भी सरकारी कार्यो के लिए दाखिल किए, कई पीआईएल किए जिनमे कुछ में कोर्ट की फटकार भी सुनने को मिली।

अमिताभ ठाकुर नेशनल आरटीआई फोरम के संस्थापक भी हैं। उनकी पत्नी डॉ नूतन ठाकुर एक जानी- मानी सामाजिक कार्यकर्ता हैं। जिन दिनो फेसबुक पर 'आई हेट गाँधी' नामक एक फेसबुक ग्रुप में महात्मा गाँधी पर अभद्र टिप्पणी की गई थी, इस संघर्षशील दंपति ने इस बाबत फेसबुक के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज करा दिया था। कुछ दिनों बाद फेसबुक से उस ग्रुप को प्रतिबंधित कर दिया गया। ठाकुर दंपति के इस काम की उन दिनों जमकर सोशल मीडिया पर सराहना हुई थी। वर्ष 2015 में अमिताभ ठाकुर ने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव पर धमकी देने का आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके पास एक ऑडियो टेप है, जो फोन पर रिकॉर्ड की गई है। यह रिकॉर्डिंग मुलायम सिंह और उनके बीच फोन पर हुई बातचीत का है। इस टेप में मुलायम सिंह यादव को साफ तौर पर धमकी देते हुए सुना जा सकता है।

अमिताभ ठाकुर ने जैसे ही यह टेप सार्वजनिक किया था, कुछ ही घंटों के भीतर उनपर बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराकर उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया। उन्होंने दिल्ली जाकर केंद्रीय गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव अनंत कुमार सिंह से मुलाकात की। उन्होंने खुद और अपनी पत्नी एवं सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर के लिए केंद्रीय बलों की सुरक्षा मांगी। उन्होंने कहा कि 'मुलायम सिंह यादव ने मुझे नतीजा भुगत लेने की धमकी दी है। इसलिए मैं अतिरिक्त सचिव से मिला और खुद के लिए एवं अपनी पत्नी के लिए केंद्रीय बलों की सुरक्षा मांगी।

वर्ष 2015 में 10 जुलाई को लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उन्हें फोन पर धमकी दी थी। पुलिस ने इस मामले में पहली बार अक्टूबर 2015 में अंतिम रिपोर्ट लगाई थी लेकिन ठाकुर ने इस पर सवाल उठाते हुए इसे चुनौती दी तो अदालत ने 20 अगस्त 2016 को इस अंतिम रिपोर्ट को खारिज करते हुए पुलिस को मामले की आगे जांच करने के आदेश दिए। पुलिस ने मुलायम की आवाज का नमूना लेने की कोशिश की लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया। हालांकि बाद में उन्होंने स्वीकार किया था कि कॉल रिकॉर्डिंग में उन्हीं की आवाज है। मुलायम ने कहा था कि उन्होंने एक बुजुर्ग होने के नाते ठाकुर से बात की और उनका इरादा उन्हें धमकाने का नहीं था।

अब कॉल कर धमकाने के संबंध में दर्ज मुकदमे पर वर्तमान आईजी अमिताभ ठाकुर पहले की तरह मुखर नहीं दिखते हैं। वह कहते हैं कि प्रकरण के विवेचक के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री ने मान लिया है कि आवाज उन्हीं की है और वाइस सैंपल देने से मना कर दिया। विवेचक को पूर्व मुख्यमंत्री ने बता दिया कि उनका आशय धमकाने का नहीं बल्कि समझाने का था। यूपी पुलिस ने मुलायम सिंह यादव को एक बार फिर से क्लीन चिट दे दी है। लखनऊ पुलिस ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आनंद प्रकाश सिंह की अदालत में इस मामले में अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करते हुए अदालत से आग्रह किया था कि वह शिकायतकर्ता आईपीएस अफसर ठाकुर के खिलाफ मुलायम के विरुद्ध ‘झूठी’ प्राथमिकी दर्ज कराने के आरोप में कार्यवाही का आदेश दे। अगर ठाकुर के खिलाफ आरोप सही पाए गए तो उन्हें छह माह की कैद और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा हो सकती है। अब अदालत ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 नवंबर 2018 की तारीख तय की है।

अमिताभ ठाकुर कहते हैं कि सरकार के अन्य विभागों की अपेक्षा पुलिस में तनाव अधिक है। पुलिसकर्मियों की आत्महत्या की बढ़ी घटनाओं के लिए कार्यस्थल का तनाव भी काफी हद तक जिम्मेदार है। अब यह पुलिस प्रशासन और सरकार की जम्मेदारी है कि ऐसे ठोस उपाय हों कि पुलिसकर्मी तनावग्रस्त न होने पाएं। पुलिस की ड्यूटी की समयावधि, उनकी सुविधाओं और उनके प्रति अधिकारियों के व्यवहार के बारे में गंभीरता से ध्यान देना होगा। उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध अनुसंधान इकाई (ईओडब्ल्यू) ने अमिताभ ठाकुर पर आय से अधिक संपत्ति के मामले की भी जांच की थी। बाद में उनको आरोपों से बरी कर दिया गया। विवेचना में उन्हें आय से अधिक संपत्ति का दोषी नहीं पाया गया।

एडीजी ईओडब्ल्यू अभय कुमार प्रसाद की ओर से सचिव गृह (गोपन) अनुभाग-8 को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार मुकदमे के विवेचक एसपी ईओडब्ल्यू डीपीएन पाण्डेय ने संकलित साक्ष्यों के विश्लेषण में पाया कि चेक अवधि के बीच अमिताभ ठाकुर की कुल आय 1.31 करोड़ थी जबकि इस अवधि में उनका पारिवारिक खर्च तथा संपत्तियों में निवेश 81.99 लाख रुपये था। रिपोर्ट के अनुसार अमिताभ की पत्नी नूतन ठाकुर की चेक अवधि में कुल आय 92.44 लाख रुपये थी जबकि उनका कुल व्यय 90.42 लाख रुपये होना पाया गया।

एक आरटीआई अर्जी पर मिले जवाब के आधार पर अभी इसी माह गत 05 अक्तूबर 2018 को नूतन ठाकुर ने दावा किया है कि बिना विभागीय सिफारिश लिए ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर से कई नियुक्तियां की गई हैं। समाज कल्याण विभाग में नियुक्तियां मुख्यमंत्री करते रहे हैं। अनुसूचित जाति, वित्त एवं विकास निगम विभाग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति भी सीधे ऊपर से हुई है। समाज कल्याण विभाग को इसी साल 17 अप्रैल को उच्चस्तर से आदेश प्राप्त हुआ था कि निगम के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति संबंधित पत्रावली प्रस्तुत की जाए। जिस पर अनुभाग ने लिखा कि इस विभाग में नियुक्तियां सीधे मुख्यमंत्री करते रहे हैं।

17 अप्रैल को ही प्रमुख सचिव तथा समाज कल्याण मंत्री के स्तर से पत्रावली मुख्यमंत्री को प्रस्तुत की गई, जिस पर बिना किसी विभागीय संस्तुति के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 17 अप्रैल को ही डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल को अध्यक्ष नामित करने के आदेश दे दिए। मुख्यमंत्री ने 17 अप्रैल को ही बिना किसी प्रक्रिया या विभागीय संस्तुति के विभाग से सीधे पत्रावली मंगवा कर पूर्व आईपीएस अधिकारी बृजलाल को उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति जनजाति आयोग का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। इसी तरह 7 अगस्त को विभाग को प्रमुख सचिव मनोज सिंह के जरिये ऊपर से एक सूची मिली, जिसमें दो उपाध्यक्ष तथा 16 सदस्य सहित 18 लोगों के नाम थे। प्रमुख सचिव ने उसी दिन प्रस्ताव भेजा, जिस पर मंत्री रमापति शास्त्री ने 8 अगस्त को हस्ताक्षर बनाए तथा मुख्यमंत्री ने 10 अगस्त को आदेश कर दिया। डॉ.नूतन कहती हैं कि आरटीआई में प्राप्त इन सूचनाओं से शासन के निर्णयों में उच्चस्तरीय राजनैतिक दबाव का स्वत: खुलासा हो जाता है।

यह भी पढ़ें: ‘संवाद’ से एक IAS अधिकारी बदल रहा है सरकारी हॉस्टलों की सूरत

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