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मिलें बेंजी से, जिनकी गायकी के मुरीद सिर्फ शाहरुख और ऋतिक ही नहीं बल्कि लता मंगेशकर भी हैं

जब उसके होंठ खुलते हैं, तो सुनने वाले कान हैरान रह जाते हैं और हैरानी का स्तर ऐसा कि जैसे किसी बुत में हरकत होने से पत्थरों के गीत गाने की खबर सुनने को मिल जाये।

प्रणय विक्रम सिंह
13th Apr 2017
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दर्द और खुशी का चोली-दामन का साथ होता है। दर्द जब अनहद होता है तब खुशी या सफलता लाजवाब ही नहीं, बल्कि चमत्कृत करने वाली होती है। अब ये चमत्कार नहीं तो और क्या है, कि जो अल्फाजों के मामले में इतनी गुरबत का शिकार हो कि अपना दर्द-ओ-ग़म भी किसी से न साझा कर सके, लेकिन जब वो माइक लेकर मंच पर उतरे तो सालों से सिले उसके होठों से सुर फूटने लगें।

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जब बेन्जी चार साल की थी तो उसकी मां ने देखा कि म्यूजिक सिस्टम में गीत बजने पर बेन्जी की आंख की पुतली में कुछ हलचल हुई। इसके बाद उन्होंने बेटी को संगीत सिखाना शुरू किया और उसे गायक बनाने की ठान ली।

2008 में मशहूर गायिका सुनिधि चौहान के साथ बेन्जी ने 'जब छाये मेरा जादू...' गीत पर सुर से सुर मिलाया और फिर कभी पलट कर नहीं देखा। बेन्जी को तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। उनकी आठ म्यूज़िक सीडी रिलीज़ हो चुकी हैं। अलग-अलग कार्यक्रमों में लता मंगेश्कर, शोभा मुद्गल, ऋतिक रोशन और शाहरुख खान ने की है बेन्जी की सीडी लॉन्च।

जब उसके होंठ खुलते हैं, तो सुनने वाले कान हैरान रह जाते हैं और हैरानी का स्तर ऐसा कि जैसे किसी बुत में हरकत होने से पत्थरों के गीत गाने की खबर सुनने को मिल जाये। ऐसी ही एक दास्तां है अॉटिज़्म से पीडित लड़की बेन्जी की। बेंजी अपने मायूस अभिभावकों के लिए उम्मीद की शमा की मानिन्द हैं, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब बेन्जी के अभिभावक खुद निराशा के अन्धेरे में कैद थे। बेन्जी जब तीन माह की थी तब कविता (बेन्जी की माँ) को पता लगा कि उनकी बेटी बेन्जी ऑटिज्म की शिकार है।

दरअसल जन्म के कई माह बाद तक जब बेन्जी हिलती-डुलती नहीं थी तो मां को उसके किसी गम्भीर बीमारी से पीडित होने का अहसास हुआ। वो बेन्जी को देश के सभी जाने-माने अस्पतालों में ले गयीं पर कुछ फायदा नहीं हुआ। इसके बाद कविता बेंजी को अमेरिका तक ले गईं, लेकिन डाक्टरों का कहना था कि बेन्जी पूरी जिन्दगी बेड पर अथवा ह्वील चेयर पर ही रह सकेगी। उस दौर में राष्ट्रीय स्तर पर बैडमिंटन और बास्केटबाल की खिलाड़ी रह चुकी बेन्जी की मां कविता कुमार ने हिम्मत नहीं हारी।

बेन्जी ने सात साल की उम्र में दिल्ली में त्रिवेणी कला संगम के अॉडिटोरियम में पहली बार राग यमन छेड़ा और पहला पुरस्कार जीता।

एम.एड की शिक्षा प्राप्त कर चुकी मां ने बेटी की खुद ही देखरेख की। जब बेन्जी चार साल की थी, तो मां ने देखा कि म्यूजिक सिस्टम में गीत बजने पर बेन्जी की आंख की पुतली में कुछ हलचल हुई। इसके बाद उन्होंने बेटी को संगीत सिखाना शुरू किया और उसे गायक बनाने की ठान ली। बेन्जी जब पांच वर्ष की थी तब श्री एम.एन रफी ने उसे संगीत की बुनियादी तालीम देने का बीड़ा उठाया, क्योंकि उनसे पहले अनेक संगीत गुरुओं ने सिखाने से ये कहते हुए मना कर दिया, था कि बेन्जी पर मेहनत करना व्यर्थ है। बाद में बेन्जी को बिमराव घराने के पण्डित रामजी मिश्रा ने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्रदान की।

संगीत ने असरदार दवा की तरह काम करना शुरू किया और शारीरिक-मानसिक रूप से दिव्यांग बेन्जी ने सात साल की उम्र में दिल्ली के त्रिवेणी कला संगम के अॉडिटोरियम में पहली बार राग यमन छेड़ा और पहला पुरस्कार जीता। 2008 में मशहूर गायिका सुनिधि चौहान के साथ उसने जब छाये मेरा जादू... गीत पर सुर से सुर मिलाया और फिर कभी पलट कर नहीं देखा।

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आज बेन्जी के गले में संगीत की देवी बसती हैं। हारमोनियम से लेकर सिन्थेसाइजर तक के की-बोर्ड पर उसकी उंगलियां शानदार तरीके से चलती हैं। म्यूजिक उसकी धड़कन बन चुका है। बेंजी ऑल इण्डिया रेडियो के चाइल्ड आर्टिस्टों में शुमार है। कोशिश नाम से बेंजी का एल्बम बाजार में आ चुका है। किसी भी स्पेशल चाइल्ड का ये पहला सोलो एल्बम है। कोशिश एल्बम के लिए उसे राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। इस उपलब्धि के लिए लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड्स में बेन्जी का नाम शामिल किया गया है।

वर्तमान में बेन्जी को तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। उनकी आठ म्यूजिक सीडी रिलीज हो चुकी हैं। अलग-अलग कार्यक्रमों में लता मंगेश्कर, शोभा मुद्ïगल, ऋतिक रोशन और शाहरुख खान ने बेन्जी की सीडी लांच की है। ताज महोत्सव, झांसी महोत्सव के अलावा देश के कई बड़े-बड़े शहरों में बेन्जी के स्टेज शो हो चुके हैं। समूचे मुल्क में आज तक बेन्जी एक हजार से ऊपर प्रस्तुति दे चुकी हैं।

वैसे तो बेन्जी की आयु 22 वर्ष है, लेकिन उनका मानसिक विकास 10 साल के बच्चे के बराबर है। उन्होंने शास्त्रीय संगीत (वोकल) में एमए कर लिया है। बेन्जी आज भी बहुत साफ नहीं बोल पाती, लेकिन संगीत में वह सामान्य बच्चों को भी पछाड़ देती हैं। बेन्जी की मां कविता कुमार कहती हैं कि ये सफर इतना आसान नहीं रहा। शुरू में लोग कहते थे कि जो बच्चा न कुछ समझता है, न बोलता है और न सुनता है उसे म्यूजिक सिखाने की कोशिश बेकार है। लेकिन म्यूजिक थेरेपी ने बेन्जी की दुनिया बदल दी। बकौल कविता इन बच्चों की कोई गलती नहीं होती, फिर ये क्यों भुगतें? इन्हें तो भगवान ने स्पेशल बनाया है। जरूरत है इन्हें समझने और अपनी जिन्दगी का हिस्सा बनाने की।

बेन्जी के हुनर के आम लोग ही मुरीद नहीं हैं, बल्कि स्वर कोकिला लता मंगेश्कर, आशा भोंसले, उदित नारायण, अदनान सामी से लेकर आनन्द जी तक खुले दिल से उसकी तारीफ कर चुके हैं। लेकिन उसे खासतौर पर ऋतिक रोशन पसन्द हैं। जब बेन्जी ऋतिक से मिली तो वह कह उठे-कोई मिल गया में मुझे एलियन से सुपरपावर मिली थी। वो फिल्मी कहानी थी लेकिन म्यूजिक की बदौलत तुमने तो असली जिन्दगी में भी कुछ वैसा ही मुकाम पा लिया है।

अपनी बेटी को धुन से संवारने वाली कविता स्पेशल चाइल्ड्स को हुनरमन्द बनाने के लिए दिल्ली में धुन फाउण्डेशन चलाती हैं। मां कविता का सपना है कि एक दिन बेन्जी बॉलीवुड में पहुंचकर अपना नाम रोशन करे।

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