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आपकी कहानियों के बीच मेरी अपनी एक कहानी

Shradha Sharma
19th Jan 2015
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हर इंसान की अपनी एक अलग कहानी होती है। कुछ लोगों की कहानियाँ बेहद दिलचस्प और रोमांचक हैं। कुछ कहानियाँ में दुःख-दर्द और पीड़ा ज्यादा है, तो कुछ में प्यार और खुशियाँ । कुछ ज़िंदगियाँ काफी चुनौती-भरी होती हैं। कुछ कहानियाँ बिलकुल ही अलग होती हैं - सबसे जुदा , अनोखी , अनूठी। अक्सर ऐसी ही कहानियाँ सालों तक लोगों के ज़ेहन में रहती हैं। महान हस्तियों की कहानियाँ, लोगों को प्रेरणा देने वाले कहानियाँ और अद्भुत -असाधारण घटनाओं से भरी कहानियाँ तो इतिहास के पन्नों में दर्ज़ हो जाती हैं।

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ये भी सच है कि कई लोगों की कहानियाँ आपस में मेल खाती हैं। इन कहानियों में कई सारी समानताएँ हो सकती हैं। लेकिन , हर कहानी अपने आपमें अलग हैं और उसका अपना महत्त्व है। ज़िन्दगी की इन कहानियों का महत्त्व बढ़ता है उन घटनाओं और प्रसंगों से जो ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्रभावित करती हैं, और उनसे जो ज्यादा से ज्यादा दिलों को छू जाती हैं।

हर इंसान की ज़िन्दगी में कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जिनका बहुत बड़ा महत्त्व होता। ये घटनायें अक्सर ज़िन्दगी को एक नयी दशा-दिशा देती हैं।सोच और दृष्टिकोण बदलती हैं। भविष्य का निर्धारण करती हैं।

अचानक ऐसी ही घटनाओं के बारे में मेरी दिलचस्पी बढ़ गयी थी। मैं लोगों से अक्सर इस तरह की घटनाओं के बारे में बात करती। इसी बातचीत के सिलसिले के दौरान मुझे नयी-नयी जानकारियां मिलीं। इन जानकारियों से जिज्ञासा और भी बढ़ती चली गयी।

मैंने एक प्रयोग करना शुरू किया। जब कभी मैं करीबी लोगों से मिलती तो एक काम ज़रूर करती। मैं इन लोगों से कहती कि वो कुछ पलों के लिए अपनी आँखें बंद कर लें और ऐसी ही कुछ घटनाओं को याद करें जिन्होंने उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव लाया है। एक ऐसा बदलाव जिससे ज़िन्दगी के मायने बदले , प्राथमिकताएं बदली , सोच-नज़रिया बदला, काम- तौर तरीके बदले। कई लोगों पर यह प्रयोग करने और कई लोगों से अकेले में बातें कर मैं एक बड़े नतीजे पर पहुँची थी।

नतीजा था - जीवन की इन बड़ी परिवर्तनकारी घटनाओं में एक समानता थी- विपरीत परिस्थितयों और कठिनाइयों के दौर में संघर्ष करते हुए आगे बढ़ना और फिर जीत हासिल करना।

जी हाँ , लोगों से उनकी बातचीत के ज़रिये किये अपने प्रयोग से मुझे यह पता चला कि जीवन में सकारात्मक बदलाव और असामान्य प्रगति इन्हीं विपरीत परिस्थितयों और परेशानियों से भरे दौर की देन है ।

मुझे एहसास हो गया कि कामयाबी का सबसे अच्छा रास्ता और ज़िन्दगी की असली मंज़िल अक्सर मुश्किलों-भरे समय में ही दिखाई देती है।

मुझे आज भी याद है वो दिन जब मेरे चहेते एक शख्स ने मुझे अन्धकार से भरा एक डिब्ब्ब दिया था। मुझे सालों लग गए थे इस बात को समझने में कि वो डिब्बा मुझे मेरे चहेते की ओर से दिया गया एक तोहफा था। एक बेशकीमती तोहफा जिसका महत्त्व सालों बाद समझ में आया था।

अन्धकार के महत्त्व को जानकर मैं माता काली के महत्त्व को भी अच्छी तरह से समझ गयी थी।

कई दूसरे लोगों की तरह ही मैं भी पहले माता काली को मौत की देवी समझती थी।

कई लोग आज भी माता काली को विनाश के प्रतीक के रूप में देखते हैं।

यही लोग माता काली को एक ऐसी विनाशक शक्ति के रूप में देखते हैं जो हमेशा परेशान करती हैं , दुःख-दर्द और पीड़ा देती हैं , विकास के रास्ते में अड़चने पैदा करती हैं। माता काली को कई लोग भयानक और डरावनी ही मानते हैं।

लेकिन , सच्चाई कुछ और ही है। माता काली दुर्गा माता का उग्र रूप हैं।

वो सिर्फ विनाश की देवी ही नहीं बल्कि समय , परिवर्तन और शक्ति की देवी हैं।

माँ काली शक्ति का श्रोत हैं।

वो अगर विनाश भी करती हैं तो उससे नयी शक्तियों और सृष्टियों का जन्म होता है।

माता काली दुष्ट शक्तियों का विनाश करती हैं। वो सीमित का विनाश कर असीमित को जन्म देती हैं।

माता काली उस जगह निवास करती हैं जहाँ मानव शरीर को पंचतत्व - वायु , अग्नि , जल , आकाश और पृथ्वी में विलीन किया जाता है। यानी माता काली का भी निवास श्मशान ही है। और इसी स्थान से माता काली लोगों को जीवन की पांच सबसे बड़ी बुराईयों - काम , क्रोध, लोभ , मोह और अहंकार से लड़ने की शक्ति प्रदान करती हैं। मन , वचन और काया को पवित्र रखकर जो माता काली का ध्यान करता है माता उसे इन पांच बुराईयों से मुक्त होने की शक्ति प्रदान करती हैं। इस शक्ति की वजह से ही इंसान अन्धकार से उजाले की ओर बढ़ने लगता है। इसी उजाले में उसे जीवन का असली ज्ञान मिलता है।

इस बात में दो राय नहीं कि विपरीत परिस्तिथियों और कठिनाईयों के दौर में भी इंसान बहुत कुछ सीखता है। यही समय संघर्ष करने,और जीवन के असली अर्थ को समझने की प्रेरणा देता है।

अगर मैं अपनी बात करूँ तो मेरे जीवन में अंधकार-भरे दिन कई सारे रहे हैं।

मैं ये कह सकती हूँ कि अन्धकार मेरा साथी रहा है। बचपन से ही कई सारे कटु अनुभव रहे हैं ।

उन दिनों तो मैं अन्धकार से घबरा जाती थी। उस समय ये पता नहीं था कि आने वाले दिनों में अंधकार बहुत कुछ सिखाएगा। ऐसा सिखाएगा कि ज़िन्दगी का सच्चा अर्थ ही समझ में आ जाएगा।

अन्धकार ये भी सिखाता रहा कि की ज़िन्दगी किस तरह से जीनी है, ज़िन्दगी में क्या करना ज़रूरी है और क्या नहीं।

वैसे तो ज़िन्दगी में अब तब कई बार टूटी हूँ , मुश्किलों के कई दौर से गुज़री हूँ , बड़ी-बड़ी परेशानियों का सामना किया है , लेकिन सबसे बड़ी मुश्किल कुछ साल पहले आयी। मैंने कभी सोचा भी न था कि ज़िन्दगी में इतने खराब और बुरे दिन देखने को मिलेंगे।

मैंने अपनी माँ को मौत से लड़ते देखा था। वो लड़ाई कोई मामूली लड़ाई नहीं थी ।असहनीय पीड़ा थी। दुःख था। उम्मीदें कम थीं , लेकिन जीने से लिए संघर्ष और मौत से लड़ाई जारी थी।

एक दिन वो रसोई घर में खाना बनाते समय फ़ोन पर बात कर रही थी , तभी दुर्घटनावश उनकी साड़ी में आग लग गयी।

उनका शरीर ७० फ़ीसदी झुलस गया था। इस दुर्घटना ने मेरी माँ को तो सदमा पहुँचाया था ही , मैं भी एक मायने में टूट चुकी थी । मैं अपनी माँ को बचाना चाहती थी , उन्हें एक बार फिर हँसते-खेलते देखना चाहती थी। लेकिन , मैं बेबस थी , अपनी माँ की कोई मदद नहीं कर सकती थी। माँ मौत से अपनी लड़ाई खुद लड़ रही थीं।

ऐसे लगने लगा था जैसे मैं अंधकार में घिर गयी हूँ। दूर-दूर तक रोशिनी की कोई गुंजाइश नहीं है।

मैं सहम गयी , घबरा गयी। अजीब-सा डर मन में घर कर गया था।

लेकिन, अचानक इसी बुरे दौर में एक विचार आया। विचार था - पूरी ताक़त और दृढ़ता के साथ विपरीत परिस्थितियों का सामना करने का संकल्प लेने का।

मैं ये संकल्प लिया भी। और संकल्प लेने के कुछ ही दिनों बाद जो हुआ उसे मैं अलौकिक घटना ही मानती हूँ।

मैंने ‘बर्न्स वार्ड’ में अपने आस-पास कई ऐसे लोगों को देखा जो आग की लपटों में झुलसे हुए थे। इन झुलसे हुए लोगों के हाथ थामने वाला कोई नहीं था। इनकी मदद करने वाला कोई आसपास नज़र नहीं आ रहा था। कोई उनके प्रति सहानुभूति भी नहीं जता रहा था। उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया था।

पता नहीं मुझमें अचानक क्या हुआ। मैं झुलसे हुए लोगों के पास गयी और उनसे बातचीत शुरू की।

इन लोगों के साथ समय गुज़ारते हुए मैंने उन्हें हंसने , बोलने , नाचने-गाने पर मजबूर किया।

इन लोगों की ख़ुशी देखकर मेरे मन में नया उत्साह जागा। अंधकार दूर होता नज़र आया। रोशनी बढ़ने लगी।

मेरी खुशी की उस समय कोई सीमा नहीं रही जब मैंने मेरी माँ को मुस्कुराते हुए देखा था।

वो शायद मेरे जीवन का सबसे ख़ुशी-भरा पल था ।

'बर्न्स वार्ड' में मैंने जो देखा, किया और सीखा उसने मेरी ज़िंदगी बदलकर रख दी। आग में झुलसकर मौत से लड़ते और ज़िन्दगी से संघर्ष करने वाले उन लोगों के बीच मेरे अनुभव ने मुझे एक नया इंसान बनाया था।

मैं तकलीफ में थी, मेरी पीड़ा दूसरों से कम नहीं थी, हर तरफ निराशा थी, नाउम्मीदी थी। फिर भी इसी अंधियारे-भरे समय में एक परिवर्तन हुआ। मैं अच्छी तरह जान गयी कि और पूरी ताकत, लगन और ईमानदारी से संघर्ष किया जाय तो विपरीत परिस्थितियों और मुश्किलों में भी एक ऐसी शक्ति हासिल की जा सकती है जिससे इस अद्वितीय जीत मिलेगी।

अब जब कभी मैं पीछे मुड़कर अपने अतीत की ओर देखती हूँ तो एहसास होता है कि मेरे संघर्ष ने ही मुझे "युअरस्टोरी डॉट डॉट कॉम" शुरू करने के लिए प्रेरित किया। ये वेबसाइट एक ऐसा मंच और ज़रिया है जहाँ आम आदमी से लेकर बड़ी बड़ी हस्तियां अपनी कहानियाँ लोगों के बीच पेश कर सकते हैं। ऐसी कहानियाँ जो दूसरों को प्रेरित करती हों ,संघर्ष करने और कभी निराश न होने की सीख देती हों। विपरीत परिस्थितियों और मुश्किलों का पूरी ताकत के साथ मुकाबला करने में उत्साह बढ़ाती हों। ऐसी जीवन गाथाएं जो असामान्य और अनूठी हों।

आपने मेरी कहानी पढ़ी। मेरी ही तरह आपकी अपनी कहानी होगी। मैं चाहती हूँ कि आप मेरी तरह ही दूसरों को अपनी कहानी बताएं। अगर एक व्यक्ति भी आपकी कहानी से प्रभावित होकर अपनी ज़िन्दगी में सकारात्मक बदलाव लाता है तो ये आपकी भी कामयाबी होगी।

पिछले ६ सालों से हम इस मंच पर कहानियाँ प्रस्तुत कर रहे हैं। अब तक पंद्रह हज़ार से ज्यादा कहानियाँ पेश हो चुकीं हैं। अमूमन हर दिन एक नयी कहानी इसमें जुड़ती जा रही रही।

अब, आपकी ओर से देर किस बात की है। अपनी कहानी तुरंत प्रस्तुत कीजिए। और, अगर आपके पास ऐसी कोई कहानी नहीं है जो यहाँ पेश की जा सके, तो ज़रूर सोचिये - क्यों आपके पास अपनी विजय-कहानी नहीं है और आप दूसरे लोगों को प्रेरित करने के लिए अब से क्या कुछ कर सकते हैं ?

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