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कारोबारी सुगमता की रिपोर्ट पर इंद्रा नूयी ने कहा, भारतीय अर्थव्यवस्था शानदार प्रगति पर

2nd Nov 2017
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पेप्सिको की चेयरपर्सन नूयी ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था शानदार प्रगति कर रही है और 21वीं सदी के जीवन की जरूरतों के अनुरूप खुद को ढाल रही है, खासकर जब बात डिजिटल बुनियादी ढांचे की आती है।

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दरअसल कई क्षेत्रों में भारत का प्रदर्शन पहले के मुकाबले बेहतर हुआ है और यही कारण है कि ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस में भारत की रैंकिंग सुधरी है।

विश्व बैंक की ओर से जारी होने वाली यह रिपोर्ट भारत के लिये कई मायने में महत्त्वपूर्ण है क्योंकि हाल के दिनों में कारोबारी सुगमता को सहज करने के लिये कई आर्थिक सुधार किये गए हैं। 

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस यानी कारोबारी सुगमता में भारत ने नई सफलता हासिल की है। वर्ल्ड बैंक द्वारा जारी की जाने वाली इस रिपोर्ट में भारत 30 पायदान ऊपर उछलकर 100वें नंबर पर पहुंच गया। इस रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए पेप्सिको की चेयरपर्सन इंद्रा नूई ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार विकास के पथ पर है और 21वीं सदी के जीवन की जरूरतों के अनुरूप खुद को ढाल रही है। 2014 में भारत की रैंकिंग 142 वहीं पिछले साल यह 130 हो गई थी।

नूयी ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था शानदार प्रगति कर रही है और 21वीं सदी के जीवन की जरूरतों के अनुरूप खुद को ढाल रही है, खासकर जब बात डिजिटल बुनियादी ढांचे की आती है। दरअसल कई क्षेत्रों में भारत का प्रदर्शन पहले के मुकाबले बेहतर हुआ है और यही कारण है कि ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस में भारत की रैंकिंग सुधरी है। जल्द बिजनेस शुरू करने के मामले में भारत 156वें स्थान पर पहुंच गया है। इसमें भारत की रैंकिंग में पहले के मुकाबले सुधार हुआ है।

दरअसल वर्ल्ड बैंक की इस रिपोर्ट में यह बताया जाता है कि कौन सा देश कारोबार आरंभ करने की दृष्टि से कितना बेहतर है? विश्व बैंक समूह द्वारा बनाया गया यह सूचकांक व्यावहारिक अनुसंधान पर आधारित है। उच्च रैंकिंग (कम संख्यात्मक मान) यह दिखाता है कि व्यवसाय करने के लिये सरल प्रक्रिया विद्यमान है और सम्पदा के अधिकारों की भी सुरक्षा की गई है। यह सूचकांक इन 10 उप-निर्देशों के औसत पर आधारित है।

विश्व बैंक की ओर से जारी होने वाली यह रिपोर्ट भारत के लिये कई मायने में महत्त्वपूर्ण है क्योंकि हाल के दिनों में कारोबारी सुगमता को सहज करने के लिये कई आर्थिक सुधार किये गए हैं। यदि इन सुधारों के बावजूद भारत की रैकिंग नहीं सुधरती, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये शुभ संकेत नहीं होता। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष की रैंकिंग 190 देशों में भारत 130वें स्थान पर रखा गया था। क्रेडिट रेटिंग एजेंसियाँ द्वारा दी जाने वाली रेटिंग में भी संबंधित देश की ईज ऑफ डूइंग रैंकिंग का ध्यान रखा जाता है।अतः भारत के लिये 30 स्थानों की यह छलांग महत्त्वपूर्ण है।

वहीं उद्योगों को बिजली कनेक्शन देने के मामले में भारत 129वें नंबर पर पहुंच गया है। दिवालिया मामलों के निपटान के मामले में भारत 33 स्थान की छलांग लगाकर भारत 103 पर पहुंच गया है। जहां एक ओर बिजनेस के लिये लोन लेना भी आसान हुआ है, वहीं शेयरधारकों की हितों की रक्षा के लिये अहम कदम उठाए गए हैं, साथ में टैक्स पेमेंट सिस्टम को आसान बनाने की दिशा में भी सुधारों को बल मिला है।

यह भी पढ़ें: भारत में ड्रोन के इस्तेमाल के लिए लेना होगा लाइसेंस, जल्द बनेंगे नियम

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