संस्करणों
विविध

जमशेदपुर बॉय 'प्रशांत रंगनाथन' हैं देश के उभरते हुए वैज्ञानिक

अमेरिका में इंटेल साइंस अवार्ड जीतकर झारखंड (जमशेदपुर) के प्रंशात रंगनाथन ने देश का मान बढ़ाया।

महेंद्र नारायण सिंह यादव
22nd May 2017
Add to
Shares
6
Comments
Share This
Add to
Shares
6
Comments
Share

"जमशेदपुर के प्रशांत रंगनाथन ने इंटेल इंटरनेशनल साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर में पर्यावरणीय अभियांत्रिकी श्रेणी में शीर्ष पुरस्कार जीता है। छात्र प्रशांत रंगनाथन ने ये कमाल 'कीटनाशकों के जैविक विघटन' प्रोजेक्ट के जरिए किया है।"

image


प्रशांत रंगनाथन जमशेदपुर के कार्मेल जूनियर कॉलेज में पढ़ते हैं। उनकी परियोजना का नाम- ‘बायोडिग्रेडेशन ऑफ क्लोरोपिरिफोस यूजिंग नेटिव बैक्टीरिया’ है। इसके तहत किसानों को कीटनाशक के इस्तेमाल न करने की सलाह दी जाती है।

अमेरिका में हुई इंटेल इंटरनेशनल साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर प्रतियोगिता में दुनिया भर से करीब 1700 छात्र शामिल हुए थे, जिनमें भारत से करीब 20 हाईस्कूल छात्र थे। इस प्रतियोगिता में झारखंड, जमशेदपुर के प्रशांत रंगनाथन ने पर्यावरणीय अभियांत्रिकी श्रेणी में शीर्ष पुरस्कार जीता है। भारतीय मूल के अन्य छात्रों ने भी सराहनीय प्रदर्शन किया। चार भारतीय- अमेरिकी मूल के छात्रों ने विभिन्न श्रेणियों में शीर्ष पुरस्कार जीतने में सफलता पाई है। प्रशांत रंगनाथन जमशेदपुर के कार्मेल जूनियर कॉलेज में पढ़ते हैं। उनकी परियोजना का नाम- ‘बायोडिग्रेडेशन ऑफ क्लोरोपिरिफोस यूजिंग नेटिव बैक्टीरिया’ है। इसके तहत किसानों को कीटनाशक के इस्तेमाल न करने की सलाह दी जाती है।

प्रशांत का कहना है, 

'मेरे प्रोजेक्ट से कीटनाशकों का जैविक विघटन करने में किसानों को मदद मिलेगी। कीटनाशक इस समय पूरे देश में छा गए हैं लेकिन किसानों को इनका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मेरे प्रोजेक्ट से कीटनाशकों से होने वाले साइड इफेक्ट से बचने में मदद मिलेगी। पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार झारखंड आदि राज्यों में अत्यधिक कीटनाशकों के इस्तेमाल से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर विपरीत असर पड़ रहा है।'

भारतीय मूल के छात्रों के सराहनीय प्रदर्शन पर इंटेल के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा,

'भारतीय और भारतीय अमेरिकियों ने आज धूम मचा दी।'

वर्जीनिया के रहने वाले प्रतीक नायडू ने कंप्यूटेशनल बायोलॉजी एंड बायोइंफोरमेटिक्स, ओरेगन के एडम नायक ने पृथ्वी एवं पर्यावरण विज्ञान, पेंसिलवेनिया के कार्तिक यग्नेश ने गणित और कनेक्टिकट के राहुल सुब्रह्मण्यम ने माइक्रोबॉयोलॉजी श्रेणियों में पुरस्कार जीते।

अद्भुत वैज्ञानिक प्रतिभा के धनी प्रशांत पहले भी कई बार अपना लोहा मनवा चुके हैं। 2015 में उनके प्रोजेक्ट नैनो- वेजिस: आयरन ऑक्साइड नैनो- पार्टिकलस एस ग्रोथ बूसटर्स इन क्रॉप्स को गूगल साइंस फेयर में सलेक्ट किया गया था। इसमे बताया गया था, कि आयरन ऑक्साइड के सूक्ष्म कण कैसे फसल को बढ़ावा देते हैं। प्रशांत ने अपनी शोध के लिए गेहूं और बारली के पौधों को चुना था। उन्होंने बताया था, कि आयरन ऑक्साइड के सूक्ष्म कणों और पानी का मिश्रण बनाकर इन पौधों पर डाला गया तथा अन्य पौधों पर पानी, गोबर और अन्य मिश्रण डाले गए। परीक्षण में पाया गया कि गेहूं और बारली की वृद्धि 50 से 100 फीसदी तक हुई, जबकि अन्य पौधों पर ऐसा विकास देखने को नहीं मिला। 

ये भी पढ़ें,

सोशल साइट बैन के बाद 16 साल के लड़के ने बनाया ‘कैशबुक’

Add to
Shares
6
Comments
Share This
Add to
Shares
6
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags

Latest Stories

हमारे दैनिक समाचार पत्र के लिए साइन अप करें