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9वीं में पढ़ने वाली लड़की ने तैयार की बारिश से बिजली बनाने की डिवाइस

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11th Jul 2018
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अजरबैजान की रहने वाली रेगान जामालोवा ने एक ऐसी डिवाइस बना दी है जो बारिश की बूंदों से बिजली बना सकती है। जामालोवा ने इसे रेनर्जी का नाम दिया है। 

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इससे बनी बिजली को बैटरी में संरक्षित कर लिया जाता है जिसे फिर घरों में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि अभी यह सिर्फ एक प्रोटोटाइप है जिसमें केवल 7 लीटर पानी आ सकता है। 

बालमन के भीतर पनपे विचार इस दुनिया को बदलने का माद्दा रखते हैं। कई प्रसिद्ध वैज्ञानिकों ने कौतूलहवश ही नए-नए अविष्कार किए हैं। ऐसे ही एक 15 साल की लड़की ने बारिश के पानी से बिजली बनाने का आइडिया खोज निकाला है। अजरबैजान की रहने वाली रेगान जामालोवा ने एक ऐसी डिवाइस बना दी है जो बारिश की बूंदों से बिजली बना सकती है। जामालोवा ने इसे रेनर्जी का नाम दिया है। 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली जामालोवा ने अपने पिता से बातचीत करते हुए पूछा था कि जब हवा से बिजली बन सकती है तो बारिश से क्यों नहीं।

इस सवाल पर गंभीरता से सोचते हुए जामालोवा ने अपनी दोस्त जहरा को भी साथ लिया और बारिश से बिजली बनाने की डिवाइस तैयार करने में लग गई। इस काम में दोनों लड़कियों को उनके फिजिक्स अध्यापक ने भी काफी मदद की। उनका आइडिया इतना अच्छा था कि अजरबैजान की सरकार ने उन्हें 20 हजार डॉलर रुपये का अनुदान भी दिया। बारिश से बिजली बनाने वाली यह डिवाइस 9 मीटर लंबी है जिसके चार हिस्से हैं- रेनवॉटर कलेक्टर, वॉटर टैंक, इलेक्ट्रिक जेनरेटर और बैटरी।

टैंक में कलेक्टर के माध्यम से पानी भरता है तो वह धीरे-धीरे नीचे आता है जिससे जेनरेटर चलता है और बिजली उत्पन्न होती है। इससे बनी बिजली को बैटरी में संरक्षित कर लिया जाता है जिसे फिर घरों में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि अभी यह सिर्फ एक प्रोटोटाइप है जिसमें केवल 7 लीटर पानी आ सकता है। लेकिन फिर भी इससे इतनी बिजली बन जाती है कि 3 एलईडी लाइट्स आसानी से जल सकती हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इस तरीके से बनाई गई बिजली पूरी तरह से नवीकरणीय होती है और इससे किसी भी तरह का प्रदूषण नहीं होता।

जामालोवा ने कहा कि हमने रेनर्जी से बिजली बनाने का फैसला किया जिससे उन देशों में बिजली की कमी की समस्या का समाधान किया जा सकता है जो विकसित नहीं हुए हैं। दुनिया में कई देश ऐसे हैं जहां सालभर बारिश होती है। फिलिपीं, मलेशिया और भारत जैसे देशों ने इस प्रोटोटाइप पर काम करने के लिए अजरबैजान की सरकार से संपर्क भी किया है।

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