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जिनके पास नहीं हैं स्कूल उनके पास हैं दिल्ली वाले मो. नईम

जो बच्चे नहीं जा पाते हैं स्कूल उन्हें पढ़ातें हैं मो. नईम

Manshes Kumar
10th Aug 2017
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पुरानी दिल्ली के जामा मस्जिद इलाके में सक्रिय दिल्ली यूथ वेलफेयर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट नईम भी ऐसे ही शख्स हैं जो बच्चों की पढ़ाई को लेकर खासे चिंतित रहते हैं। कई मौकों पर वह खुद से बच्चों को पढ़ाने की पहल करते हैं।

<b>मोहम्मद नईम (फोटो : साभार दिल्ली यूथ वेलफेयर एसोसिएशन)</b>

मोहम्मद नईम (फोटो : साभार दिल्ली यूथ वेलफेयर एसोसिएशन)


नईम की पहल पर ही पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को अब RWA स्कूलों में पहुंचाएगी। यह पहल पुरानी दिल्ली से ही शुरू हुई है। 

अभी तक यह RWA अपने-अपने इलाकों में कुछ गिने-चुने बच्चों या जानकारी में आने वाले बच्चों को पढ़ाती थी। पर अब इलाके में सक्रिय करीब 30 से अधिक RWA ने एक हजार स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से पढ़ाने का निर्णय लिया है।

देश की राजधानी दिल्ली में कई इलाके ऐसे हैं जहां बच्चें स्कूल नहीं जा पाते या किन्हीं कारणों से बीच में ही स्कूल छोड़ देते हैं। ऐसे बच्चों को फिर से स्कूल भेजने का काम दिल्ली के विभिन्न इलाकों में सक्रिय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) द्वारा किया जाता है। पुरानी दिल्ली के जामा मस्जिद इलाके में सक्रिय दिल्ली यूथ वेलफेयर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट नईम भी ऐसे ही शख्स हैं जो बच्चों की पढ़ाई को लेकर खासे चिंतित रहते हैं। कई मौकों पर वह खुद से बच्चों को पढ़ाने की पहल करते हैं।

पुरानी दिल्ली में ऐसे इलाके हैं जहां अधिकांश लोग अशिक्षित हैं। यहां अधिकतर मजदूरों की बस्तियां हैं जहां शिक्षा की कमी होने के कारण लोग अपनी भावी पीढ़ी के जीवन में पढ़ाई को ज्यादा तवज्जो नहीं देते हैं। नईम की पहल पर ही पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को अब RWA स्कूलों में पहुंचाएगी। यह पहल पुरानी दिल्ली से ही शुरू हुई है। अभी तक यह RWA अपने-अपने इलाकों में कुछ गिने-चुने बच्चों या जानकारी में आने वाले बच्चों को पढ़ाती थी। पर अब इलाके में सक्रिय करीब 30 से अधिक RWA ने एक हजार स्कूल छोड़ चुके बच्चों को फिर से पढ़ाने का निर्णय लिया है।

<i><b>गरीब बच्चों का स्कूल</b></i>

गरीब बच्चों का स्कूल


स्थानीय प्रशासन के अनुसार पिछले वर्ष इन RWA ने 300 से 400 ऐसे बच्चों का फिर से स्कूलों में एडमिशन करवाया। अब इन्होंने संगठित रूप में कदम उठाया है। इसे स्कूल प्रबंधन कमेटी का नाम दिया गया है। 

नईम के मुताबिक, 'कई लड़के गली-कूचे में असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर गलत संगत में पड़ जाते हैं। ऐसे बच्चों के बीच RWA ने अपनी सक्रियता को बढ़ाना शुरू किया है। असामाजिक गतिविधियों में फंसे करीब 25 युवाओं को RWA ने पिछले दो सालों में कॉलेज तक पहुंचाया है।' स्थानीय प्रशासन के अनुसार पिछले वर्ष इन RWA ने 300 से 400 ऐसे बच्चों का फिर से स्कूलों में एडमिशन करवाया। अब इन्होंने संगठित रूप में कदम उठाया है। इसे स्कूल मैनेजमेंट कमेटी का नाम दिया गया है। इसके तहत प्रत्येक इलाके-मोहल्ले में ऐसी कमेटी का गठन किया जाएगा। पांच से छह सदस्य ऐसे बच्चों की जानकारी RWA को देंगे। जिसके बाद संबंधित RWA बच्चों और उनके परिवारों से संपर्क कर उन्हें शिक्षा एवं उसके महत्व पर जागरूक करेगी।

सामाजिक कार्यकर्ता एवं दरियागंज वेलफेयर एसोसिएशन की सीनियर मेंबर तुबा खान ने कहा कि बच्चों से पहले उनके पैरेंट्स को अवेयर करने की जरूरत है। कुछ परिवारों ने बताया कि आर्थिक तंगी एवं अधिक बच्चे होने के कारण वह अपने बच्चों को पढ़ाने में असमर्थ हैं। जिस पर RWA मदद करेगी। ऐसे परिवारों के बच्चों को सिर्फ पढ़ाने का खर्च का एसोसिएशन उठाएगी।

जामा मस्जिद रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय ढींगरा ने बताया कि अभी तक वह 60 बच्चों का एडमिशन करवा चुके हैं। इन्हीं बच्चों ने बताया कि उनके आस-पास ऐसे कई बच्चे हैं जो स्कूल नहीं जाते हैं। गली कोताना वेलफेयर एसोसिएशन के मेंबर अरशद ने कहा कि एक बार ही इन बच्चों को स्कूल भेज देने से काम पूरा नहीं होगा। इन पर लगातार निगरानी रखनी होगी।

पढ़ें: 7वीं फेल ने खड़ी कर ली 100 करोड़ की कंपनी

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