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कोरियर कंपनियों से मुकाबला करेगा डाक विभाग, पोस्टमैन होंगे हाईटेक

30th Aug 2017
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बदलते वक्त में पोस्टमैन का सही उपयोग भी हो पाएगा। बाजार से कंपटिशन के लिए पोस्टल डिपार्टमेंट ने हाल के दिनों में कई योजना शुरू की है।

फोटो साभार: यूट्यूब

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पोस्टमैन तो अब भी मोहल्लों में आते हैं और डाक भी बांटते हैं ,लेकिन अब वो पहले जैसी 'अपनों' की चिट्ठियां अब नहीं आतीं। हां पर जरूरत की कई सारी डाक तो अब भी पोस्टमैन लाता ही है। इन पोस्टमैनों का काम पहले की अपेक्षा में भले ही कम हो गया हो, लेकिन सरकार इन्हें हाईटेक करने में जुटी है। केंद्र सरकार 100 दिनों में सभी पोस्टमैन को जीपीएस से लैस कर देगी। इसके बाद पोस्टमैन का अन्य सरकारी सेवाओं में ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया जा सकता है। अब कोरियर कंपनियों से मुकाबला करने के लिए डाक विभाग नई रणनीति पर काम कर रहा है।

सरकार ऐसे पोस्ट ऑफिस की लिस्ट बना रही है जहां चिट्ठी, पार्सल या मनीऑर्डर पहुंचाने का दबाव कम है। इन जगहों के पोस्टमैन को दूसरे कामों में इस्तेमाल किया जाएगा। सभी पोस्टमैन को जीपीएस युक्त सिस्टम देने के बाद अब हर कोई अपने डाक को रियल टाइम ट्रैक कर सकता है। ड्यूटी के वक्त वह कहां और किस पार्सल या लेटर की डिलिवरी कर रहा है, इसकी रियल टाइम ट्रैकिंग संभव है। इसके अलावा डाक पाने वाले को भी कोरियर कंपनियों के जैसे तुरंत मैसेज पहुंच जाएगा कि उसका डाक कौन पोस्टमैन पहुंचाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अगले साल जनवरी से इसे पूरे देश में लागू करने का प्लान है। डाक विभाग के निशाने पर ऐसी ऑनलाइन कंपनियां हैं जो डिलिवरी सिस्टम के अभाव में टियर थ्री सिटी या गांवों में अपना प्रॉडक्ट नहीं पहुंचा पा रही हैं। ऐसे में सरकार का तर्क है कि वह अगर अपने डिलिवरी सिस्टम आउटसोर्स करें तो पोस्टल डिपार्टमेंट को बड़ी कमाई होगी। बदलते वक्त में पोस्टमैन का सही उपयोग भी हो पाएगा। बाजार से कंपटिशन के लिए पोस्टल डिपार्टमेंट ने हाल के दिनों में कई योजना शुरू की है।

डाक विभाग ने नामी गिरामी ऑनलाइन कंपनियों से समझौते भी किए हैं जो लोगों तक सामान पहुंचाने में मदद करेंगी। दिल्ली और मुंबई में पायलट प्रॉजेक्ट के तौर पर इस सिस्टम के इस्तेमाल के बाद जनवरी से इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया। पोस्टल डिपार्टमेंट ने अब तक लगभग डेढ़ लाख जीपीएस मशीनें पोस्टमैन को उपलब्ध दी हैं। 100 दिनों के अंदर देश के सभी पोस्टमैन को ये मशीनें दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

यह भी पढ़ें: स्वदेशी आंदोलन की वजह से कैसे जन्म हुआ था पार्ले जी का?

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