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'जो तुम्हें नहीं मिला, वही तुम्हें दौड़ाएगा और वहीं से मिलेगी सफलता की राह ’

2nd Oct 2015
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कई बार जीवन में आने वाली दिक्कतें और चुनौतियां ही किसी बड़े काम को करने की राह प्रशस्त करती हैं और यह राह जितनी मुश्किल होती है अंजाम उतना ही सुखद एवं आनंददायी होता है। 

कल ही की बात है बेंगलूरू में जब मैं अपनी गाड़ी से जा रही थी तो ट्रैफिक इतना ज्यादा था कि गाड़ी मात्र 10 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चल रही थी। इस बीच मैने सोचा कि क्यों न समय का सदुपयोग किया जाए और कुछ छोटे-मोटे काम फोन से ही कर लिए जाएं लेकिन हमेशा की तरह फोन में सिग्लन की दिक्कत आने लगी। एक तो सड़क पर जाम ऊपर से फोन का न लगना ये सब काफी खीज भरा था। यह पहला दिन नहीं था जब मुझे इन चीजों का सामना करना पड़ा हो ऐसा बहुत बार हुआ है। जहां भारत में एक तरफ फोन की कंपनियां 3जी की बातें करती हैं वहीं बेंगलूरू जैसे शहर में जो भारत की टेक कैपिटल के नाम से भी जाना जाता है वहां निरंतर कॉल ड्रॉप होना काफी निराशाजनक बात है।

भारत काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है यहां तकनीक पर काफी जोर दिया जा रहा है और यहां के छात्र पूरी दुनिया में अपने हुनर से सबको प्रभावित कर रहे हैं, लेकिन यहां पर एक युवा उद्यमी के लिए काम करना कई बार काफी परेशानियों भरा बन जाता है। यहां नौकरशाही और लालफीताशाही के चलते दिक्कतें तो आती ही हैं साथ ही बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी होना भी तकलीफदेय सिद्ध होता है। एक युवा उद्यमी होने का नाते यह सब चीजें मुझे भी काफी निराश करती हैं और इन सब से मैं भी कई बार काफी निराश हो जाती हूं लेकिन इसके साथ ही मुझे यह भी पता है कि यह सब चीजें मेरे अच्छे के लिए ही हैं और यह सब दिक्कतें मेरे आगे बढ़ने के लिए सबसे मजबूत सीढ़ियां हैं। हैरान हो गए न कि मैं क्या बोल रही हूं तो चलिए आपसे एक अनुभव साझा करती हूं।

स्कूल के बाद जब मैं पटना से दिल्ली में आई और मेरा एड़मीशन सेंट स्टीफन्स कॉलेज में हुआ तो मैं काफी खुश थी। स्कूल में मैं हमेंशा डिबेट और बाकी प्रतियोगिताओं में भाग लेती और उन्हें जीतती आई हूं। कॉलेज में भी मैने डिबेट में भाग लेने की सोची लेकिन वहां पर मेरा सलेक्शन तक नहीं हुआ और इसका कारण था कि मुझे उनके कई बेसिक चीजों और उनके नियमों के बारे में पता तक नहीं था। इस हार ने मुझे काफी निराश किया। गर्मियों में जब मैं वापस पटना गई तो अपनी स्कूल की टीचर रेखा श्रीवास्तव से मिली और मैने उन्हें सब चीजों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया और कहा कि हमारा स्कूल पटना के सबसे बहतरीन स्कूलों की श्रेणी में आता है लेकिन यहां पर बच्चों को अच्छा ट्रेन नहीं किया जाता कि वो किसी प्रतियोगिता को जीत सकें।

उन्होंने मुझे पूरा सुना और फिर कहा कि ‘जो तुम्हें नहीं मिला, वही तुम्हें दौड़ाएगा’ और इससे तुम्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी और तुम्हारी जीतने की चाहत बढ़ जाएगी।

रेखा मैडम के यह वाक्य सन 1999 से लेकर आज तक मुझे प्रेरणा दे रहे हैं। जो चीज मेरे पास नहीं है उसे पाने की चाह ही मुझे सदैव आगे बढ़ने की ओर अग्रसर कर रही है । मुझे अब समझ आ चुका है कि दर्द मिलेगा तभी खुशी की असली कीमत हम जान सकेंगे, और यह भी सच है कि असफलता ही मुझे सफल होने के लिए प्रेरित करती रही है। मैं सभी उद्यमियों को यही सलाह दूंगी कि हम सबके लिए भारत में बहुत कुछ करने के लिए है। हम सभी को चुनौतियों को सकारात्मक रूप से लेना चाहिए व उनपर काम करते रहना चाहिए हम दुनिया के सबसे बेहतरीन मुल्क में रह रहे हैं जहां हमारे पास आगे बढ़ने के काफी अवसर हैं बस हमें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते रहना है और खूब मेहनत करनी है। हमारे प्रयास केवल हमें ही नहीं बल्कि कई और लोगों की जिंदगियों में भी बदलाव ला सकते हैं और देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकते हैं। भारत में कई दिक्कतें तो हैं लेकिन भारत एक बहुत बड़ा मार्केट भी है जहां आप बहुत कुछ नया कर सकते हैं। इसीलिए सकारात्मक दृष्टिकोण को साथ आगे बढ़िए और आप खुद महसूस करेंगे कि हम सबसे बेहतर हैं।


(यह लेख मूलत: अंग्रेजी में योर स्टोरी की एडिटर-इन-चीफ श्रद्धा शर्मा द्वारा लिया गया है)

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