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भारत के हेल्थ केयर सेक्टर की तस्वीर को किस तरह नए आयाम दे रहा टेलिमेडिसिन

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19th Aug 2018
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 डॉक्टरों और मरीज़ों के इतने बेहतर अनुपात के बावजूद, भारत के तमाम छोटे शहरों और ग्रामीण समुदायों तक उम्दा दर्जे की मेडिकल सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित नहीं की जा सकी है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ज़्यादातर देश के बड़े और उम्दा डॉक्टर्स, बड़े शहरों में ही प्रैक्टिस को तवज्जो देते हैं।

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उदाहरण के तौर पर अगर गांव में रहने वाले एक मरीज़ को अपना नी-रिप्लेसमेंट (घुटने का प्रत्यारोपण) करवाना है तो उसे बार-बार राजधानी दिल्ली जाकर डॉक्टरों के क्लीनिक के चक्कर लगाने या परेशान होने की ज़रूरत नहीं है।

1953 में भारत में डॉक्टर और मरीज़ों के अनुपात की स्थिति बेहद भयावह थी। हालात कुछ ऐसे थे कि एक डॉक्टर पर 6,300 मरीज़ों का दायित्व था। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित अनुपात 1:1,000 का है। 50 के दशक से अभी तक भारत ने इस स्थिति को बहुत हद तक सुधार लिया है और देश में डॉक्टरों की संख्या में 17 फ़ीसदी बढ़ोतरी हुई है। अब यह अनुपात 1:921 तक पहुंच चुका है। डॉक्टरों और मरीज़ों के इतने बेहतर अनुपात के बावजूद, भारत के तमाम छोटे शहरों और ग्रामीण समुदायों तक उम्दा दर्जे की मेडिकल सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित नहीं की जा सकी है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ज़्यादातर देश के बड़े और उम्दा डॉक्टर्स, बड़े शहरों में ही प्रैक्टिस को तवज्जो देते हैं।

टेलिमेडिसिन ने इस परिदृश्य को बदलने में अहम भूमिका निभाई है। टेलिमेडिसिन, तकनीक की मदद से देश के सबसे अच्छे डॉक्टरों को साथ ला रहा है और उनकी विशेषज्ञता का लाभ देश के पिछड़े इलाकों में रहने वाली आबादी तक पहुंचा रहा है।

टेलिमेडिसिन क्या है?

टेलिमेडिसिन क्लीनिक पर मरीज़, वेब कॉन्फ़्रेस के माध्यम से देशभर के विशेषज्ञों से बातचीत कर सकते हैं और उनसे अपनी समस्याएं साझा कर सकते हैं। आपको बता दें कि टेलिमेडिसिन क्लीनिक पर, हर वक़्त कोई न कोई डॉक्टर या नर्स की उपलब्धता रहती है। टेलिमेडिसिन के सेटअप का लाभ यह है कि उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में रहने वाला व्यक्ति भी नई दिल्ली के बड़े ऑर्थोपैडिक सर्जन से अपना इलाज करवा सकता है। 

उदाहरण के तौर पर अगर गांव में रहने वाले एक मरीज़ को अपना नी-रिप्लेसमेंट (घुटने का प्रत्यारोपण) करवाना है तो उसे बार-बार राजधानी दिल्ली जाकर डॉक्टरों के क्लीनिक के चक्कर लगाने या परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। वह मरीज़ टेलिमेडिसिन की मदद से दिल्ली में बैठे स्पेशलिस्ट से संपर्क कर सकता है और सर्जरी के लिए एक समय निर्धारित कर सकता है। निर्धारित समय पर मरीज़ को दिल्ली जाना होता है और एक ही दौरे में सर्जरी पूरी हो जाती है। इतना ही नहीं, सर्जरी के बाद भी मरीज़ को डॉक्टर से मिलने के लिए बार-बार दिल्ली जाने की ज़रूरत नहीं बल्कि सर्जरी के बाद के मरीज़, सारे परामर्श टेलिमेडिसिन क्लीनिक से ही ले सकता है।

भारत में मेडिकल एक्सपर्ट्स की कोई कमी नहीं है, लेकिन साथ में, इस तथ्य पर गौर करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि भारत का क्षेत्रफल और आबादी भी बेहद अधिक है। इसका अर्थ यह है कि देश की कई करोड़ आबादी दूरस्थ इलाकों में रह रही है और उनके पास मूलभूत सुविधाओं तक का अभाव है। टेलिमेडिसन इस अभाव को दूर करने की दिशा में ही सकारात्मक काम कर रहा है। टेलिमेडिसिन की मदद से भारत के उम्दा डाक्टर्स, हज़ारों किलोमीटर दूर स्थित मरीज़ों तक अपनी सुविधाएं पहुंचा सकते हैं। टेलिमेडिसिन की रिसर्च इतनी विधिवत होती है कि इससे जुड़े 70 प्रतिशत मरीज़ों को अपने इलाज के लिए डॉक्टर के प्रत्यक्ष रूप से मौजूद होने की कोई ज़रूरत नहीं।

भारतीय मूल के डॉक्टर्स पूरी दुनिया में मिसाल क़ायम कर रहे हैं। क्षेत्र कोई भी हो, प्रतिभा के मामले में भारत, दुनिया के किसी देश से पीछे नहीं है। लेकिन, एक पहलू पर हमें विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है और वह है, मानवीय संसाधनों का उपयुक्त इस्तेमाल। इसके अभाव में ही प्रतिभाशाली युवा आमतौर पर बड़े शहरों में ही बस जाते हैं। टेलिमेडिसिन ने इस चुनौती का भी हल खोज निकाला है और अब देश के किसी भी कोने से डॉक्टर अपने मरीज़ को देख सकते हैं और उनसे कनसल्ट कर सकते हैं। टेलिमेडिसिन ने अच्छी मेडिकल सुविधाओं के रास्ते से भौतिक दूरी के रोड़े को ख़त्म कर दिया है।

कुछ लोगों का मत यह है कि टेलिमेडिसिन की कार्यप्रणाली से उतना कारगर इलाज संभव नहीं है, जितना कि एक डॉक्टर से प्रत्यक्ष रूप से मिलकर परामर्श लेने के फलस्वरूप हो पाता है। इस मत के जवाब आंकड़ों के माध्यम से देना ही बेहतर होगा। आपको बता दें कि विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक़, जितने भी मरीज़ों ने टेलिमेडिसिन के ज़रिए डॉक्टरों से कनसल्ट किया, उनमें से सिर्फ़ 15-16 प्रतिशत मरीज़ों को ही परामर्श के बाद इलाक के लिए किसी हॉस्पिटल के चक्कर लगाने पड़े। इन आंकड़ों के माध्यम से साफ़ ज़ाहिर होता है कि टेलिमेडिसिन की कार्यप्रणाली कितनी प्रभावी है।

भारत एक ऐसा देश है, जहां पर योग्यता की कोई कमी नहीं है बल्कि हमारे देश फ़िज़िकल इन्फ़्रास्ट्रक्चर से संबंधित कई चुनौतियों से जूझ रहा है। टेलिमेडिसिन इन चुनौतियों को पार करने की दिशा में प्रभावी काम कर रहा है। इतना ही नहीं, टेलिमेडिसिन विकासशील देशों के लिए एक नए मेडिकल सर्विस डिलिवरी मॉडल की संभावनाओं की ओर इशारा कर रहा है और भारत इसके प्रणेता की भूमिका अदा कर सकता है। उदाहरण के तौर पर यह मॉडल अफ़्रीका और मध्य पूर्व में भी काफ़ी प्रभावी हो सकता है क्योंकि दोनों ही क्षेत्रों में उम्दा दर्जे के फ़िज़ीशियन्स की भारी कमी है।

यह भी पढ़ें: घर शिफ़्ट करने की मशक़्क़त को आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से आसान बना रहा यह स्टार्टअप

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