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एक अस्पताल ऐसा, जहां शुक्रवार को पैदा होने वाली लड़कियों को दवा के अलावा मिलती हैं सारी सुविधाएं मुफ्त

Niraj Singh
27th Jan 2016
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शुक्रवार को जन्म लेने वाली लड़कियों के लिए अस्पताल की सुविधा मुफ्त...

लड़कियों के जन्म के बाद मां-बाप को सौगात देने के लिए शुरु की गई ये सर्विस...


पिछले कुछ वर्षों में जनगणना में जिस तरह से लड़कियों का अनुपात कमता दिखाई दिया है उससे ज़ाहिर है कि समाज की सोच क्या है। ऐसे में केंद्र सरकार की तरफ से बेटियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं ने जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई है। इस जागरूरता का असर न सिर्फ समाज पर बल्कि अस्पतालों और डॉक्टरों पर भी पड़ा है। हम आपको आज एक ऐसी शख्सियत से रू-ब-रू कराएंगे जो आपकी अस्पताल को लेकर बनी एक धारणा को ग़लत साबित कर देंगे, जिसमें कहा जाता है कि अस्पताल अब एक बिजनेस है। 

आज एक ऐसे अस्पताल की कहानी, जहां शुक्रवार को पैदा होने वाली लड़कियों के मां-बाप को पैसे नहीं चुकाने पड़ते। जी हां, आपने सही सुना, ये कोई बड़े शहर का बड़ा अस्पताल नहीं है। इस कहानी को जानने के लिए आपको चलना होगा दिल्ली से करीब 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित शहर मेरठ। मेरठ का नाम भारत के 1857 की क्रांति में सबसे उपर है। लेकिन आज हम मेरठ की चर्चा जिस वजह से कर रहे हैं उसकी वजह यहां का एक अस्पताल है। मेरठ में स्थित 45 बिस्तर के इस अस्पताल की जो सबसे खास बात है कि यहां शुक्रवार को बच्चियों के जन्म लेने पर उन्हें सारी सुविधाएं मुफ्त दी जाती हैं। बेटी का पैदा होना उनके मां-बाप के लिए राहत की खबर लेकर आता है। जन्म लेने वाली बच्चियों के मां-बाप के लिए ये शुक्रवार जश्न का होता है क्योंकि उन्हें इस दिन अस्पताल के बिल की चिंता नहीं करनी पड़ती। इस दिन अस्पताल में जन्म लेने वाली बच्चियों के मां-बाप को सिर्फ दवाई का खर्च देना होता है। इसके अलावा ऑपरेशन थियटर से लेकर डॉक्टर तक सभी सुविधाएं अस्पताल की तरफ से मुफ्त दी जाती है। इस छोटे से अस्पताल ने अपने इस कदम से बहुत ही बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। दयावती अस्पताल ने ये सुविधा पिछले साल नवंबर में शुरु किया है और इसका बेहद ही सकारात्मक संदेश लोगों के बीच जा रहा है।

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योर स्टोरी से बात करते हुए अस्पताल के संस्थापक 42 साल के प्रमोद बालियान कहते हैं, 

जब पीएम नरेंद्र मोदी जी की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना की शुरुआत की तबसे ही हमारे में दिमाग में कुछ अलग करने की बात चल रही थी। सो हमने जब अपने अस्पताल के लिए इस योजना पर विचार के लिए अपनी टीम से बात की तो हमारे डॉक्टर्स और नर्स इसके लिए शुरुआत में तैयार नहीं थे। लेकिन जब मैंने उनसे अस्पताल के इस कदम से समाज में जाने वाले संदेश के बारे में बात की तो वो लोग खुशी-खुशी तैयार हो गए। 

बालियान के मुताबिक यहां नॉर्मल और सिजेरियन दोनों ही डिलीवरी की सुविधाएं मौजूद है इस पर आने वाला खर्च 8-12 हजार का होता है। लेकिन शुक्रवार को बच्चियों के जन्म पर हम ये सुविधा मुफ्त में मुहैया करवाते हैं। बालियान कहते हैं कि बच्चियों के मां-बाप के लिए ये काफी राहत भरी खबर होती है।

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इतना ही नहीं, मेरठ और आस-पास के इलाके में अस्पताल के द्वारा उठाए गए इस कदम की काफी सराहना हो रही है। शुक्रवार को जन्म लेने वाली एक बच्ची के मां-बाप से जब योर स्टोरी ने बात की तो उन्होंने कहा,

ये हमारे लिए काफी राहत भरा है। समझिए कि मैं आज अस्पताल के बिल के लिए पैसे जुगाड़ रहा होता, लेकिन लड़की के जन्म लेने की वजह से मुझे सभी सुविधाएं मुफ्त में मिल रही है।

अस्पताल के ससंस्थापक बालियान के मुताबिक, शुक्रवार का दिन ना सिर्फ हिन्दुओं के लिए बल्कि मुस्लिमों के लिए भी काफी महत्व का होता है। ऐसे में इस दिन जन्म लेने वाली सभी बच्चियों के लिए अस्पताल का बिल जीरो होना हमारी तरफ से उनके मां-बाप के लिए एक छोटी सी सौगात है। बालियान के मुताबिक, 

जब सरकार लड़कियों को आगे बढ़ाने के लिए इतना कुछ कर रही है तो हमें भी अपने अपने समाज के लिए कुछ ऐसे कदम उठाने चाहिए जो आगे चलकर लोगों पर सकारात्मक प्रभाव डाले।
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इस अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टरों और नर्स के लिए भी ये एक नया अनुभव है। इससे पहले वो जहां भी काम करते थे वहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी कि लड़कियों के जन्म पर अस्पताल बिल जीरो कर देता हो। हालांकि ये मानते हैं कि शुरुआत में जब अस्पताल के मालिक प्रमोद बालियान ने ये योजना उन लोगों के समाने लाई तो वे लोग इसके लिए तैयार नहीं थे। लेकिन जैसे ही उन्हें इस कदम से फैलने सकारात्मक संदेश के बारे में समझाया गया तो इन लोगों ने समहत होने में देरी नहीं की।

मेरठ के दयावती अस्पताल के द्वारा उठाए गए इस कदम से समाज में जाने वाले सकारात्मक संदेश के लिए योर-स्टोरी अस्पताल के इस कदम की सराहना करती है। और हम अस्पताल के इस कदम को अपनी स्टोरी के माध्यम से अपने पाठकों के बीच ले जाने का भरसक प्रयास करेंगे।

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