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दिव्यांग लोगों के लिए पहला डेटिंग एप 'इन्क्लोव'

19th Oct 2017
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टिंडर और ट्रूली मैडली में लेफ्ट राइट स्वैपिंग के इस दौर मेंं हम में से अनेकों लकी लोग हैं जोकि अलग-अलग लोग अपने जीवन-साथी पा चुके हैं? आपकी जानकारी के लिए, अपने देश में हम लोग 80 लाख दिव्यांग लोगों के साथ रहते हैं और इनमें से पांच प्रतिशत से कम की ही शादी हो पाती है।

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यह आश्चर्य की बात है कि इस बारे में कोई भी कभी सोच नहीं रहा था। लेकिन फिर कल्याणी खोना ने इसपर ध्यान दिया और पहला मैचिंग, डेटिंग फॉर डिफरेंटली एबल्ड एप बना डाला। और उसका नाम रखा इन्क्लोव।

कल्याणी का दावा है कि यह सभी तरह की दिव्यांग लोगों के लिए दुनिया की पहला डेटिंग ऐप है। इन्क्लोव की सबसे बड़ी खासियत हैं, यह एक स्क्रीन रीडर और टॉकबैक की मदद से दृष्टिहीन लोगों के लिए पूरी तरह से सुलभ है। यह बेहद सुरक्षित है। 

टिंडर और ट्रूली मैडली में लेफ्ट राइट स्वैपिंग के इस दौर मेंं हम में से अनेकों लकी लोग हैं जोकि अलग-अलग लोग अपने जीवन-साथी पा चुके हैं? आपकी जानकारी के लिए, अपने देश में हम लोग 80 लाख दिव्यांग लोगों के साथ रहते हैं और इनमें से पांच प्रतिशत से कम की ही शादी हो पाती है। यह आश्चर्य की बात है कि इस बारे में कोई भी कभी सोच नहीं रहा था। लेकिन फिर कल्याणी खोना ने इसपर ध्यान दिया और पहला मैचिंग, डेटिंग फॉर डिफरेंटली एबल्ड एप बना डाला। और उसका नाम रखा इन्क्लोव। इस एप को एक वैश्विक मानसिकता के साथ के साथ लॉन्च किया गया। कल्याणी को इस एप को बनाने का आइडिया तब आया जब वो घुमक्कड़ी कर रही थीं। वो बताती हैं, मैं चन्द्रखानी ट्रेक के लिए गई थी। एक ऊंचाई वाले हिमालय ट्रेक में हमारे साथ अजनबियों का एक समूह था। जब मैं ट्रेकिंग कर रही थी, तो मैं ये देखकर बड़ी अचंभित थी कि दिव्यांग लोग भी कितने मजे कर रहे हैं, कितना आनंद उठा रहे हैं।

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जब हुई एक प्यारी शुरुआत-

घूम-घामकर कल्याणी वापस मुंबई लौट आयीं और उन्होंने यह पता करने के लिए काफी रिसर्च किया कि दिव्यांग लोगों के लिए कोई वैवाहिक सेवाएं हैं भी या नहीं। इसके बाद कल्याणी ने सह-संस्थापक शंकर श्रीनिवासन के साथ इंक्लोव की शुरुआत की। कल्याणी का दावा है कि यह सभी तरह की दिव्यांग लोगों के लिए दुनिया की पहला डेटिंग ऐप है। इन्क्लोव की सबसे बड़ी खासियत हैं, यह एक स्क्रीन रीडर और टॉकबैक की मदद से दृष्टिहीन लोगों के लिए पूरी तरह से सुलभ है। यह बेहद सुरक्षित है क्योंकि ऐप ने स्क्रीनशॉट लेने की संभावना को अक्षम कर दिया है। यह अत्यधिक समावेशी है। सभी प्रकार के दिव्यांगों, स्वास्थ्य विकारों और विशेष आवश्यकताओं को सत्यापित और सूचीबद्ध किया गया है।

किसी अन्य डेटिंग ऐप या वैवाहिक सेवा के विपरीत, इनक्लोव से अलग-अलग पैरामीटर जैसे, आयु, स्थान, विकलांगता प्रकार और दवा और इलाज की उपलब्धता पर एक मैच मिल सकता है। इनक्लोव आने वाले साल में वैश्विक होने की ओर अग्रसर है, जिसका अर्थ है कि यह प्यार की तलाश में 600 मिलियन सिंगल लोगों की आवश्यकता पूर्ति करेगा। इनक्लोव के सह-संस्थापक शंकर श्रीनिवासन का कहना है, अलग-अलग समुदायों को बेहतर ढंग से समझने की प्रक्रिया में, हमने महसूस किया कि उनमें से कईयों के लिए सामाजिक जीवन प्रतिबंधित हैं। इन्क्लोव एक प्यारी वेबसाइट और एप है जो कि अलग-अलग लोगों को प्यार से मिलाने में मदद करता है। हमारी टीम ने महसूस किया कि सिर्फ ऑनलाइन बातचीत से भी ऊपर दिव्यांग समुदाय की भी चाहतें होती हैं कि वास्तव में फेस टू फेस किसी से मिलने का अनुभव भी मिले। दिव्यांग लोगों के प्यार को हम लोग सांसारिक रूप में खारिज करते आए हैं।

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इन्क्लोव सही मायनों में बांट रहा है प्यार-

इसलिए इनक्लोव ऑफ़लाइन मीटिंग्स भी कराती है। ये किसी जादू जैसा हो रहा था। दिव्यांग लोग अपने प्यार से मिलकर अभिभूत थे। उन लोगों के लिए हम 'हैप्पी प्लेस' ढूंढकर लाते हैं। यह हमारे सभी प्रयोक्ताओं के आने और मिलने के लिए हमारे दिल से किया जाने वाला प्रयास है। किसी भी मीटिंग वाले स्थान के लिए हम सजावट, रैंप, हैंडल, ब्रेल संकेतों, ब्रेल मेनू कार्ड जैसी सारी सुविधाओं का ध्यान रखते हैं। सुलभ शौचालयों के अलावा साइन-भाषा के दुभाषियों को भी शामिल करते हैं। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे पास किसी बैंड द्वारा एक संगीत प्रदर्शन की भी सुविधा हो। ताकि कोई भी शख्स वहां पर लेफ्टआउट न महसूस करे।

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समीर चतुर्वेदी, जोकि जेएनयू विद्यार्थी और इनक्लोव यूजर हैं, कहते हैं कि मेरा जीवन इसी चक्र में घूमता रहता था कि मैं विश्वविद्यालय में जाता था और घर वापस चला आता था। इन्कलोव ने मेरे बोरिंग जीवन में एक महान बदलाव लेकर आया है। एक व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाली एक प्रबंधन प्रशिक्षु पूजा शर्मा कहती हैं, एक धारणा बन गई है कि अक्षम लोगों को प्यार नहीं मिल सकता है। लेकिन इन्क्लोव से मेरी जिंदगी बदल रही है। क्योंकि यहां पर बहुत-से विचारधारा वाले और संवेदनशील लोग आगे आ रहे हैं। यह बहुत अच्छा है!

शंकर बताते हैं, ऐप पर 50% इन्क्लोव उपयोगकर्ताओं में से वो लोग भी हैं जो बिना किसी विकलांगता वाले हैं। हम सामान्य लोगों को इनक्लोव में शामिल होने से प्रतिबंधित नहीं करते हैं। हम हमेशा दिव्यांग लोगों के लिए एक समावेशी, सुलभ मंच प्रदान करने का उद्देश्य रखते हैं, जहां वे प्यार पाने का एक समान मौका मिलता है।

ये भी पढ़ें: 3 करोड़ के घर में रहने वाली उर्वशी क्यों लगाती हैं सड़क पर ठेला

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